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क्या आप जानते हैं कि सिनेमा हॉल में खाई जाने वाले कुरकुरे और टेस्टी पॉपकॉर्न अब तक ज्यादातर विदेशी बीजों पर डिपेंट थे? लेकिन अब ये ख़त्म होने वाला है। भारत ने अपनी दो नई देसी हाइब्रिड किस्में ‘Krishna459’ and ‘Godari234’ लॉन्च की हैं, जो पूरी तरह से Non-GMO and High-Expansion हैं।
किसानों के लिए सुनहरा अवसर
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के मुसुनुरु में इन किस्मों को लॉन्च किया। अब तक किसान आम मक्का उगाते थे, लेकिन अब उन्हें वैल्यू-एडेड और कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड पॉपकॉर्न खेती का मौका मिलेगा। कंपनी ने किसानों को तय ख़रीद और बेहतर कीमत का भरोसा दिया है। सबसे ख़ास बात ये है कि किसानों को बीज की जेनेटिक्स पर मालिकाना हक भी मिलेगा, जो पहले कभी नहीं हुआ था।
एक्सपोर्ट पर लगेगी लगाम
भारत अब तक अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से पॉपकॉर्न बीज आयात करता था। लेकिन ‘कृष्णा459’ और ‘गोदारी234’ पूरी तरह से देसी हैं, जो इस निर्भरता को कम करेंगे। भारत का टार्गेट 2030 तक पॉपकॉर्न आयात पूरी तरह ख़त्म करना है।
पांच साल की मेहनत, शानदार क्वालिटी
देश की प्रमुख मक्का शोध संस्थाओं के साथ मिलकर पांच फसल सीज़न में इन बीजों को तैयार और टेस्ट किया गया है। इनमें कीटों से बचाव, कम टाइम में तैयारी और अच्छी पैदावार जैसी खूबियां हैं। आकार और पॉपिंग कैपिसिटी में ये एक्सपोर्ट किस्मों की बराबरी करती हैं।
17,500 से ज़्यादा किसानों को फायदा
आठ राज्यों के 17,500 से ज्यादा किसान करीब 40,000 एकड़ में पॉपकॉर्न खेती कर रहे हैं। औसतन 4.5 टन प्रति एकड़ पैदावार के साथ किसानों को प्रोसेसर-ग्रेड क्वालिटी मिलेगी। छोटे और सीमांत किसानों की आमदनी में लंबे वक्त तक सुधार की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
‘कृष्णा459’ और ‘गोदारी234’ सिर्फ दो किस्में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम हैं। ये पॉपकॉर्न क्रांति किसानों को सशक्त बनाएगी और देश को Foreign dependence से फ्री करेगी। आने वाले वक्त में हर सिनेमा हॉल का पॉपकॉर्न ‘मेड इन इंडिया’ बीजों से बनेगा।
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