Beetal Goat Farming: पशुपालन में नई उम्मीद, किसानों की आय बढ़ाने में बन रही मज़बूत आधार
Beetal Goat Farming: भारत में पशुपालन क्षेत्र लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए […]
Beetal Goat Farming: भारत में पशुपालन क्षेत्र लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए […]
भारत में खेती के साथ-साथ पशुपालन की परंपरा भी बहुत पुरानी है। आमतौर पर बड़े और मध्यम किसान गाय-भैंस जैसे
Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के तहत काम करने वाले केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (Central Institute for Research on Goats) द्वारा विकसित बकरियों के लिए AI आधारित स्मार्टफोन ऐप (AI based smartphone app for goats) तैयार किया है
बकरी पालन (promotion of goat Farming) एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें कम निवेश में अच्छा मुनाफा मिलता है। बिहार सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर किसान ब्लैक बंगाल और जमुनापारी नस्ल (Black Bengal and Jamunapari breed goats) की बकरियां पालकर अच्छी आमदनी कमा सकते हैं।
बकरी पालन और जैविक खेती का एकीकृत मॉडल (Goat Husbandry And Organic Farming) भारतीय कृषि के लिए एक स्थायी और समृद्ध मार्ग प्रस्तुत करता है। ये मॉडल न केवल पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि किसान की आय को भी बढ़ाता है। जलवायु परिवर्तन (Climate change) और मुनाफे की अनिश्चितताओं के इस दौर में, ये प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर, पर्यावरण के प्रति सजग और आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
निकोबार द्वीप के आदिवासी किसानों के लिए एकीकृत खेती (Integrated Farming) ने कृषि उत्पादन, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण में स्थिरता और आत्मनिर्भरता लाई।
जनजातीय (Tribal) महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष रूप से जूट बैग और गहने बनाने, बत्तख और मुर्गी पालन की ट्रेनिंग दी गई। खाकी कैंपबेल बत्तख और वानराजा मुर्गी पालन से महिलाओं की आमदनी में बढ़ोतरी हुई और परिवारों की पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई।
बकरी पालन व्यवसाय योजना (Goat Farming Business Plan) बनाने का सबसे ज़रूरी कारक है कि सबसे पहले लागत और मुनाफ़े का शुरुआती गणित लगा लें।
गरीब किसानों के लिए भेड़ व बकरी पालन आजीविका का मुख्य साधन होता है, क्योंकि इसमें लागत भी कम आती है और मुनाफ़ा जल्दी मिलने लगता है। सुंदरबन के आदिवासी किसान भी भेड़ और बकरी पालन से अपने जीवन स्तर को सुधार रहे हैं। भेड़ पालन की वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर आरती ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया।
भारत में बकरी पालन में नवाचारों का उद्देश्य किसानों की आजीविका को बढ़ाना, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
थनैला रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो गाय, भैंस और बकरी जैसे दुधारु पशुओं में होती है। इस बीमारी की वजह से पशुओं के दूध देने की क्षमता बहुत कम या पूरी तरह से बंद हो जाती है, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बकरी पालन कर रहे पशुपालक किन सावधानियों को अपनाकर थनैला रोग से अपने पशुओं का बचाव कर सकते हैं, पढ़िए इस लेख में।
ओस्मानाबादी बकरी (Osmanabadi Goat) पांव और मुंह की बीमारी (एफएमडी), गोट प्लेग (पीपीआर) जैसी कई बीमारियों का शिकार हो जाती है। उनसे बचाव और रखरखाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, जानिए इस लेख में विस्तार से।
बकरी पालन किसानों की अतिरक्त आमदनी का बेहतरीन ज़रिया है। इसके दूध और मांस को बेचकर किसान अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं, बशर्ते उन्हें इसकी नस्ल की सही जानकारी हो।
वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करके पशुपालक किसान अपनी कमाई को दोगुनी से तिगुनी तक बढ़ा सकते हैं। इसके लिए बकरी की उन्नत नस्ल का चयन करना, उन्हें सही समय पर गर्भित कराना और स्टॉल फीडिंग विधि को अपनाकर चारे-पानी का इन्तज़ाम करना बेहद फ़ायदेमन्द साबित होता है।
एकीकृत पोल्ट्री और बकरी पालन से सीमित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। बकरी के साथ मुर्गी पालन करने के कई फ़ायदे हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले के रहने वाले राजेश कुमार इस एकीकृत प्रणाली का लाभ उठा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके के कुछ गांव बहुत पिछड़े हुए हैं। यहाँ के किसान खेती से अपनी आजीविका नहीं कमा पाते। ऐसे में पशुपालन उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का एक मुख्य ज़रिया बन सकता है। सुंदरबन के संदेलरबिल गाँव की रहने वाली दीपाली बिस्वास ने वैज्ञानिक तकनीक से बकरी पालन करके सफलता पाई है।
बिहार के ग्रामीण इलाके जहां लोगों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं हैं और अनियमित वर्षा और कम ज़मीन के कारण खेती से भी आमदनी नहीं होती, वहां बकरी पालन एक बेहतरीन विकल्प है। बकरी पालन ने राज्य के ग्रामीण इलाकों की कई गरीब महिलाओं की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल दी।
बरनाली ने जब बकरी पालन के क्षेत्र में कदम रखा तो उन्हें इसकी ज़्यादा जानकारी नहीं थी। इसके लिए उन्होंने कई संस्थानों से ट्रेनिंग ली। आज वो अपने क्षेत्र के किसानों को बकरी पालन से जुडने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बकरी पालन को कम लागत के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत में दीपक पाटीदार कहते हैं कि आज के डिजिटल वर्ल्ड में कई तरह की बातें देखने को मिलती हैं, ऐसे में लोगों को बकरी पालन के साथ-साथ कृषि क्षेत्र से जुड़ी सही और सटीक जानकारी देना ही उनका मकसद है।