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क्या आप जानते हैं कि अक्सर फसल कम होने की वजह से बीजों में मिलावट, कंकड़-पत्थर या रोग से ग्रस्त दाने होते हैं? राजस्थान के किसानों के लिए ये बड़ी परेशानी ख़त्म होने वाली है। कोटा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (Kota Agriculture University) में सूबे का पहला और देश का दूसरा ऑटोमैटिक बीज प्लांट लगाया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने इस प्रोजेक्ट के लिए 9 करोड़ रुपये एक्सेप्ट किए हैं।
क्यों है यह प्लांट खास?
इस प्लांट में पहले स्टेप में 7 Modern Machines लगाई जाएंगी, जो Color sorting technology से बीजों को उनके रंग, साइज़ और क्वालिटी के आधार पर छांटेंगी। ये मशीनें ख़राब, काले, अधपके या रोगग्रस्त दानों को पहचानकर अलग कर देंगी। इसके साथ ही, बीजों में मिली धूल-मिट्टी, भूसा और छोटे कंकड़-पत्थर को भी पूरी तरह से अलग किया जाएगा। बीजों की सफाई से लेकर लास्ट पैकेजिंग तक का हर काम मशीनें खुद-ब-खुद करेंगी।
किसानों को क्या मिलेगा?
हाड़ौती संभाग जिसमें कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ शामिल हैं, सोयाबीन, गेहूं, सरसों और चने का बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। अब तक किसानों को बीजों में मिलावट और ख़राब दानों के कारण कम अंकुरण (Germination) और कम पैदावार का सामना करना पड़ता था। इस प्लांट के शुरू होने के बाद उन्हें 100 फीसदी प्योर, Certified और High-Quality वाला बीज अपने ही क्षेत्र में मिल सकेगा। इससे न सिर्फ उनकी लागत और मेहनत बचेगी, बल्कि फसल की क्वालिटी सुधरेगी और मंडियों में उन्हें बेहतर दाम भी मिलेंगे।
एक्सपर्ट की राय
Agriculture Expert का मानना है कि ये प्लांट राजस्थान के कृषि क्षेत्र में क्रांति लाएगा। अच्छे बीज से ही अच्छी फसल मिलेगी। ये प्लांट न सिर्फ किसानों को फायदा पहुंचाएगा बल्कि राज्य को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम होगा।
बीजों के लिए किसानों को नहीं पड़ेगा भटकना
रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. विमला डुंकवाल ने बताया कि इस प्लांट के लिए 2.5 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक मशीनें ख़रीदी जाएंगी और 2.5 करोड़ रुपये का नया भवन बनेगा। ये परियोजना जल्द ही ज़मीन पर उतरने वाली है। अब बीजों के लिए किसानों को दूर-दूर नहीं भटकना पड़ेगा और न ही मिलावटी बीजों के झंझट से जूझना होगा।
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