सरकार का बड़ा फैसला: गेहूं, आटा, मैदा और सूजी प्रोडक्ट्स का निर्यात अब पूरी तरह से मुफ़्त

सरकार का यह फैसला भारतीय कृषि और निर्यात क्षेत्र के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। लगभग चार साल बाद गेहूं और उसके प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट पूरी तरह से फ्री हो गया है

केंद्र सरकार ने गेहूं और उससे बने प्रोडक्ट्स के निर्यात को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। Ministry of Commerce के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) ने गेहूं, आटा, मैदा और सूजी समेत सभी संबंधित प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट को ‘प्रतिबंधित’ (Prohibited) कैटेगरी से हटाकर ‘फ्री’ (Free) कैटेगरी में डाल दिया है। ये बड़ा नीतिगत बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। 

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह फैसला भारत की बढ़ती घरेलू उपलब्धता और रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की वजह से लिया गया है। सरकार के पास अब गेहूं का इतना बड़ा भंडार है कि उसे फूड सिक्योरिटी की कोई चिंता नहीं है। इस साल भारत का गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 12.06 करोड़ टन पहुंच गया है, जो पिछले साल से 2.7 मिलियन टन ज्यादा है । वहीं, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 1 अगस्त 2026 तक 5.05 करोड़ टन गेहूं का भंडार था, जो पिछले पांच साल का उच्चतम स्तर है । इन्हीं कारणों से अब भारत के लिए यह संभव हो पाया है कि वो ग्लोबल मार्केट में फिर से अपनी उपज बेच सके।

क्या-क्या बदला है?

DGFT ने दो अलग-अलग Notification जारी की हैं :

1.गेहूं का निर्यात: ITC (HS) Code 10011900 (ड्यूरम गेहूं) और 10019910 (अन्य गेहूं) के तहत आने वाले गेहूं का एक्सपोर्ट अब ‘Restricted’ से ‘फ्री’ कर दिया गया है।

2.आटा, मैदा और सूजी का एक्सपोर्ट: ITC (HS) Code 11010000 के तहत आने वाले गेहूं का आटा, मैदा, रवा/सूजी, होलमील आटा और रिजल्टेंट आटा को भी ‘प्रतिबंधित’ से ‘मुफ्त’ कर दिया गया है। 

एक्सपोर्टर्स और किसानों को क्या फायदा होगा?

यह फैसला उन सभी कारोबारियों, आटा मिल मालिकों और एक्सपोर्टर्स के लिए राहत भरा है, जो पिछले चार सालों से प्रतिबंधों का सामना कर रहे थे। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद गेहूं की वैश्विक कीमतें बढ़ गई थीं, जिससे भारत ने खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्यात पर रोक लगा दी थी ।

Global Perspective में क्यों है अहम?

ये फैसला ग्लोबल लेवल पर भी बहुत अहम है। फिलहाल, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष की वजह काला सागर क्षेत्र से गेहूं की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज़ी आई है । ऐसे समय में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश भारत का बाजार में वापस आना, एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के आयात निर्भर देशों के लिए बड़ी राहत हो सकती है।

सरकार का यह फैसला भारतीय कृषि और निर्यात क्षेत्र के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। लगभग चार साल बाद गेहूं और उसके प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट पूरी तरह से फ्री हो गया है, जो न केवल किसानों और कारोबारियों को फायदा पहुंचाएगा, बल्कि Global Food Security में भी भारत की अहम भूमिका को दिखाता है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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