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कृषि मंत्री ने फिर किया कृषि क़ानूनों का बचाव

पूछा, किसानों को मनचाही क़ीमत पर फ़सल बेचने की छूट देना ग़लत कैसे हो सकता है?

नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जिन राज्य सरकारों ने मंडी में होने वाली खरीद-बिक्री पर टैक्स लगा रखा है, उनके ख़िलाफ़ तो किसान नेता कुछ नहीं बोल रहे, आन्दोलनकारी भाई भी उन लोगों के ख़िलाफ़ ही आन्दोलन कर रहे हैं, जिन्होंने किसानों की फसल पर टैक्स माफ़ किया है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने एक बार फिर से विवादित कृषि क़ानूनों की पैरवी की और किसान आन्दोलन को ग़ैर-वाज़िब ठहराया है। दिल्ली के पूसा कृषि संस्थान में सालाना कृषि मेले के उद्घाटन के दौरान तोमर ने कहा कि नये कृषि क़ानूनों के माध्यम से किसान चाहें तो मंडी के बाहर या कहीं भी, किसी को भी मनचाही क़ीमत पर अपनी फसल बेच सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि केन्द्र सरकार ने किसानों को मंडी के बाहर उपज की खरीद-बिक्री पर किसी भी तरह के टैक्स से माफ़ी दी, बिना टैक्स के कहीं भी उपज बेचने की अनुमति दी, क़ानूनी बन्दिशों से आज़ादी दी तो इसमें ग़लत क्या है। तोमर ने कहा कि जिन राज्य सरकारों ने मंडी में होने वाली खरीद-बिक्री पर टैक्स लगा रखा है, उनके ख़िलाफ़ तो किसान नेता कुछ नहीं बोल रहे, आन्दोलनकारी भाई भी उन लोगों के ख़िलाफ़ ही आन्दोलन कर रहे हैं, जिन्होंने किसानों की फसल पर टैक्स माफ़ किया है।

समारोह में मौजूद किसानों से कृषि मंत्री ने सवाल किया कि ‘क्या यह आन्दोलन न्यायोचित है?’ इसके जवाब में भीड़ ने कहा, ‘नहीं’। ऐसा सुनकर तोमर ने कहा कि ‘दुर्भाग्य से यह आन्दोलन हो रहा है, हमारे देश में लोकतंत्र है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। बस, अन्तर इतना है कि चेहरा कभी किसी का होता है, कभी किसी और का। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वो सरकारी योजनाओं और नये कृषि अनुसंधान का लाभ उठाकर देश को आत्मनिर्भर बनाएँ।

पूसा कृषि मेले के मुख्य आकर्षण

तीन दिवसीय पूसा कृषि मेले के मुख्य आकर्षण हैं – फल-फूल, सब्जी और रबी फसलों की उन्नत प्रजातियों तथा उनकी उत्पादन तकनीक का सजीव प्रदर्शन, उन्नत कृषि यंत्रों, बीजों और पौधों की प्रदर्शनी तथा बिक्री, किसान गोष्ठी, कृषि सम्बन्धी प्रकाशनों का वितरण, किसानों को सलाह, मृदा (मिट्टी) और पानी की जाँच तथा किसानों के लिए मुफ़्त स्वास्थ्य जाँच सुविधा।

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