Integrated Farming System से कैसे बढ़ रही किसानों की आय? झारखंड में बदल रही खेती की तस्वीर
झारखंड के जामताड़ा जिले का छोटा सा गांव अमलाचातर इन दिनों खेती के एक ऐसे मॉडल की वजह से चर्चा […]
झारखंड के जामताड़ा जिले का छोटा सा गांव अमलाचातर इन दिनों खेती के एक ऐसे मॉडल की वजह से चर्चा […]
साफ़ संकेत मिलता है कि सरकार सिर्फ़ धान और गेहूं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तिलहन और दलहन की खेती को भी बढ़ावा देना चाहती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाकर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने सोलर पंप, मिट्टी संरक्षण और ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते हुए कहा कि टिकाऊ खेती से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और धरती माँ को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
Kisan of India से ख़ास बातचीत में दीपेश कुमार चौहान ने जैविक खेती और किसानों की आय में बढ़ोतरी जैसे विषयों पर हमसे बात की। साथ ही, गौपालन के क्षेत्र में लीक से हटकर उन्होंने कदम उठाया है।
नयन पाल जयपुर के आमेर तहसील के रहने वाले हैं।कहते हैं न ज़रूरत ही आविष्कार की जननी है, तो बस नयन पाल अपने साथी किसानों की ज़रूरत को देखते हुए अपने मिशन पर लग गए। उन्होंने ट्रैक्टर से चलने वाला कंप्रेसर स्प्रे पंप बना डाला।
विशाल शांकता बताते हैं कि कई युरोपियन और एशियन देशों में सेब की औसत उत्पादकता 50 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि भारत में यह केवल 7 से 8 टन है। हाई डेंसिटी तकनीक के इस्तेमाल से सेब की खेती में उत्पादन बढ़ता है और लागत भी कम लगती है। जानिए इस तकनीक के बारे में विस्तार से।
पशुपालक ऐसे मवेशियों को पालना पसंद करते हैं, जिन्हें पालने में लागत कम से कम हो और मुनाफ़ा अधिक मिले। अच्छे वातावरण का असर देसी गायों की दूध देने की क्षमता पर पड़ता है, ऐसे में हेता डेयरी ने देसी गायों की बड़ी गौशाला बना इनकी अहमियत सबके सामने रखी है।
उन्नत नस्ल की देसी गायों को पालने पर दूध का उत्पादन अन्य देसी गायों के मुक़ाबले अधिक होता है। ज़ाहिर है, इससे आपकी आमदनी भी बढ़ेगी। एक बात का ध्यान ज़रूर रखें। हर क्षेत्र के हिसाब से कौन सी देसी गाय उन्नत नस्ल की है, इसकी पूरी जानकारी लेने के बाद ही उस नस्ल को पालें।
इस एक चॉकलेट का वजन 2.5 और 3 किलोग्राम है। मवेशी इसे चाट कर खा सकेंगे और एक कैंडी करीब तीन से चार दिन में खत्म होगी।
लैवेंडर की खेती कर रही रुबिना न सिर्फ़ लैवेंडर का उत्पादन करती हैं, बल्कि इसकी नर्सरी भी चलाती हैं। साथ ही लैवेंडर के कई और उत्पाद बना खुद ही उनकी मार्केटिंग भी करती हैं।
इन नई किस्मों में से एक किस्म ऐसी है जो किसान एक साल में अलग-अलग दो फसलें के साथ लगा सकते हैं। उन किसानों के लिए ये सोयाबीन की नई किस्में पहली पसंद हो सकती है। इंदौर स्थित सोयाबीन अनुसंधान के भारतीय संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक संजय गुप्ता ने इस किस्म को विकसित किया है।
महाराष्ट्र के नागपुर के पुरुषोत्तम झामाजी भुडे ने किसान ऑफ़ इंडिया को बताया कि वो अक्सर देखते थे कि कैसे दूर-दराज के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मीलों दूर जाना पड़ता था। उसके बावजूद भी उन्हें सही दाम नहीं मिल पाता था। उन्होंने शुरुआत में मसालों की खेती (Spice Farming) कर रहे अपने क्षेत्र के किसानों से संपर्क किया और फिर कारवां बनता चला गया।
पंजाब के रूपनगर की रहने वाली गुरविंदर सिंह ने अपने बलबूते पर डेयरी व्यवसाय का कारोबार खड़ा किया है। वो हमेशा से कुछ अपना करना चाहती थीं। उन्होंने छोटे स्तर से ही डेयरी सेक्टर में कदम रखा।
मध्य प्रदेश के रहने वाले यूनुस ख़ान सीमित संसाधनों से आमदनी को बढ़ाने के तरीकों पर अक्सर रिसर्च किया करते थे। इस दौरान उन्हें ऐसी तकनीक के बारे में पता चला, जो उनके लिए नयी थी। उन्होंने अपने आम और महुआ के बागान में हल्दी की खेती शुरू कर दी। आज की तारीख में उनका फ़ार्मिंग मॉडल देखने के लिए दूर-दूर से किसान आते हैं।
मध्य प्रदेश से आने वाले अखिलेश पांडे मार्केटिंग और मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आज वो आधुनिक खेती के ज़रिए अपनी पहचान बना चुके हैं।
अंजली ने 200 वर्ग मीटर में पोषण वाटिका बनाई। कैसे इससे उन्हें और अन्य किसानों को फ़ायदा हुआ? कैसे छोटे और सीमांत किसानों के लिए ये मॉडल फ़ायदेमंद है, जानिए इस लेख में।
कर्नाटक के अलमेल गाँव के रहने वाले सोमन्ना सिद्दप्पा भसागी पहले सिर्फ़ गन्ने की ही किया करते थे। सूअर पालन (Pig Farming) का रूख उन्होंने 2014 में किया। कैसे हुआ इससे लाभ, जानिए इस लेख में।
दूध का उत्पादन, डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए किस तरह फ़ायदे का बिज़नेस बन रहा है, इसको लेकर महिला किसान सरनजीत कौर ने किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत की। जानिए डेयरी फ़ार्मिंग (Dairy Farming) से जुड़ी उनकी कई सलाहों के बारे में।
कैलाश चौधरी पिछले 6 दशक से खेती कर रहे हैं। आंवले की खेती ने उन्हें देश-दुनिया में पहचान दी है। कैलाश चौधरी कहते हैं खेती से बड़ा और कोई काम नहीं है। इसमें अपार संभावनाएं हैं।
मध्य प्रदेश के एक किसान ने हरी मिर्च की खेती से न सिर्फ़ अपनी आमदनी में इज़ाफ़ा किया, बल्कि रोज़गार और पलायन जैसी बड़ी समस्याओं को भी दूर किया है। कैसे वैज्ञानिक सलाह पर उन्होंने काम किया? कितना मुनाफ़ा उन्होंने कमाया? जानिए इस लेख में।