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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) ने कृषि के क्षेत्र में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे देश को चौंका दिया है। देश में पहली बार किसी एक राज्य के 12 कृषि और उद्यानिकी उत्पादों को एक साथ GI टैग (12 agricultural and horticultural products awarded GI tags simultaneously) मिला है। ये कीर्तिमान मध्य प्रदेश के नाम दर्ज हुआ है। ये सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों, बागवानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए आर्थिक समृद्धि और वैश्विक पहचान का नया रास्ता है।
इन 12 उत्पादों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
इस लिस्ट में वे प्रोडक्ट्स शामिल हैं, जो सालों से अपनी ख़ासियत के लिए मशहूर हैं-
1.गुना का कुम्भराज धनिया: इसकी खास सुगंध और मिठास पूरे देश में मशहूर है। गुना अकेले देश का 20-25% धनिया पैदा करता है।
2.नरसिंहपुर का बरमान बैंगन: नर्मदा नदी की रेतीली मिट्टी में उगा यह बैंगन अपने अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है।
3.खरगोन की लाल मिर्च: निमाड़-मालवा की यह मिर्च अपने तीखेपन और रंग के लिए चीन, पाकिस्तान, मलेशिया तक निर्यात होती है।
4.आलीराजपुर का नूरजहां आम: दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाने वाला यह आम 3-3.5 किलो तक का होता है और एक फुट तक लंबा हो सकता है।
5.मांडू की खुरासानी इमली: दरअसल यह अफ्रीका का बाओबाब वृक्ष है, जिसे 14वीं सदी में मांडू लाया गया। इसका पेड़ उल्टा लगा हुआ लगता है।
6.सिवनी का सीताफल: ‘जंबो सीताफल’ के नाम से मशहूर, एक फल 600-700 ग्राम तक का होता है।
7.बैतूल का गजरिया आम: 500 साल पुराने गोंड राजाओं के किलों के क्षेत्रों में होने वाला यह आम अचार और अमचूर के लिए प्रसिद्ध है।
8.मालवा का आलू और गराड़ू: आलू अपनी बेहतरीन क्वालिटी के लिए और गराड़ू (बैंगनी रतालू) मालवा की पारंपरिक मिठाइयों की जान है।
9.नरसिंहपुर का गुड़: ‘शुगर बॉउल’ कहे जाने वाले नरसिंहपुर की काली कपासी मिट्टी में उगा गन्ने से बना यह गुड़ शुद्धता के लिए मशहूर है।
10.जबलपुर का सिंघाड़ा: जबलपुर और सतना के करीब 4,500 किसान इसकी खेती से जुड़े हैं, और यह अपने आकार और पोषण के लिए जाना जाता है।
11.जबलपुर की हरी मटर: प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह मटर सिर्फ 40-60 दिनों में तैयार हो जाती है।
2030 तक 30 लाख हेक्टेयर का टारगेट
राज्य सरकार ने Horticulture sector के विस्तार का बड़ा लक्ष्य रखा है। वर्तमान में लगभग 28 लाख हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलों की खेती हो रही है, जिसे 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ फल, सब्जी और मसाला फसलों की खेती अपनाने की अपील की है, ताकि उनकी आय दोगुनी हो सके।
किसानों को क्या होगा फायदा?
GI टैग सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि एक आर्थिक हथियार है-
- मज़बूत ब्रांडिंग: उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी
- नकली उत्पादों पर रोक: किसी और को इन नामों का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा
- बेहतर दाम: गुणवत्ता की गारंटी के कारण किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा
- निर्यात के नए अवसर: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी
- ग्रामीण रोज़गार: लोकल प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा मिलेगा
अब और उत्पाद GI टैग की रेस में
राज्य सरकार ने 7 और उत्पादों के लिए GI टैग का प्रस्ताव भेजा है, जिनमें उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल-पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी शामिल हैं। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।
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