Natural Farming से बदली किसान की तकदीर, नवरूप सिंह का मॉडल बना मिसाल

नवरूप सिंह का Natural Farming और पारंपरिक जीवनशैली पर आधारित मॉडल आज चर्चा में है।

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र में एक किसान ने अपनी सोच और प्रयोगों से न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। नवरूप सिंह का Natural Farming और पारंपरिक जीवनशैली पर आधारित मॉडल आज चर्चा में है।

Natural Farming ओर बढ़ता कदम

आधुनिक खेती के दौर में जहां रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग बढ़ता जा रहा है, वहीं रायसिंहनगर के किसान नवरूप सिंह ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर एक नई राह दिखाई है। उन्होंने न केवल अपनी खेती को पूरी तरह जैविक बनाया, बल्कि अपने जीवन को भी प्रकृति के करीब ढाल लिया।

Natural Farming से बदली किसान की तकदीर, नवरूप सिंह का मॉडल बना मिसाल
Pic credit: SHABD

इको-फ्रेंडली घर बना पहचान

नवरूप सिंह का घर भी उनकी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कच्ची ईंटों से एक सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल घर बनाया है, जिसमें पुराने सामान का रचनात्मक उपयोग किया गया है। परात को वॉश बेसिन में बदलना, पीतल के बर्तनों और ड्रम से चिमनी बनाना और वर्षा जल संचयन जैसी व्यवस्थाएं उनके घर की विशेष पहचान हैं।

जैविक खेती से स्वास्थ्य और समृद्धि

खेती के क्षेत्र में उन्होंने रासायनिक खेती से दूरी बनाते हुए जैविक पद्धति को अपनाया। उनका मानना है कि अत्यधिक रसायनों के इस्तेमाल से न केवल फसलें जहरीली हो रही हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा बढ़ रहा है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने भाइयों के सहयोग से ऑर्गेनिक खेती शुरू की, जिसमें आज विभिन्न प्रकार की जैविक फसलें और सब्जियां उगाई जा रही हैं।

पशुपालन से बढ़ी आत्मनिर्भरता

इसके साथ ही नवरूप सिंह लगभग 50 साहीवाल नस्ल की देशी गायों का पालन कर रहे हैं। इससे उन्हें शुद्ध दूध के साथ-साथ जैविक खाद भी प्राप्त होती है, जो उनकी खेती को और मजबूत बनाती है।

विदेश से गांव तक का सफ़र

करीब 10 वर्षों तक कनाडा में रहने के बाद नवरूप सिंह वर्ष 2009 में भारत लौटे और गांव में रहकर प्राकृतिक जीवनशैली अपनाई। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधारोपण अभियान भी चलाया, जिसके तहत अब तक 150 किस्मों के 750 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे शामिल हैं।

ग्रामीणों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

उनकी इस पहल का असर अब आसपास के ग्रामीणों पर भी दिखने लगा है। लोग प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

पारंपरिक जीवनशैली ही असली सुख

नवरूप सिंह का मानना है कि पारंपरिक जीवनशैली—जैसे कच्चे घरों में रहना, मेहनत करना और शुद्ध भोजन करना—ही असली सुख और स्वास्थ्य का आधार है। उनका यह मॉडल आज किसानों के लिए आत्मनिर्भरता और सतत विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।

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