India-New Zealand Agriculture Partnership: कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग,किसानों की आमदनी बढ़ाने की नई पहल
कृषि अनुसंधान, इनोवेशन, कौशल विकास और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों पर मिलकर काम करने का भी फैसला हुआ है।
कृषि अनुसंधान, इनोवेशन, कौशल विकास और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों पर मिलकर काम करने का भी फैसला हुआ है।
PRAGATI को निजी क्षेत्र के नेतृत्व में सबसे बड़ा कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम माना जा रहा है । इस Multi-partner alliance में पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जुड़ी हैं।
दोस्तों, ये सिर्फ एक हैकाथॉन नहीं है। ये भारत के किसानों का भविष्य है। ये हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित भोजन की गारंटी है।
ये एआई-बेस्ड पोर्टल (AI-Based Rural Internal Audit Porta), जो ऑडिट के पूरे प्रोसेस को इंटीग्रेटेड, टेक्निक बेस्ड और ऑटोमेटिक बनाएगा।
केंद्र सरकार की योजनाओं ने बिहार के कृषि क्षेत्र में एक आधारभूत परिवर्तन की प्रक्रिया को गति दी है। यह परिवर्तन अभी पूरे नहीं है, लेकिन इसकी दिशा स्पष्ट है-एक ऐसे कृषि मॉडल की ओर, जो अधिक तकनीक-आधारित, बाजार-संवेदनशील और जोखिम-प्रबंधन सक्षम है।
आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद (ICAR-Indian Institute of Oilseeds Research, Hyderabad) ने ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ (‘Oilseeds Kisan Mitra’) नाम की एक क्रांतिकारीAI Service शुरू की है
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ
BRICS में 11 देश हो गए हैं- ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया। ये सभी देश मिलकर दुनिया की आधी से ज्यादा खाद्य ज़रूरतें पूरी करते हैं।
हां एक तरफ सरकार किसानों से अनाज खरीदती है, वहीं कटाई के बाद सही सुविधाएं न होने से यह अनाज बेकार हो जाता था। लेकिन अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने इस बड़ी चुनौती से निपटने का अनोखा तरीका ढूंढ लिया है। स्टील के ‘साइलो’ (Mission Silo)।
RBI की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, इस बार किसानों की फसल की किस्मत दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) की रफ्तार और फैलाव पर टिका होगा।
सीएम योगी ने साफ कहा कि Meteorological Early Warning System को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए लास्ट पर्सन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
Center of Excellence for Flowers में डच रोज़ जैसी दुर्लभ विदेशी प्रजातियां और गेंदे की उच्च गुणवत्ता वाली वैरायटी लगाई जाएंगी। यानी जो फूल अब तक दूसरे राज्यों या विदेशों से मंगवाए जाते थे, वे अब अयोध्या की मिट्टी में खिलेंगे।
इस रीसर्च के लीडर डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला (Dr. Kutubuddin Ali Molla)और उनकी टीम (Including Priya Das, Romeo Saha, and Debasmita Panda) ने धान की फसल पर ये तकनीक सफलतापूर्वक आजमाई।
भारत में डेयरी सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन जरूरत थी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की। यह प्लांट उसी कमी को पूरा करता है। इसमें लगी आधुनिक मशीनें कम समय में अधिक उत्पादन करने में सक्षम हैं। इससे दूध की सप्लाई चेन (सप्लाई चेन) मजबूत होगी और उत्पादों की गुणवत्ता वैश्विक स्तर की हो जाएगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नया ‘Hyper Local Forecast System’ शुरू किया है, जिसके जरिए किसानों को ब्लॉक स्तर पर 10 दिन पहले तक बारिश और मौसम की जानकारी मिल सकेगी।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर (Pacific ocean) में अल नीनो (El Niño) की स्थिति धीरे-धीरे बन रही है। अल नीनो का मतलब है कि समुद्र की सतह सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाती है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय पशुपालक एवं दुग्ध उत्पादक सम्मेलन (State-Level Conference of Livestock Farmers and Milk Producers) में ऐलान किया कि अब सरकार पशुपालकों से भरपूर मात्रा में दूध खरीदेगी और उन्हें उचित दाम दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
इस परियोजना के तहत मोबाइल मिल्क टेस्टिंग लैब, आधुनिक मिल्क कूलिंग सिस्टम और डेयरी ढांचे (Mobile Milk Testing Lab, Modern Milk Cooling System and Dairy Structures) को मज़बूत किया जा रहा है। किसानों से सीधे दूध कलेक्शन होगा, जिससे बिचौलियों की दखल ख़त्म होगी।
कृषि विभाग केंद्र, तालाब टिल्लो में स्थापित यह आधुनिक पॉलीहाउस पूरी तरह स्वचालित प्रणाली से संचालित है। इसे किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध कराने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
धान की खेती में परंपरागत रूप से खेतों में लगातार पानी भरा रखा जाता है। इससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और खेतों से मीथेन गैस निकलती है। मीथेन (Methane), कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide) से 25 गुना ज्यादा हानिकारक होती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक है, इसलिए यहाँ से निकलने वाली मीथेन की मात्रा चिंताजनक है।