Natural Farming: प्राकृतिक खेती अपनाकर संजीव नेगी ने सेब की खेती को बनाया लाभकारी और टिकाऊ
प्राकृतिक खेती अपनाकर संजीव नेगी ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई गुणवत्ता और बनाई टिकाऊ खेती का सफल मॉडल।
प्राकृतिक खेती अपनाकर संजीव नेगी ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई गुणवत्ता और बनाई टिकाऊ खेती का सफल मॉडल।
प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाकर सुरेंद्र पीरता ने सेब की खेती में ख़र्च घटाया, गुणवत्ता सुधारी और रसायन मुक्त फल उत्पादन की दिशा पकड़ी।
प्राकृतिक खेती अपनाकर प्रमोद देस्ता ने सेब की खेती में लागत घटाई, गुणवत्ता बढ़ाई और टिकाऊ खेती से बेहतर आमदनी हासिल की।
HRMN-99 Apple Variety ने गर्म और मैदानी क्षेत्रों में सेब की खेती का नया रास्ता खोला है, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है और बागवानी में क्रांति आ रही है।
गर्म जलवायु में HRMN-99 Apple Variety की सफल खेती की मिसाल हैं जयपुर के किसान राम कुमार, जिन्होंने रेगिस्तान में सेब उगाकर नई उम्मीद जगाई है।
पारंपरिक रूटस्टॉक वाले सेब के पौधों की मांग घटने से हिमाचल के रहने वाले पवन कुमार गौतम का सेब की नर्सरी का उद्योग डगमगा गया था, मगर इस तकनीक ने उन्हें नई राह दिखाई। जानिए क्या है रूटस्टॉक मल्टीप्लीकेशन तकनीक।
डॉ. सैयद ओवैस के तकरीबन 6 कनाल के बाग से हर सीज़न में सेब की 1000 पेटियां निकलती हैं। 2021 में उन्होंने ऐसा ग्रेडिंग प्लांट लगाया, जिससे सेब की धुलाई, ब्रशिंग और सूखने के बाद उनकी आकार के हिसाब से ऑटोमेटिक छंटाई होती है।
एक कनाल क्षेत्र में हाई डेंसिटी तकनीक से 170 पेड़ लगते हैं, जबकि परम्परागत सेब के तकरीबन 20 पेड़ों को इतनी जगह चाहिए होती है। यही नहीं, हाई डेंसिटी का प्रत्येक पेड़ परम्परागत पेड़ के मुकाबले फल भी कहीं ज़्यादा देता है। उन्होंने सेब की खेती करते हुए उसके विशेष प्रबंधन पर भी ध्यान दिया है।
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे मुख्य सेब उत्पादकों राज्यों के लिए Apple Pomace (सेब का गूदा) से केक और ब्रेड बनाने की नयी तकनीक एक सौग़ात साबित हो सकती है, क्योंकि वहाँ हर साल हज़ारों टन सेब से जूस निकालने के बाद एपल पोमेस को या तो फैक्ट्रियों में ही या उसके आसपास डम्प करना पड़ता है। इससे जल और वायु प्रदूषण की समस्या पैदा होती है।
विशाल शांकता बताते हैं कि कई युरोपियन और एशियन देशों में सेब की औसत उत्पादकता 50 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि भारत में यह केवल 7 से 8 टन है। हाई डेंसिटी तकनीक के इस्तेमाल से सेब की खेती में उत्पादन बढ़ता है और लागत भी कम लगती है। जानिए इस तकनीक के बारे में विस्तार से।