देश की पहली ‘Cow Genomics Lab’ का बरेली में उद्घाटन: जानिए कैसे बदलेगा डेयरी सेक्टर का भविष्य और पशुपालकों की किस्मत
बरेली में देश के पहले एकीकृत ‘स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Cow Genomics Lab, Bareilly) का उद्घाटन हुआ।
बरेली में देश के पहले एकीकृत ‘स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Cow Genomics Lab, Bareilly) का उद्घाटन हुआ।
आमतौर पर जिस उम्र में बुज़ुर्ग बिस्तर पर पड़े रहते हैं और उनके लिए अपने रोज़मर्रा के काम करना भी
Milk Production In India : Dairy experts and the National Dairy Development Board (NDDB) का मानना है कि ये कोई बड़ी समस्या नहीं, बशर्ते पशुपालक पुराने तौर-तरीकों को बदलकर आधुनिक, वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाएं। ऐसा करने से न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि आमदनी भी दोगुनी हो सकती है।
27 नवंबर 2025 को ‘किसान सम्मान 2025’ (Kisan of India Samman 2025)से सम्मानित सुरेंद्र अवाना से हुई इस ख़ास बातचीत के मुख्य अंश यहां पेश हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने 15 सितंबर को पूर्णिया स्थित एक अत्याधुनिक सीमन स्टेशन पर ‘Sex Sorted Semen Facility’ (लिंग-चयनित वीर्य सुविधा) का उद्घाटन किया। ये न केवल बिहार बल्कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की पहली ऐसी सुविधा है, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना के तहत स्वदेशी तकनीक ‘Gausort’ से लैस किया गया है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board) ने हाल ही में देश के पहले ‘Super Bull’ यानी महाशक्तिशाली सांड़ ‘वृषभ’ के जन्म की घोषणा की है। ये कोई आम सांड़ नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक जीनोमिक चयन (Genomic Selection) और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन–एंब्रियो ट्रांसफर (IVF-ET) तकनीक का चमत्कार है।
मध्यप्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना’ (Dr.Bhimrao Ambedkar Kamdhenu Scheme) की शुरुआत की।
भारत ने ऊन उत्पादन (Wool Production) एक चमकता हुआ रत्न (The Story of Golden Fibres) है। वर्ष 2023-24 में भारत ने 33.69 मिलियन किलोग्राम (लगभग 3.37 करोड़ किलो) ऊन का उत्पादन करके एक नई उपलब्धि हासिल की है।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (National Dairy Research Institute), करनाल के वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग तकनीक (Cloning Technology Created History) के जरिए एक बड़ी सफलता पाई है। देश की पहली क्लोन गिर गाय ‘गंगा’ (Country’s first cloned Gir cow ‘Ganga’) के अंडाणुओं (Ovum) से एक स्वस्थ बछड़ी का जन्म हुआ है।
गर्मी के मौसम में पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सरकार की ‘पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण योजना’ के तहत, पशुओं के रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और निवारण के लिए पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल में मदद करती है।
डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इनसे दूध उत्पादन में कमी, रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट और यहां तक कि मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। उचित प्रबंधन के बिना, यह समस्या पशुपालकों को आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान पहुंचा सकती है। जानिए कौनसे तरीकों से आप इससे पशुओं का बचाव कर सकते हैं
पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (Livestock, Health & Disease Control Programme) में किए गए ये संशोधन देश के पशुधन क्षेत्र को एक नई दिशा देंगे। ये स्कीम न केवल पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि किसानों और पशुपालकों की आय में भी बढ़ोत्तरी करेगी। सरकार का ये प्रयास भारत को एक मजबूत पशुधन अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) बिजनेस ने पिछले कुछ सालों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी की है। डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) आधुनिक तरीके से हजारों पशुपालकों को डेयरी प्रबंधन में मदद करता है। डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) में डेयरी प्रबंधन के कारण बहुत सारी नौकरियां पैदा की हैं। लेकिन कई डेयरी फार्म अभी भी अधिकतर गांवों में डेयरी फार्मों (Dairy Farming) का मैनेजमेंट करते हैं और बड़ी कंपनियों को दूध की आपूर्ति करते हैं, साथ ही खुदरा दुकानों को भी बेचते हैं। लेकिन अपना डेयरी फार्म बनाकर उसे चलाना ज़्यादा मुनाफे का सौदा है।
सुअर पालन (Backyard Pig Farming) न केवल उनके लिए एक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि ये आर्थिक संकट के समय में तत्काल नकदी की सुविधा भी देता है। हालांकि, परंपरागत तरीकों से सुअर पालन (Backyard Pig Farming) करने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता था। इन स्थानीय सूअरों का आकार छोटा होता था और उनकी विकास दर भी कम थी।
नागालैंड (Nagaland), भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों (north east states) में से एक, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां की जनजातीय (Tribe) संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली इस राज्य की पहचान का ख़ास हिस्सा हैं। नागालैंड में कुल 16 मान्यता प्राप्त जनजातियां (Tribe) रहती हैं। जिनकी जीवनशैली में मांसाहारी भोजन की प्रमुखता है। वास्तव में, पूरे देश में नागालैंड (Nagaland) में प्रति व्यक्ति पशु प्रोटीन की खपत सबसे ज़्यादा है।
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना (Mukhyamantri Mangla Pashu Bima Yojana) राज्य के पशुपालकों के लिए एक क्रांतिकारी कदम है, जो उन्हें आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करेगा। इस योजना के माध्यम से पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा और इससे जुड़े परिवारों को एक मजबूत वित्तीय सहारा मिलेगा।
सरकार की इस पहल से न केवल पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पशुपालकों (livestock farmers) की आय भी बढ़ेगी और वे जोखिम मुक्त होकर अपने काम में लगे रह सकेंगे।
आमतौर पर देखा जाता है कि पशुओं को भोजन के तौर पर घास, भूसा या सूखा चारा दिया जाता है, लेकिन सिर्फ इसी के भरोसे रहने पर पशुओं को कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं, साथ ही वो कुपोषण के शिकार भी हो जाते हैं। जिस तरह से इंसानों को संपूर्ण आहार (balanced diet for livestock) की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही आपके पशुधन को भी इसकी आवश्यकता होती है, जिससे गाय, भैंस स्वस्थ्य रहें और दूध का उत्पादन भी बेहतर हो सके। इसलिए पशुओं को भी आयरन, विटामिन और प्रोटीन दिया जाना अहम होता है।
पशुधन (Livestock) आज के वक़्त में अरबों डॉलर का कारोबार बना हुआ है। पूरे विश्व समेत भारत भी पशुधन प्रबंधन, GDP (सकल घरेलू उत्पाद) का एक बड़ा भाग रखता है। लोगों के खाने की आपूर्ति जो पशुधन उत्पादों के आधार पर है। जिसमें मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स आते हैं, लोगों द्वारा इस्तेमाल में लाया जाता है। पशुधन उत्पादों को मैनेज (Livestock Management System) करने के लिए किसान कई बार पशुधन प्रबंधन नहीं कर पाते हैं, जिससे उनको नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गाय आधारित अर्थव्यवस्था का मतलब है कि किसान गाय के हर उत्पाद जैसे गोबर, मूत्र और अपशिष्ट फ़ीड का इस्तेमाल करके अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं। ये सिर्फ़ दूध पर निर्भर रहने की बजाय, गाय के सभी पहलुओं का फायदा उठाने की बात करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सामान का समझदारी से उपयोग करना और उसे लाभदायक उत्पादों में बदलना है।
भारत में बकरी पालन में नवाचारों का उद्देश्य किसानों की आजीविका को बढ़ाना, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।