Balwaan Power Weeder: खेत तैयार करने से लेकर फसल की कटाई तक का सारा काम होगा सिर्फ़ एक मशीन से
Balwaan Power Weeder: खेती के क्षेत्र में हर दिन आने वाली नई-नई तकनीक ने किसानों का काम आसान बना दिया […]
किसानों के लिए कृषि उपकरण से सम्बंधित जानकारी तथा उन पर लागू सरकारी स्कीमों के बारे में विस्तार से जानने के लिए आपको यहाँ समस्त लेख मिल जाएंगे।
Balwaan Power Weeder: खेती के क्षेत्र में हर दिन आने वाली नई-नई तकनीक ने किसानों का काम आसान बना दिया […]
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर गेम-चेंजर (Electric tractors are a game-changer) साबित हो रहे हैं। इन पर सालाना बिजली की लागत महज 80,000 से 90,000 रुपये आती है। यानी ऑपरेटिंग खर्च में 40-45 फीसदी तक की बचत। सिर्फ इतना ही नहीं, डीज़ल इंजन में 200 से ज्यादा चलने वाले पुर्जे होते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर में 20 से भी कम।
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘ट्रैक्टर अनुदान योजना’ (Tractor Subsidy Scheme) न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें मॉर्डन एग्रीकल्चर की मेन स्ट्रीम से भी जोड़ेगी।
हल की भौतिकी किसान की हर चाल में बसती है, जहां बल, कोण और घर्षण के साथ मिट्टी पलटने का विज्ञान खेती को नई दिशा देता है।
अप्लाई करने का प्रोसेस 15 अक्टूबर, 2025 से शुरू हो चुका है और 29 अक्टूबर, 2025 को ख़त्म होगा। सबसे अहम बात यह है कि इस योजना में किसानों का चयन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come, First Served) के आधार पर किया जाएगा।
SMAM ने भारतीय कृषि क्षेत्र, ख़ासकर महिला किसानों के लिए एक नई क्रांति की शुरूआत (Women empowerment) की है। ये स्कीम न सिर्फ खेती को मॉर्डर्न और सक्षम बना रही है, बल्कि महिला किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करने का एक मजबूत ज़रिया भी बन गई है।
‘पराली जलाना’ या ‘Stubble Burning’। ये सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक गहरा कृषि, आर्थिक और सामाजिक संकट है जिसकी जड़ें हमारी खेती की व्यवस्था में गहरे तक धंसी हुई हैं।
1960 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति (Green Revolution) ने न केवल भारत को खाद्यान्न (Food grain production) में आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि यही वो दौर था जहां से भारत में कृषि मशीनीकरण (Agricultural Mechanization) की वास्तविक शुरुआत हुई। उच्च उपज वाली किस्मों (HYV) के बीजों ने जहां उत्पादन बढ़ाया, वहीं उनकी कटाई, गहाई और सिंचाई के लिए मशीनों की ज़रूरत महसूस हुई।
ब्रजेश कुमार ने केंचुआ हल (Chisel plough) से खेत की गहरी जुताई कर उपज बढ़ाई, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में हुआ सुधार।
राजस्थान का हनुमानगढ़ जिले में इस बार किसानों ने पारंपरिक तरीके को छोड़कर एक नई तकनीक अपनाई है, डायरेक्ट सीडेड राइस (Direct Seeded Rice) यानि DSR विधि अपनाई है। ये तकनीक न सिर्फ पानी की बचत (Direct Seeded Rice and Water Saving) कर रही है, बल्कि किसानों की मेहनत और लागत भी कम कर रही है।
भूमिगत ड्रिप सिंचाई तकनीक (Subsurface Drip Irrigation) से कम पानी में बेहतर पैदावार संभव है। यह विधि मिट्टी की सेहत सुधारती है और खेती को बनाती है स्मार्ट।
ट्रैक्टर चालित प्लास्टिक मल्च लेयर-कम-प्लांटर (Tractor Operated Plastic Mulch Layer-cum-Planter) के साथ किसान प्लास्टिक मल्च बिछाने और बीज बोने का काम एक साथ कर सकेंगे, और वो भी बिना ज्यादा मेहनत किए।
फील्ड मार्शल सुपर सीडर (Field Marshal Super Seeder) एक बहुउपयोगी कृषि मशीन है जो बुवाई, जुताई और समय की बचत में किसानों की मदद करती है।
खेती की बढ़ती लागत और पानी का बढ़ता संकट किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। इस स्थिति में लेजर लैंड लेवलर(Laser Land Leveler) किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है।
चुंबकीय जल सिंचाई एक उभरती तकनीक है जो सिंचाई जल की गुणवत्ता सुधारकर कम लागत में बेहतर फ़सल उत्पादन में मदद करती है।
लेहर ड्रोन (Leher Drones) से छिड़काव मैन्युअल छिड़काव विधियों की तुलना में ज़्यादा सटीक है। यह किसानों के हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने को भी कम करता है।
जानिए जून-जुलाई में खेतों की तैयारी और बुआई के लिए ज़रूरी कृषि यंत्र कौन-कौन से हैं और इन पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ।
पावर हैरो (Power Harrow) एक उन्नत कृषि उपकरण है, जो खेत की बुवाई से पहले की तैयारी को आसान और प्रभावी बनाता है, रोटावेटर से बेहतर मानी जाती है।
पानी की कमी वाले क्षेत्रों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक (Drip and sprinkler irrigation techniques) से किसान कम पानी में बेहतर पैदावार ले रहे हैं।
मध्यप्रदेश सरकार की 5 रुपये में स्थायी कृषि पंप कनेक्शन (Permanent agriculture pump connection for just 5 rupees) योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। अगर यह पूरे राज्य में सफलतापूर्वक लागू हो जाती है, तो किसानों को सिंचाई के लिए होने वाले खर्च में भारी कमी आएगी