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लोकतंत्र के लिए खतरा है कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग : रामदास आठवले

केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि किसान संगठनों द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग लोकतंत्र के लिए खतरा है।

केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि किसान संगठनों द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग लोकतंत्र के लिए खतरा है।

रामदास आठवले ने कहा कि कानून वापस लेना असंभव है। आने वाले बजट सेशन में कृषि कानूनों में कुछ सुधार हो सकता है। ऐसे में किसानों को सरकार के प्रस्ताव को मानकर आंदोलन खत्म करना चाहिए। मुझे लगता है कि तीनों कानून किसानों के भले के लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई राज्यों के किसानों के साथ बात करते हुए उनकी शंकाएं दूर की हैं।

आठवले ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा, “कानून वापस लेना नहीं आसान, फिर क्यों कर रहे हो आंदोलन किसान।” उन्होंने किसानों से आंदोलन भी खत्म करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मोदी सरकार किसानों को मजबूत और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए काम कर रही है।

रामदास आठवले ने 2013-14 के आंकड़ों की आज से तुलना करते हुए बताया कि वर्ष 2013-14 में किसानों के लिए यूपीए सरकार में 21,900 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट था, लेकिन मोदी सरकार का 2020-21 का बजट 1 लाख 34 हजार 339 करोड़ रुपये का है।

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