National Women Farmers Day: कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अहम, तय किया मान्यता से लेकर अधिकार तक का सफ़र
राष्ट्रीय महिला किसान दिवस (National Women Farmers Day) जो 15 अक्टूबर को हर साल उन्हीं अनाम नायिकाओं के सम्मान और संघर्षों को समर्पित है।
राष्ट्रीय महिला किसान दिवस (National Women Farmers Day) जो 15 अक्टूबर को हर साल उन्हीं अनाम नायिकाओं के सम्मान और संघर्षों को समर्पित है।
प्रणाली प्रदीप मराठे (Pranali Pradeep Marathe) जिन्होंने अपने जुनून और मेहनत से जैविक खेती (Organic Farming) की नई मिसाल कायम की है। प्रणाली की ज़मीन पूरी तरह से पत्थरों से ढकी हुई थी, जहां मिट्टी का नामोनिशान तक नहीं था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पत्थरों में छेद करके गड्ढे बनाए, उनमें मिट्टी भरी और धीरे-धीरे अपने घर के आसपास 0.2 एकड़ ज़मीन पर जैविक खेती (Organic Farming) शुरू की।
कृषि के ज़रीये महिलाओं को सशक्त (Role Of Women In Agriculture) बनाना सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए फायदेमंद है। अगर उन्हें ज्ञान, संसाधन और अवसर मिलें, तो वे न केवल अपना जीवन बदल सकती हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था (Country’s economy) को भी नई दिशा दे सकती हैं।
प्रधानमंत्री ने एक बैंक सखी से भी संवाद किया, जो प्रतिमाह 4 से 5 लाख रुपये का लेन-देन करती हैं। एक अन्य महिला ने कहा कि उन्होंने लाखपति दीदी बनने का जो अनुभव प्राप्त किया है, उसे अन्य महिलाओं के साथ भी साझा करना चाहती हैं ताकि वे भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
मिजोरम के कोलासिब ज़िले के हमरवेंग गांव की मिट्टी में एक नई कहानी लिखी जा रही है। कहानी एक प्रगतिशील महिला किसान की, जिन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गईं। मिलिए एफ. लालछुआनवमी से, एक ऐसी महिला जिन्होंने पारंपरिक झूम खेती के दायरे से बाहर निकलते हुए, कृषि-बागवानी और पशुधन आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली यानि Integrated Farming System को अपनाकर अपनी ज़मीन का कायाकल्प कर दिया।
महुआ एक तरह का फूल है जिसमें बहुत ही तेज़ महक होती है, आमतौर पर इसे शराब बनाने के लिए जाना जाता है, लेकिन अब इससे कई तरह की स्वादिष्ट और हेल्दी चीज़ें बनाई जा रही हैं। जानिए कैसे महुआ के उत्पाद (Mahua Products) बनाकर बस्तर की गुलेश्वरी ठाकुर और उनकी टीम ने इससे लाखों का बिज़नेस खड़ा कर दिया है।
पूजा विश्वकर्मा ने 6 साल पहले 40 हज़ार रुपये की लागत से मोती की खेती का व्यवसाय शुरु किया। लगातार 2 साल तक संघर्ष करने के बाद उन्हें सफलता मिली।
किचन गार्डन बनाने से सुनीता सिंह के महीने की सब्जियां खरीदने का खर्च तो कम हुआ ही, साथ ही तरोताज़ा सब्जियां भी खाने को मिलती हैं।
कर्नाटक की गरीब महिलाएं जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, उनके लिए कर्नाटक सरकार की संजीवनी योजना उम्मीद की एक किरण है। इस योजना का मकसद महिलाओं को प्रशिक्षण और मार्केटिंग की सुविधा प्रदान करके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। कैसे कर्नाटक की महिलाओं के लिए साप्ताहिक बाज़ार एक वरदान साबित हो रहे हैं, जानिए इस लेख में।
दूध का उत्पादन, डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए किस तरह फ़ायदे का बिज़नेस बन रहा है, इसको लेकर महिला किसान सरनजीत कौर ने किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत की। जानिए डेयरी फ़ार्मिंग (Dairy Farming) से जुड़ी उनकी कई सलाहों के बारे में।
महाराष्ट्र के अहमद नगर ज़िले की रहने वाली कविता प्रवीण जाधव का शुरू से ही खेती के प्रति लगाव था। उन्होंने किसानों की उत्पादकता को बढ़ाने और उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए कई अहम कदम उठाए। आज उनके साथ कई महिला किसान जुड़ी हुई हैं।
जो किसान नई तकनीक अपनाकर खेती को एक व्यवसाय की तरह कर रहे हैं उन्हें इससे अच्छी आमदनी हो रही है। एक ऐसी ही तकनीक है एकीकृत कृषि प्रणाली। ऐसी ही एक महिला किसान हैं अरकेरी गांव की दोंदुबाई हन्नू चव्हाण, जो अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।
कर्नाटक की प्रगतिशील महिला किसान सरोजा ने KVK की मदद से कई सब्ज़ियों में प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक अपनाई और अपने क्षेत्र के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई हैं। जानिए कैसे हुआ उन्हें मुनाफ़ा?
बैकयार्ड मुर्गी पालन के लिए सही नस्ल की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। क्या वो मुर्गी उस क्षेत्र के हिसाब से ठीक है या नहीं, इसके बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। जानिए कैसे तेलंगाना की रहने वाली पुष्पा ने मुर्गी की उन्नत नस्ल से अपने आप को आत्मनिर्भर बनाया।
लेमनग्रास भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय न हो, मगर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने का यह अच्छा ज़रिया है। लेमनग्रास की खेती बंजर भूमि में भी आसानी से की जा सकती है।
भारतीय रसोई में मसाले का महत्वपूर्ण स्थान है। मसालों के बिना ज़ायकेदार व्यंजन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। तभी तो उत्पादन और निर्यात के मामले में भारत सबसे आगे है। किसान न सिर्फ मसालों की खेती, बल्कि मसालों का मूल्य वर्धन करके भी अच्छी कमाई कर सकते हैं।
कर्नाटक के वडेराहल्ली गांव की रहने वाली सत्याकुमारी के लिए बुनियादी ज़रूरतों को भी पूरा करने में मशक्कत करनी पड़ती थी। जानिए कैसे रेशम कीट पालन और सब्जियों की अंतर-वर्ती खेती ने उन्हें कामयाब महिला उद्यमी बनाया।
आज के दौर में वही किसान सफल होता है जो बदलते वक्त की नब्ज़ पकड़कर खुद को आधुनिक खेती की तकनीकों से अपडेट करता है। पारंपरिक खेती से मुनाफ़ा कमाना अब बहुत मुश्किल है, ऐसे में खेती को व्यवसाय की तरह करने और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से ही सफलता मिलती है और इसकी बेहतरीन मिसाल हैं अंबाला की महिला किसान अमरजीत कौर।
पलाश ब्रांड का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करना है। उनके द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों को बाज़ार मुहैया करना, उचित दाम दिलवाना, ये सब पलाश ब्रांड के तहत किया जा रहा है।
पंजाब की बीबी कमलजीत कौर ने किचन गार्डन में सब्ज़ियां उगाने से शुरुआत की और अब वो एक सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं।