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राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार को आयोजित प्रथम “किसान ऑफ इंडिया सम्मान 2025” ने भारतीय कृषि में नवाचार और उद्यमशीलता का उत्सव मनाया। किसान ऑफ इंडिया सम्मान 2025 भारत के किसानों के असाधारण योगदान को सम्मानित करने वाला एक प्रतिष्ठित वार्षिक आयोजन है, जिसकी मेजबानी देश के विश्वसनीय कृषि-समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किसान ऑफ इंडिया’ ने की। हर वर्ष, हजारों प्रेरक जमीनी नवप्रवर्तक अपने साहस, प्रयोगधर्मिता, सतत खेती और सामुदायिक नेतृत्व के माध्यम से भारतीय कृषि को बदल रहे हैं।
अमित सोनी: मिलेट आधारित फूड इनोवेशन की राष्ट्रीय पहचान
जोधपुर, राजस्थान के उद्यमी अमित सोनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उनके मिलेट से बने बेकरी उत्पाद आज संसद से लेकर वैश्विक मंचों तक की पहचान बन चुके हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि किस तरह उनके द्वारा तैयार बाजरे के चॉकलेट ट्रफल केक को संसद में काटा गया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी सराहना की।
पैनलिस्ट सना खान ने कहा देश का भविष्य खेती से है जुड़ा
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वर्मीकम्पोस्टिंग में उनके योगदान की प्रशंसा के बाद लोकप्रिय हुईं सना खान ने युवाओं से कृषि अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि “देश का भविष्य खेती से जुड़ा है। हम लोगों को खेती से जुड़े रहने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”
जयपुर, राजस्थान के प्रगतिशील किसान खेमाराम चौधरी भारत में आधुनिक कृषि का चेहरा प्रस्तुत करते हैं। वे 8 एकड़ बंजर भूमि पर पॉलीहाउस में हाइड्रोपोनिक एनएफटी सिस्टम के माध्यम से फसलें उगा रहे हैं। चौधरी इस अवसर पर सम्मानित किए गए सात किसानों में से एक हैं।
ICAR की सराहना: नवाचार करने वाले किसानों के लिए राष्ट्रीय प्रशंसा
इन कृषि नायकों के प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) तथा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि इन किसानों की अभिनव खेती तकनीकें देश के लाखों किसानों के लिए उज्ज्वल उदाहरण हैं।

डॉ. राजर्षि रॉय बर्मन और अभिनेता राजेश कुमार द्वारा सम्मान
डॉ. राजर्षि रॉय बर्मन, अतिरिक्त महानिदेशक (कृषि प्रसार), ICAR ने सातों श्रेणियों के विजेताओं को सम्मानित किया। किसानों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “किसान सबसे बड़ा रिसर्चर है, जो हर दिन मिट्टी पर प्रयोग करता है।”

उनके साथ किसानों को सम्मानित करने के लिए अभिनेता-किसान राजेश कुमार भी उपस्थित रहे, जो टीवी धारावाहिक ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ में अपनी भूमिका से घर-घर में पहचाने जाते हैं। उन्होंने खेती की ओर अपने सफर को साझा करते हुए उम्मीद जताई कि वे किसानों की आवाज बनकर पूरे भारत का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।

दूरदराज के किसानों तक नवाचार पहुंचाने की ज़रूरत

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अनिल धस्माना, पूर्व सचिव, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) और पूर्व चेयरमैन, नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) ने कहा, “हमें दूरदराज के इलाकों के किसानों को आज के नवाचारों और नई सोच से जोड़ने की आवश्यकता है।”
मिलेट की खेती- दूसरी हरित क्रांति
मिलेट की खेती को बढ़ावा देने की अपील करते हुए विनोद मिश्रा, कंट्री मैनेजर, यूनाइटेड नेशंस ऑफिस फॉर प्रोजेक्ट सर्विसेज (UNOPS) ने कहा, “मिलेट की खेती, हरित क्रांति के बाद दूसरी बड़ी क्रांति साबित होगी।”

7 श्रेणियों में किसानों को सम्मान
किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में में सात श्रेणियों – ऑर्गेनिक/प्राकृतिक खेती, संरक्षित खेती, फूड प्रोसेसिंग, कृषि स्टार्ट-अप, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन और कृषि में नई तकनीक – में उत्कृष्ट किसानों को सम्मानित किया गया।
प्रतिष्ठित जूरी पैनल
जूरी में कृषि और मीडिया जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल थीं – पद्मश्री सेथपाल सिंह, प्रख्यात किसान; डॉ. शैलेन्द्र राजन, पूर्व निदेशक, ICAR–सेंट्रल इंस्टिट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, लखनऊ; प्रो. ए. पी. राव, पूर्व निदेशक (एक्सटेंशन), आचार्य नरेन्द्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, अयोध्या, उत्तर प्रदेश; और प्रताप सोमवंशी, मैनेजिंग एडिटर, दैनिक हिन्दुस्तान।

पैनल चर्चाएं: महिला किसान, एग्री-टेक और क्लाइमेट-स्मार्ट खेती पर विमर्श
एक दिवसीय कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों की भूमिका, एग्री-टेक स्टार्ट-अप्स और क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर जैसे विषयों पर पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें देश के प्रमुख विशेषज्ञों और संस्थानों ने भाग लिया।
किसान ऑफ इंडिया सम्मान 2025 के पुरस्कार विजेता
1. ऑर्गेनिक/प्राकृतिक खेती – नरेंद्र सिंह मेहरा
हल्द्वानी, उत्तराखंड के नरेंद्र सिंह मेहरा ने ऑर्गेनिक खेती को अपना जीवन मिशन बना लिया है। वे रसायन-मुक्त मिट्टी और विष-रहित भोजन के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने गेहूं की स्थानीय प्रजाति ‘नरेंद्र 09’ विकसित की है और 10 स्थानीय सुगंधित धान की किस्मों को पुनर्जीवित किया है जो लगभग लुप्त हो चुकी थीं। ऑर्गेनिक खेती को लेकर फैली भ्रांतियों को तोड़ते हुए उन्होंने एक पौधे से 25 किलोग्राम हल्दी उत्पादन का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने गोंद कतीरा (Tragacanth gum) की मदद से कम पानी वाली धान की खेती का मॉडल विकसित किया है, जिससे लगभग 70% तक पानी और 90% तक मानवीय श्रम की बचत होती है।

