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झारखंड के जामताड़ा जिले में एक महिला किसान ने पथरीली और बंजर जमीन को अपनी मेहनत से सोना बना दिया है। लेमनग्रास की खेती अपनाकर सुनीता हांसदा न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अब सालाना तीन से चार लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर उन्होंने यह सफ़लता हासिल की है।
पथरीली जमीन पर उगाई सफ़लता की फसल
जामताड़ा जिले के फतेहपुर क्षेत्र के शिमलाडंगाल गांव की रहने वाली सुनीता हांसदा ने जिले में बड़े पैमाने पर लेमनग्रास की खेती कर एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने करीब चार एकड़ बंजर और पथरीली जमीन पर लेमनग्रास उगाकर यह साबित कर दिया कि सही तकनीक और मेहनत से किसी भी जमीन को उपजाऊ बनाया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं से मिला संबल
सुनीता हांसदा को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और लखपति दीदी योजना का लाभ मिला। इसके अलावा वे आजीविका सखी मंडल से भी जुड़ी हैं। इन योजनाओं के सहयोग से उन्हें सिंचाई और खेती के लिए आवश्यक संसाधन मिले, जिससे उनकी खेती का विस्तार संभव हो सका।
सालाना लाखों की आमदनी
लेमनग्रास की खेती से सुनीता आज सालाना तीन से चार लाख रुपये तक का मुनाफ़ा कमा रही हैं। खास बात यह है कि वे अपने उत्पाद को केवल स्थानीय बाज़ार तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि दूसरे राज्यों तक भी सप्लाई कर रही हैं। इस कार्य में उनकी बेटी नयनतारा मरांडी भी उनका पूरा सहयोग करती हैं।
औषधीय गुणों से भरपूर, बढ़ी बाज़ार में मांग
विशेषज्ञों के अनुसार लेमनग्रास एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसके तेल की बाजार में काफी मांग है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के कार्यक्रम प्रबंधक राहुल रंजन बताते हैं कि लेमनग्रास के तेल की कीमत अधिक होने के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रहा है। ज़िले में प्रोसेसिंग प्लांट लगने से किसानों को और अधिक फ़ायदा मिलने की संभावना है।
मेहनत और धैर्य का मिला फल
लेमनग्रास का पौधा पूरी तरह तैयार होने में करीब तीन साल का समय लेता है, लेकिन इसके बाद हर तीन महीने में फसल की कटाई की जा सकती है। लगातार उत्पादन और अच्छी कीमत मिलने से यह खेती किसानों के लिए स्थायी आय का स्रोत बन रही है।

बनीं प्रेरणा, बदल रही सोच
सुनीता हांसदा की सफ़लता अब आसपास के गांवों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी बढ़ती आमदनी और आत्मनिर्भरता को देखकर अन्य किसान भी लेमनग्रास की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफ़लता हासिल की जा सकती है। लेमनग्रास की खेती ने जामताड़ा की सुनीता हांसदा की जिंदगी बदल दी है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि नवाचार, मेहनत और सरकारी सहयोग से किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन सकते हैं।
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