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मालगाड़ियां रोकने से पंजाब नहीं पहुंचा फर्टिलाइजर, गेहूं की फसल पर मंडराया खतरा

रेल बंद होने का बड़ा असर पंजाब के कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। राज्य के किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में लगभग 70 फीसदी गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है जबकि इसके लिए आवश्यक यूरिया व अन्य फर्टिलाइजर अभी तक किसानों के पास नहीं पहुंच सके हैं।

मोदी सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि विधेयकों के विरोध को लेकर पंजाब में शुरु किए गए ‘रेल रोको आंदोलन’ का नकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है। आंदोलन के चलते पंजाब में रेल मार्ग जाम कर दिए गए तथा सभी प्रकार की ट्रेनों को बंद करने की चेतावनी दी गई। इस पर केन्द्र रेल मंत्रालय ने पंजाब जाने वाली अधिकतर ट्रेनों को बंद कर दिया।

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रेल बंद होने का बड़ा असर पंजाब के कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। राज्य के किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में लगभग 70 फीसदी गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है जबकि इसके लिए आवश्यक यूरिया व अन्य फर्टिलाइजर अभी तक किसानों के पास नहीं पहुंच सके हैं।

उल्लेखनीय है कि पंजाब में रबी सीजन के कुल 13.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होती है जिसमें से लगभग 11 लाख मीट्रिक टन का उपयोग गेहूं की फसल के लिए किया जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार अभी फसलों को उर्वरकों की सर्वाधिक आवश्यकता है। यदि इस समय भी उर्वरक नहीं पहुंच पाए तो काफी फसल का नुकसान हो जाएगा।

गेहूं की बुवाई हो चुकी है शुरू

आपको बता दें कि गेहूं की बुवाई का आदर्श समय नवंबर के पहले 15 दिनों का माना जाता है, हालांकि किसान महीने के अंत तक इसकी बुवाई करते रहते हैं। इसी समय खेत में उर्वरक की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। परन्तु अभी यह नहीं पहुंच पाया है। ज्वॉइंट डायरेक्टर डॉ. बलदेव सिंह ने कहा कि पंजाब में अभी स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि भले ही हम आज ही डिलीवरी करना आरंभ कर दें लेकिन किसानों तक पहुंचने में इसे कम से कम सात से दस दिन लग जाएंगे जो काफी लेट हो जाएगा।

रोजमर्रा की वस्तुओं का भी हो रहा है अभाव

सरकारी अधिकारियों का अनुमान था कि हमेशा की तरह इस बार भी पंजाब के किसानों को सही समय पर उर्वरक मिल जाएंगे परन्तु किसान यूनियनों के रेल रोको आंदोलन के चलते ट्रेन रोक दी गई, नतीजतन न केवल उर्वरक वरन जनसामान्य के रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली वस्तुओं का भी अभाव हो गया है।

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