Table of Contents
गर्मी आते ही आम, केला और पपीते की खुशबू बाजारों में महकने लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में रखा चमकीला केला या गुलाबी पपीता आपकी सेहत के लिए ज़हर बन सकता है? हां, कुछ लालची व्यापारी मांग का फायदा उठाकर फलों को ख़तरनाक केमकल्स से पका रहे हैं। अब इस पर FSSAI ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है।
कौन से केमिकल बन रहे हैं ख़तरनाक?
1. Calcium Carbide-पूरी तरह बैन
यह वही रसायन है जिसका इस्तेमाल वेल्डिंग में होता है। फलों पर इसका पाउडर डालने से वे झट से पक जाते हैं, लेकिन…
नुकसान:
- उल्टी, चक्कर, घुटन
- त्वचा पर छाले
- लंबे समय में कैंसर जैसी बीमारियां
FSSAI ने साफ किया है,इसका इस्तेमाल पूरी तरह अपराध है।
2. एथेफोन (Ethephon)-गलत तरीका बैन
व्यापारी केले को एथेफोन के घोल में डुबोकर पका रहे हैं। नियमों के मुताबिक, फलों को सीधे किसी भी रसायन (पाउडर या लिक्विड) के संपर्क में लाना प्रतिबंधित है।
FSSAI ने राज्यों को क्या निर्देश दिए?
FSSAI ने सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को पत्र लिखकर आदेश दिया है-
- मंडियों, गोदामों और भंडारण केंद्रों में निरीक्षण तेज़ किया जाए
- कैल्शियम कार्बाइड, सिंथेटिक रंगों और गैर-मान्य वैक्स पर पूरी तरह से बैन
- विशेष अभियान चलाकर व्यापारियों के गोदामों की जांच हो
- अपराधी व्यापारियों पर कानूनी कार्रवाई होगी
अब आधुनिक तकनीक से होगी पकड़
FSSAI ने अधिकारियों को नए जांच तरीके भी सिखाए हैं। अब गोदामों में स्ट्रिप पेपर टेस्ट से पता लगाया जाएगा कि हवा में एसीटिलीन गैस (जो कैल्शियम कार्बाइड से निकलती है) तो नहीं है। यानी अब छिपाना मुश्किल होगा।
आम उपभोक्ता कैसे करें खुद को बचाएं?
FSSAI का कहना है-उपभोक्ताओं की सेहत सबसे ऊपर है। आप भी सतर्क रहें-
- कृत्रिम रूप से पका फल
- प्राकृतिक रूप से पका फल
- ज्यादा चमकीला और एकसमान रंग
- हल्का-हल्का पीलापन, कहीं हरापन
- बाहर से पका, अंदर से कच्चा
- अंदर और बाहर एक जैसा पका
- स्वाद फीका या कड़वा
- मीठी खुशबू और प्राकृतिक मिठास
अहम बात- फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं। मौसमी और स्थानीय फल ही खरीदें। बहुत ज्यादा चिकने और चमकीले फलों से बचें।
क्या होगा उल्लंघन पर?
FSSAI ने साफ कर दिया है – अगर किसी मंडी या गोदाम में कैल्शियम कार्बाइड या प्रतिबंधित रसायन मिलते हैं, तो उसे अपराध माना जाएगा। संबंधित व्यापारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और यहां तक कि जेल की सजा हो सकती है।
गहरी बात- सिर्फ पकाना ही नहीं, पूरी सप्लाई चेन पर नज़र
FSSAI ने ये भी कहा है कि सिर्फ फ़ल ही नहीं, बल्कि उनके भंडारण और परिवहन पर भी नजर रखी जाएगी। कई बार व्यापारी गोदाम में ही रसायन मिलाते हैं। अब स्ट्रिप टेस्ट से ऐसे गोदामों की पहचान आसान होगी।

