Table of Contents
त्रिपुरा सरकार (Government of Tripura) ने अनानास (Pineapple) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 236 करोड़ रुपये की भव्य ‘मिशन क्वीन पाइनएप्पल’ योजना (‘Queen Pineapple’ Mission) शुरू की है, जो न केवल राज्य के अनानास उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देगी बल्कि हजारों किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी।
इस मिशन की सबसे ख़ास बात
ये है कि त्रिपुरा में उगाई जाने वाली क्वीन किस्म की अनानास अपनी अद्भुत मिठास, बिना रेशे वाले गूदे, मनमोहक सुगंध और बेहतर गुणवत्ता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है, और राज्य के करीब 12,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है जो हजारों किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
अहम बात यह है कि अनानास उगाने वाले लगभग 75 प्रतिशत किसान आदिवासी समुदायों से आते हैं, और राज्य से हर साल करीब 23,000 मीट्रिक टन क्वीन अनानास बाजारों में भेजा जाता है, जबकि कुल मिलाकर त्रिपुरा में हर साल 1.7 से 1.8 लाख टन अनानास का उत्पादन होता है, जिससे यह पश्चिम बंगाल के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा अनानास उत्पादक राज्य बनता है।
इंडिया टॉप 5 देश में शामिल
भारत दुनिया के शीर्ष पांच अनानास उत्पादक देशों में शामिल है और वैश्विक उत्पादन में उसकी लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और वर्ष 2025-26 में देश में करीब 11.04 लाख टन अनानास का उत्पादन हुआ, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल का प्रमुख योगदान रहा।
त्रिपुरा सरकार का मिशन-अनानास को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना
त्रिपुरा सरकार ने इस मिशन के तहत अनानास को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान दिलाने के लिए तीन दिवसीय पाइनएप्पल महोत्सव का आयोजन किया, जिसका उद्घाटन राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने किया, जहां 25 प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए जिनमें ताजा अनानास, अनानास से बने प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प और त्रिपुरा के अन्य स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, क्योंकि सरकार चाहती है कि किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा जाए और उन्हें उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।
अनानास से बनते हैं इतने सारे प्रोडक्ट्स
अनानास से सिर्फ ताजा फल ही नहीं बल्कि जूस, जैम, कैंडी, सूखे स्लाइस, सॉस और सिरका जैसे वैल्यू-एडेड उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचा रहे हैं, इसके अलावा अनानास से मिलने वाले ब्रोमेलिन का उपयोग दवा उद्योग में किया जाता है, और अनानास की पत्तियों से निकलने वाले रेशे का इस्तेमाल प्रीमियम फैशन उत्पादों, होम डेकोर और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग बनाने में हो रहा है, जिससे अनानास उद्योग की संभावनाएं काफी बड़ी हो गई हैं।
सरकार का टारगेट
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का लक्ष्य 2028 तक अनानास से होने वाले आर्थिक कारोबार को 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है, जो कि एक बहुत बड़ी छलांग होगी, और इसके लिए योजना के तहत किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात ढांचे को मजबूत करने और अनानास उत्पादकों के लिए एक टिकाऊ मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से खेती का प्रशिक्षण
इस मिशन के माध्यम से सरकार ने किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से खेती का प्रशिक्षण देने, उन्हें सीधे विदेशी बाजारों से जोड़ने और अनानास उत्पादन को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई है, क्योंकि सरकार जानती है कि अनानास सिर्फ एक फल नहीं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, खासकर आदिवासी समुदायों के लिए जो पीढ़ियों से इसकी खेती करते आ रहे हैं।
त्रिपुरा के किसान अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी क्वीन अनानास की मीठी महक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी महकाएगी, क्योंकि सरकार की कोशिश है कि इस मिशन के पूरा होने पर हर किसान की आय कई गुना बढ़ जाए, नए रोजगार के अवसर पैदा हों, और त्रिपुरा का अनानास वैश्विक पहचान बनाए, जिससे राज्य की समग्र आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और भारत की वैश्विक अनानास बाजार में हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।
236 करोड़ रुपये का यह निवेश आने वाले वर्षों में सैकड़ों करोड़ का रिटर्न देगा, और यह मिशन सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि त्रिपुरा के हर किसान के जीवन को बदलने वाला एक ऐतिहासिक अभियान है, जो यह साबित करेगा कि सही योजना और मेहनत से एक छोटा सा राज्य भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है और अपने किसानों को समृद्ध बना सकता है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

