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Mixed-Cropping: नारियल के बगीचे में मिश्रित खेती अपनाई, आधुनिक तकनीक से हुआ फ़ायदा

मिश्रित फसल उगाना किसानों के लिए क्यों है फ़ायदेमंद?

महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले की किसान प्रियंका नागवेकर ने आधुनिक तरीके से खेती करना शुरू किया। उन्होंने नारियल की खेती के साथ Mixed-Cropping का कांसेप्ट अपनाया।

Mixed-Cropping | मिश्रित फसल की खेती यानि एक फसल की खेती करते हुए दूसरी फसल भी लगाना। दोनों फसलें एक दूसरे को सहयोग करती हैं। मिश्रित खेती करने से पहले किसानों को इसके बारे में सही जानकारी होना भी ज़रूरी है मसलन किन-किन फसलों की मिश्रित खेती (Mixed-Cropping) की जा सकती है। आज इस लेख हम आपको बताने जा रहे हैं कैसे महाराष्ट्र की इस युवती ने नारियल की खेती के साथ किन किन फसलों की खेती कर अच्छी आमदनी अर्जित की है। Mixed Farming benefits क्या हैं? मिश्रित खेती में कौन सी फसल उगाई जाती है? इन सबके के बारे में आपको इस लेख में आपको जानकारी मिलेगी। 

कई किसान मिश्रित खेती को अपना रहे हैं और इससे उन्हें फ़ायदा भी हुआ है। आज हम आपको एक ऐसी ही युवती के वारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने मिश्रित खेती अपनाकर अपनी आमदनी में इज़ाफ़ा किया है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले की प्रियंका नागवेकर के लिए नारियल के बगीचों में मसालों की खेती करना फ़ायदेमंद रहा।

आज की तारीख में प्रियंका नागवेकर आत्मनिर्भर बन परिवार के अन्य लोगों के लिए भी रोज़गार सुनिश्चित कर रही हैं। प्रियंका अपने क्षेत्र में प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं। प्रियंका महाराष्ट्र के जिस कोंकण क्षेत्र से आती हैं वहां काजू की खेती ज़्यादा होती है। नारियल और मसालों की मिश्रित खेती ने कैसे बनाया प्रियंका को किसान उद्यमी आइए, जानते हैं।

ICAR के संपर्क में आने के बाद सपनों को लगे पंख

रत्नागिरी ज़िले के हातिस गांव की रहने वाली प्रियंका पिछले 12 सालों से खेती-बाड़ी करती आ रही हैं। वो एक कृषि परिवार से ही आती हैं। शुरुआत में वो चावल, बाजरा और कई तरह की सब्ज़ियों की ही खेती किया करती थी। 22 एकड़ के खेत में प्रियंका पारंपरिक तरीके से खेती करती थी। इस वजह से उनकी आय बहुत सीमित थी। उन्हें खेती की नई तकनीक मिश्रित खेती (Mixed-Cropping) के बारे में पता नहीं था। उन्होंने एक बार ICAR के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां से प्रियंका के सपनों को पंख लग गए। ICAR के इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें नारियल के बगीचे में मसाले उगाने और फसल का उत्पादन बढ़ाने में वर्मीकंपोस्ट की भूमिका के बारे में पता चला। उनकी इसमें दिलचस्पी बढ़ी। प्रियंका ने अतिरिक्त आमदनी के लिए नारियल के बगीचे में काली मिर्च, जायफल और दालचीनी की खेती शुरू कर दी।

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नारियल की खेती के साथ शुरू की मसालों की खेती

उन्होंने नारियल व मसालों की खेती और वर्मीकंपोस्ट उत्पादन (Vermicompost Production) करने की तकनीक के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए 5 दिन के वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके साथ ही नारियल के पेड़ पर चढ़ने की तकनीक जानने के लिए भी एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने वर्मीकंपोस्ट के लिए एक यूनिट बनाने के साथ ही अपने पुराने नारियल के बगीचे में मसालों की व्यवसायिक खेती शुरू कर दी। लोगों के बीच कच्चे नारियल और कालीमिर्च, जायफल, कोकम जैसे मसालों की बढ़ती मांग ने भी उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद की।

mixed cropping technique

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मसालों की नर्सरी बनाई

नारियल और मसालों की Mixed-Cropping में सफलता हासिल करने के बाद प्रियंका ने काली मिर्च की कटिंग/सीडलिंग के साथ एक स्पाइस नर्सरी यानी मसालों की नर्सरी बनाने की सोची। इसके लिए उन्होंने नर्सरी मैनेजमेंट के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

प्रियंका ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्मीकंपोस्ट  (Vermicompost) और वर्मीकल्चर (Vermiculture) के उत्पादन को अच्छा विकल्प मानती हैं, क्योंकि इसमें बहुत कम लागत और कम समय की ज़रूरत होती है।

आर्थिक स्थिरता

खेती में नई तकनीक अपनाकर न सिर्फ़ उनकी आमदनी  में बढ़ोतरी हुई, बल्कि उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित की। मिश्रित खेती, वर्मीकंपोस्ट यूनिट और स्पाइस नर्सरी से उनका सालाना टर्नओवर 5.73 लाख का है। सिर्फ़ खेती से उन्हें 3.82 लाख का शुद्ध लाभ हो रहा है। आगे अब उनकी योजना वर्जिन कोकोनट ऑयल प्रोडक्शन ( Virgin Coconut Oil Production) की भी है। प्रियंका की तरह आप भी खेती की नई तकनीक अपनाकर और नए-नए प्रयोग करके अपनी आमदनी में इज़ाफा कर सकते हैं।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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