2. संरक्षित खेती – खेमाराम चौधरी
राजस्थान के जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के खेमाराम चौधरी ने वर्ष 2012 में इज़राइल की यात्रा से लौटने के बाद आधुनिक तकनीकों जैसे सोलर पैनल और हाइड्रोपोनिक एनएफटी सिस्टम के साथ पॉलीहाउस स्थापित किया। मात्र 400 वर्गमीटर के पहले पॉलीहाउस से उन्हें 13 लाख रुपये की कमाई हुई। आज उनके आठ एकड़ क्षेत्र में फैले पॉलीहाउस फार्म में फार्म पॉन्ड, ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, सोलर पंप और सॉइल स्ट्रेटिफिकेशन जैसी तकनीकों का उपयोग कर पानी और बिजली की बचत की जाती है। उनके मार्गदर्शन में संरक्षित खेती के मॉडल लगभग 1100 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किए जा चुके हैं।

3. फूड प्रोसेसिंग – गुरप्रीत सिंह शेरगिल
पटियाला, पंजाब के गुरप्रीत सिंह शेरगिल को वर्ष 2013 में गुलाब के फूलों की बंपर पैदावार के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस चुनौती को अवसर में बदला और अतिरिक्त फूलों से रोज ड्रिंक विकसित किया। सरकारी मार्गदर्शन और सब्सिडी की मदद से उन्होंने प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की और ‘शेरगिल फार्म फ्रेश’ ब्रांड की शुरुआत की, जिसके तहत एलोवेरा जूस, आंवला जूस और गुलाब जल जैसे प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। शेरगिल के शब्दों में, उनके ग्राहक ही उनके वास्तविक ब्रांड एंबेसडर हैं।

4. कृषि स्टार्ट-अप – रविंद्र माणिकराव मेटकर
महाराष्ट्र के अमरावती के रविंद्र माणिकराव मेटकर ने 16 वर्ष की आयु में अपने घर की छत पर 100 ब्रॉयलर मुर्गियों से पोल्ट्री फार्मिंग शुरू की थी। 41 वर्ष बाद उनका फार्म आज पांच मंज़िला स्वचालित इकाई बन चुका है, जिसमें 1.8 लाख लेयर पक्षी हैं। इसमें 30,000 पक्षियों वाली पूर्णतः स्वचालित यूनिट और 1,20,000 पक्षियों वाली सेमी-ऑटोमेटेड यूनिट शामिल हैं। उनकी बैटरी केज एनवायरनमेंट कंट्रोल तकनीक मौसम और संक्रमण से जुड़ी जोखिमों को कम करने में मदद करती है। उनका फार्म प्रतिदिन लगभग 1.2 लाख अंडों का उत्पादन करता है।

5. डेयरी फार्मिंग – सुरेन्द्र अवाना
राजस्थान के जयपुर जिले के भेलारा (या भैराना) गांव के सुरेन्द्र अवाना की डेयरी फार्म देश में नस्ल सुधार का एक राष्ट्रीय मॉडल बन चुकी है। फार्म में सेक्स सॉर्टेड सीमन टेक्नोलॉजी के माध्यम से 400 से अधिक बछड़ों का जन्म हो चुका है। फार्म में पार्लर मिल्किंग मशीन और मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित है, जहां रोजाना 500 लीटर दूध की प्रोसेसिंग होती है। अवधाना लगभग 1500 परिवारों के ‘फैमिली फार्मर’ हैं, जिन्हें वे दूध, दही, छाछ, पनीर और घी उपलब्ध कराते हैं। फार्म में 25 प्रकार के बहुवर्षीय ऑर्गेनिक हरे चारे की किस्में भी उगाई जाती हैं।

6. मत्स्य पालन – शिव प्रसाद सहनी
बिहार के सीवान जिले के शिव प्रसाद सेहनी पहले वर्ष में लगभग 75,000 रुपये की वार्षिक आय कमाते थे। आज उनकी टर्नओवर करोड़ों रुपये में पहुंच चुकी है। उन्होंने अपनी अनुपजाऊ भूमि पर करीब 90 बीघा क्षेत्र में 50 से अधिक तालाब खुदवाकर मत्स्य पालन शुरू किया। वे अनेक प्रजातियों की मछलियों के फिंगरलिंग तैयार करते हैं और सालाना लगभग 90 क्विंटल फिश सीड बेचते हैं।

7. कृषि में नई तकनीक – अभिषेक धामा
दिल्ली के पल्ला गांव के अभिषेक धामा ने अपनी यात्रा की शुरुआत किचन गार्डन से की थी। आज उनकी ऑर्गेनिक मल्टी-लेयर्ड फार्मिंग 40 एकड़ क्षेत्र में फैली है, जहां साल में 4–6 फसलें ली जाती हैं। ड्रिप इरिगेशन, सोलर वॉटर मॉनिटरिंग, प्री-कूलिंग, हाइड्रो-कूलिंग और ‘पूसा फार्म सन फ्रिज’ जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने उत्पादन को दोगुना करने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हासिल किया है।


