समुद्र की गोद में छिपा है भोजन का खजाना, और भारत ने साल 2025 में इस खजाने को और अधिक गहराई से खोदा है। आपके लिए एक बेहद अच्छी ख़बर है। देश में समुद्री मछली उत्पादन में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी (Increase of approximately 3% in marine fish production) हुई है और कुल उत्पादन बढ़कर 35.7 लाख टन तक पहुंच गया है।
ये आंकड़ा सिर्फ नंबर नहीं है, ये समुद्र से जुड़े लाखों परिवारों की रोजी-रोटी और उनकी बढ़ती मेहनत की कहानी है। ये जानकारी Central Marine Fisheries Research Institute (CMFRI) की ताजा रिपोर्ट में आई है।
अब सवाल यह है कि ये बढ़ोतरी तो हुई, लेकिन इतनी कम क्यों? क्या समुद्र में मछलियां कम हो गईं? नहीं, असल वजह कहीं और है।
राज्यों का उतार-चढ़ाव भरा प्रदर्शन
दरअसल, इस बार मौसम ने बहुत करवट ली। जहां दक्षिण भारत के राज्यों ने बाजी मार ली, वहीं पश्चिम का दिग्गज राज्य गुजरात फिसल गया।
तमिलनाडु ने रचा इतिहास: पहली बार, तमिलनाडु 6.85 लाख टन उत्पादन के साथ देश का नंबर-1 राज्य बन गया है। उसने लंबे समय से चैंपियन रहे गुजरात को पीछे छोड़ दिया।
गुजरात क्यों पिछड़ा? : गुजरात में उत्पादन 15 फीसदी घट गया। इसके पीछे तीन बड़े दुश्मन थे-:
- खराब मौसम: तूफानी हवाएं
- चक्रवात: समुद्र में जाना मुहाल
- लंबी मछली पकड़ने की रोक : जिससे नावें बंद रहीं
वहीं, कर्नाटक ने कमाल कर दिया। वहां 44 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, तो महाराष्ट्र ने भी 18 फीसदी की छलांग लगाई।
किन मछलियों ने बनाई ये सफलता?
समंदर की लहरों में यह साल इंडियन मैकेरल (बांगड़ा) का रहा। यह 2.70 लाख टन के साथ सबसे अधिक पकड़ी गई मछली बनी।
इसके बाद सेफालोपॉड्स (Squid-Octopus) जिसमें 25 फीसदी और थ्रेडफिन ब्रीम्स जिसमें सालभर में 55 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई।
केरल: ऑयल सार्डिन की शानदार वापसी
केरल के लिए ये ख़बर और भी ख़ास है। यहां Indian Oil Sardine (मथी/तर्ली) ने एक दशक के बाद धमाकेदार वापसी की है। ये मछली 1.68 लाख टन पकड़ी गई, जो पिछले 10 साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
विज्ञान क्या कहता है? (In-depth Analysis)
CMFRI के विशेषज्ञ ग्रिन्सन जॉर्ज के अनुसार, यह सफलता दो बड़े सिद्धांतों को दर्शाती है:
1.नियंत्रित मछली पकड़ना: पिछले कुछ सालों में कड़े नियम बनाए गए। प्रजनन के समय मछली पकड़ने पर रोक (बैन) ने छोटी मछलियों को बढ़ने का मौका दिया।
2.अनुकूल पर्यावरण: समुद्र का तापमान और लवणता (केमिस्ट्री) इस बार छोटी पेलाजिक मछलियों (जैसे सार्डिन) के लिए परफेक्ट रही।
अगर हम समुद्री संसाधनों का सही और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल करें, तो उत्पादन लगातार बढ़ सकता है। यह जरूरी नहीं कि ज्यादा नावें समंदर में जाएं, बल्कि जरूरी है कि मछलियों को पनपने का समय दिया जाए।

