जानिए मशरूम की खेती से कपास का क्या है कनेक्शन, कपास की खेती कर रहे किसानों के लिए काम की है ये तकनीक

कपास की खेती कर रहे किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एक तकनीक ईज़ाद की है। इस तकनीक की मदद से किसान कपास के साथ ही मशरूम की खेती भी आसानी से कर सकते हैं। जानिए क्या है तकनीक और कैसे किसानों को दे सकती है ये लाभ।

कपास की खेती cotton farming cotton stalks mushroom ki kheti मशरूम की खेती

कपास की खेती नगदी फसल के रूप में होती है। हमारे देश में कपास का सबसे अधिक उत्पादन गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में होता है। इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफ़ा मिलता है। भारत की लगभग 94 लाख हेक्टेयर की भूमि पर कपास की खेती (Cotton Cultivation) की जाती है। प्रत्येक हेक्टेयर से 20 लाख टन कपास के डंठल बतौर ऐग्रिकल्चर वेस्ट निकलते हैं। क्या आपको पता है कि कपास की खेती कर रहे किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए इन  डंठलों का इस्तेमाल कर सकते हैं? कम लागत में मशरूम की खेती (Mushroom Cultivation) करके लाभ कमा सकते हैं। कपास के डंठल यानी Cotton Stalks से ऑएस्‍टर मशरूम की खेती की तकनीक, Central Institute for Research on Cotton Technology ने ईज़ाद की है।

कपास की खेती cotton farming cotton stalks
तस्वीर साभार: staticflickr

कपास के डंठल से ऑएस्‍टर मशरूम (Oyster Mushroom) तैयार करने की ख़ासियत:

  • एक किलो सूखे कपास के डंठल से एक महीनें में लगभग 300 ग्राम ऑएस्‍टर मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है।
  • एक किलो मशरूम उगाने का खर्च 50 रुपये पड़ता है, जिसमें स्पॉन की लागत भी शामिल है।
  • ऑएस्‍टर मशरूम की बाज़ारी कीमत 80 से 150 रुपये प्रति किलो है। मूल्य उत्पाद की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है।
  • आमतौर पर ऑएस्‍टर मशरूम उगाने वाले किसान बतौर कंपोस्ट धान या गेंहू के भूसे का इस्तेमाल करते हैं। इस नई  तकनीक में धान या गेंहू के भूसे की जगह कपास के भूसे का इस्तेमाल किया जाता है। 
कपास की खेती cotton farming cotton stalks
तस्वीर साभार: ICAR

जानिए मशरूम की खेती से कपास का क्या है कनेक्शन, कपास की खेती कर रहे किसानों के लिए काम की है ये तकनीकतकनीक के फ़ायदे

इस तकनीक को लेकर ICAR-CIRCOT का कहना है कि मशरूम में भरपूर प्रोटीन होता है, ऐसे में गांव में इसकी खेती होने पर ग्रामीणों की भी प्रोटीन की ज़रूरत पूरी होने लगेगी। जहां तक किसानों के मुनाफ़े का सवाल है तो कपास के डंठल से ऑएस्‍टर मशरूम की खेती करके किसान महीनें का 10 हज़ार रुपये तक कमा सकते हैं।

यहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग

नागपुर के ICAR-CIRCOT के गिनिंग ट्रेनिंग सेंटर में इस तकनीक को लेकर ट्रेनिंग दी जाती है। इस तकनीक के बारे में और ज़्यादा जानकारी के लिए आप 022-24127273, 022-24127276, 022-24184274, 022-24184275 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। 

ऑयस्टर मशरूम के पोषक तत्व

एक अध्‍ययन के अनुसार ऑएस्‍टर मशरू में बटन मशरूम या शिटेक से ज्‍यादा पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं। ये राइबोफ्लेविन, पोटेशियम, विटामिन बी 6, फोलिक एसिड (फोलेट), मैगनीशियम, विटामिन सी, पैंटोथैनिक एसिड और अमीनो एसिड मौजूद से भरपूर होता है। ये मशरूम कोलेस्ट्रॉल और ग्लूटेन से भी मुक्त होता है।

कपास की खेती cotton farming cotton stalks mushroom ki kheti मशरूम की खेती
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कई उत्पाद बनाकर आमदनी में कर सकते हैं इज़ाफ़ा

कई उत्पाद बनाकर आमदनी में इज़ाफ़ा ढिंगरी मशरूम को सुखाकर अधिक समय तक इसका भंडारण भी किया जा सकता है। मशरूम से अचार, पाउडर, शूप, भूजिया सहित कई और उत्पाद बनाए जाते हैं। किसान घरों में ही मशरूम से अलग-अलग उत्पाद बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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