ओडिशा सरकार ने देसी चावल की पारंपरिक किस्मों को बचाने और बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार अब फिलीपींस के इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) के साथ मिलकर काम करेगी। इस पहल का सबसे बड़ा फोकस ओडिशा के मशहूर कालाजीरा चावल पर होगा, जिसे ‘चावल का राजकुमार’ भी कहा जाता है।
क्या है ख़ासियत?
कालाजीरा चावल अपनी अनोखी ख़ुशबू और लाजवाब टेस्ट के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। ये चावल ख़ास तौर से कोरापुट जिले के आदिवासी किसान उगाते हैं और इसे GI टैग भी मिला हुआ है। इसकी कीमत बाजार में 150 से 350 रुपये प्रति किलो तक है, लेकिन अब ये और भी महंगा और मांग वाला हो सकता है।
कैसे होगा फायदा?
IRRI के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. नेसे श्रीनिवासुल (Chief Scientist Dr. Nese Sreenivasulu) के लीडरशिप में एक टीम ने ओडिशा के उपमुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव से मुलाकात की। इस साझेदारी से किसानों को आधुनिक तकनीक मिलेगी, जिससे चावल की क्वालिटी और भी बेहतर होगी। सबसे बड़ी बात ये है कि किसानों को अब उनकी फसल का सही दाम मिलेगा।
किसानों और महिलाओं को मिलेगा मौका
आंकड़ों की मानें तो 2024 में कोरापुट के 1800 से ज्यादा किसानों ने 1365 एकड़ में कालाजीरा की खेती की थी। 2025 में ये क्षेत्र बढ़कर 2000 एकड़ हो गया। अब सरकार चाहती है कि और अधिक किसान इसकी खेती करें। इस पहल में महिला स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जाएगा। महिलाएं चावल प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और छोटे कारोबार से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी। टूटे चावल से वैल्यू-एडेड फूड प्रोडक्ट भी बनाए जाएंगे।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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