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अगर आप मछली पालन (fish farming) करते हैं या इससे जुड़ी समिति चलाते हैं, तो ये ख़बर आपके लिए सोने पर सुहागा है। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए Integrated Fisheries Policy 2026 के तहत केज कल्चर योजना (cage culture scheme) शुरू कर दी है। ये स्कीम उन सभी के लिए वरदान है जो आधुनिक तरीके से मछली पालन करके अच्छी कमाई करना चाहते हैं।
क्या है केज कल्चर योजना?
केज कल्चर में जलाशयों के अंदर जाल जैसी मजबूत संरचना (Cage) लगाई जाती है, जिसमें मछलियों का पालन किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम जगह में ज्यादा उत्पादन मिलता है।
- सरकार ने राज्यभर में 10,000 केज लगाने का लक्ष्य रखा है।
- 1.100 से 1000 हेक्टेयर वाले जलाशयों में विभाग खुद योजना चलाएगा।
- 2.1000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों में मत्स्य महासंघ के जरिए योजना लागू होगी।
किसे मिलेगा फायदा?
इस योजना के लिए हर वर्ग के लोग आवेदन कर सकते हैं:
- SC, ST, OBC, सामान्य वर्ग के पारंपरिक मछुआरे
- महिला समूह
- स्व-सहायता समूह
- मत्स्य सहकारी समितियां
कितने केज मिलेंगे?
- एक हितग्राही को अधिकतम 18 केज
- किसी समिति या संस्था को अधिकतम 72 केज
यानी छोटे मछुआरे भी इसका लाभ उठा सकते हैं और बड़ी समितियां बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर सकती हैं।
कितना मिलेगा अनुदान? पूरा हिसाब-किताब
सबसे अच्छी बात यह है कि सरकार लाखों रुपये का अनुदान दे रही है। एक केज की कुल लागत 3 लाख रुपये तय की गई है। सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग अनुदान की दरें निर्धारित की हैं। एससी, एसटी और सभी वर्गों की महिलाओं को 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जो कि 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति केज बनता है। वहीं, सामान्य वर्ग और ओबीसी के पुरुषों को 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जो कि 1 लाख 20 हजार रुपये प्रति केज के बराबर है। यानी अगर आप एससी, एसटी या महिला हैं, तो सरकार आपको 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति केज मुफ्त दे रही है। बाकी बची हुई रकम आपको खुद लगानी होगी, लेकिन इतने बड़े अनुदान से आपका आर्थिक बोझ बहुत कम हो जाता है। इस तरह कम पैसे लगाकर भी आप आधुनिक तरीके से मछली पालन शुरू कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं।
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