Natural Farming: ठाकुर दास ने प्राकृतिक खेती से खेती को बनाया आसान और फ़ायदे का सौदा
प्राकृतिक खेती अपनाकर ठाकुर दास ने खेती का ख़र्च घटाया, आमदनी बढ़ाई और कई किसानों को नई राह दिखाई।
कृषि क्षेत्र में सक्सेस स्टोरीज का संग्रह। आपकी मोटिवेशन बढ़ाने वाली कहानियों को जानें और सफलता की ओर एक कदम बढ़ाएं। किसान ऑफ इंडिया पर हमारे साक्सेस स्टोरीज से प्रेरणा लें।
प्राकृतिक खेती अपनाकर ठाकुर दास ने खेती का ख़र्च घटाया, आमदनी बढ़ाई और कई किसानों को नई राह दिखाई।
प्रगतिशील किसान बालक राम ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती का खर्च घटाया, फ़सलों की गुणवत्ता सुधारी और किसानों को नई राह दिखाई।
प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाकर संगत राम ने खेती की लागत घटाई, फ़सलों की गुणवत्ता बढ़ाई और किसानों को नई राह दिखाई।
Potato processing: आलू के किसानों को सीधे बाज़ार में बिक्री करने पर उतनी अच्छी कीमत शायद न मिले जितनी की किसी कंपनी को बेचने पर मिलती है। दरअसल, कई कंपनियां आलू की प्रोसेसिंग के ज़रिए विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार करती है और ऐसी कंपनियां सीधे किसानों से आलू खरीदती है।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के धर्मपुर गांव के किसान अल्ताफ हुसैन लगभग 100 बीघा क्षेत्र में मटर की उन्नत खेती कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म से खेती को जोड़ा और किसानों के लिए नया मॉडल तैयार किया।
Pig Farming: कुछ समय पहले तक मुर्गी पालन और बकरी पालन की तुलना में सूअर पालन को अच्छा नहीं माना जाता था और पढ़े-लिखे लोग इसमें जाने से कतराते थे, मगर अब ऐसा नहीं है। अब पढ़े-लिखे युवा भी इसे व्यवसाय के तौर पर चुन रहे हैं
डॉ. हीरा लाला 2018 में बांदा जिले में डीएम के रूप में गए और वहां उन्होंने अपने शासन काल में जल सरंक्षण, पेड़ लगाओं, पेड़ जियाओ अभियान चलाए और तालाबों पुनर्निमाण का काम करवाया।
प्राकृतिक खेती अपनाकर शंभू लाल ने घटाई लागत, बढ़ाई आय और खेती को बनाया टिकाऊ व लाभकारी।
गुरमीत सिंह की यात्रा 2012 में शुरू हुई जब उन्होंने अपने खेतों को जलाना बंद कर दिया। उन्होंने न केवल अपने खेतों से पराली इकट्ठा की, बल्कि अपने पड़ोसियों के खेतों से भी पराली लाकर अपनी ज़मीन पर जोती।
फिरोजपुर क्षेत्र पूरे पंजाब में मिर्च की खेती के लिए प्रसिद्ध है। यहां के किसान मौसम के उल्ट जा कर खेती करते हैं।
कुल्लू जिले के रहने वाले किसान दिवान चंद ने प्राकृतिक खेती अपनाकर घटाई लागत, सुधारी मिट्टी की सेहत और खेती को बनाया लाभकारी।
नम्रता यदु बताती हैं कि मशरूम के बीज का माइसीलिया तैयार करने के लिए भोजन के रूप में गेहूं के दानों का इस्तेमाल होता है। कोई चाहे तो ज्वार और बाजरा का भी उपयोग कर सकता है।
प्राकृतिक खेती अपनाकर अनीता नेगी ने बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाया और किसानों के लिए प्रेरणा बनीं।
HyFun कंपनी के MD, CEO हरेश करमचंदानी ने 2015 में कंपनी की शुरुआत की। ये कंपनी आलू की प्रोसेसिंग करके इससे तरह-तरह के उत्पाद बनाती है जिसमें फ्रोजन फ्रेंच फ्राइस, आलू टिक्की, बर्गर टिक्की आदि शामिल है।
आज पंजाब की खेती एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां गेहूं-धान का पारंपरिक फ़सल चक्र ज़मीन की सेहत और
आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी ज़िले के सीथमपेटा गाँव के रहने वाले सतीश कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। नौकरी के पीछे न जाते हुए उन्होंने अपनी पारंपरिक खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया और पशु आधारित जैविक खेती को चुना।
प्राकृतिक खेती अपनाकर विजय सिंह ने घटाई लागत, बढ़ाई आय और टिकाऊ खेती से बनाई नई पहचान।
बुंदेलखंड की सख्त ज़मीन पर पॉलीहाउस तकनीक से खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें बांदा कृषि विश्वविद्यालय अहम भूमिका निभा रहा है। मुश्किल परिस्थितियों में सब्ज़ियों का उत्पदान कैसे पूरे साल किया जाए, इसके लिए विश्वविद्यालय ने एक प्रोजेक्ट के तहत 200 स्क्वायर मीटर के छोटे एरिया में कई पॉलीहाउस लगाए हुए हैं। जानिए सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पॉलीहाउस तकनीक से खेती के बारे में विस्तार से।
मितुल कोठारी का पॉलीहाउस काफी हाइटेक है जिसकी लगात करीब 3.5 करोड़ रुपए है। उनका पॉलीहाउस FAN-PAD ग्रीन हाउस टेक्नोलॉजी वाला है जिसे हाइटेक ग्रीनहाउस भी बोलते हैं।