मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनीं योगेश्वरी देवांगन, खड़ा किया खुद का Poultry Farm
मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनीं योगेश्वरी देवांगन की प्रेरक कहानी, जिन्होंने गांव में रहकर ही शुरू किया लाखों का व्यवसाय।
मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनीं योगेश्वरी देवांगन की प्रेरक कहानी, जिन्होंने गांव में रहकर ही शुरू किया लाखों का व्यवसाय।
दुनिया के सबसे बड़े लाइव स्टॉक और पोल्ट्री एक्सपो (The world’s largest livestock and poultry expo) में से एक, VIV ASIA, (VIV ASIA Poultry Expo 2026) अब भारत में होने जा रहा है। ये पहली बार है जब ये प्रतिष्ठित एक्सपो थाईलैंड और यूरोप से निकलकर भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) अपनाकर रुपेश कुमार चौधरी ने मछली पालन, पोल्ट्री और बागवानी से अपनी आय बढ़ाई। यह प्रणाली किसानों को स्थिर आय और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती है।
पोल्ट्री फ़ार्म व्यवसाय (Backyard Poultry Farming) छोटे किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय है जो आय और पोषण में सुधार करता है। इस लेख में जानें कैसे इसे सफलतापूर्वक शुरू किया जा सकता है।
निकोबार द्वीप के आदिवासी किसानों के लिए एकीकृत खेती (Integrated Farming) ने कृषि उत्पादन, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण में स्थिरता और आत्मनिर्भरता लाई।
जेरोम सोरेंग ने बैकयार्ड पोल्ट्री फ़ार्मिंग (Backyard Poultry Farming) अपनाकर अपनी खेती में सुधार किया और एकीकृत कृषि प्रणाली से सफलता प्राप्त की।
बैकयार्ड पोल्ट्री फ़ार्मिंग (Backyard Poultry Farming) महिला किसानों के लिए आय, पोषण और जीवन गुणवत्ता सुधारने का बेहतरीन तरीका है, जैसा कि एलिजा डिसूजा की सफलता दिखाती है।
नागालैंड (Nagaland), भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों (north east states) में से एक, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां की जनजातीय (Tribe) संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली इस राज्य की पहचान का ख़ास हिस्सा हैं। नागालैंड में कुल 16 मान्यता प्राप्त जनजातियां (Tribe) रहती हैं। जिनकी जीवनशैली में मांसाहारी भोजन की प्रमुखता है। वास्तव में, पूरे देश में नागालैंड (Nagaland) में प्रति व्यक्ति पशु प्रोटीन की खपत सबसे ज़्यादा है।
बैकयार्ड पोल्ट्री फ़ार्मिंग (Backyard Poultry Farming) से आदिवासी परिवारों को आजीविका और पोषण सुरक्षा मिल रही है, साथ ही पारंपरिक पोल्ट्री नस्लों का सुधार हो रहा है।
जनजातीय (Tribal) महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष रूप से जूट बैग और गहने बनाने, बत्तख और मुर्गी पालन की ट्रेनिंग दी गई। खाकी कैंपबेल बत्तख और वानराजा मुर्गी पालन से महिलाओं की आमदनी में बढ़ोतरी हुई और परिवारों की पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई।
चिकन और अंडे प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं, लेकिन इन्हें ज़्यादा एंटीबायोटिक्स देने पर मानव स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही कुक्कुट उद्योग तेज़ी से विकसित हो रहा है, ऐसे में मुर्गी पालन व्यवसाय में उचित और जैविक आहार प्रबंधन बहुत ज़रूरी है।
कड़कनाथ मुर्गी पालन (Kadaknath Chicken Farming): जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे मुर्गियों की बढ़वार धीमी पड़ने लगती है क्योंकि वो आहार कम खाती हैं और पानी ज़्यादा पीती हैं। या यूँ कहें कि तापमान परिवर्तन से जूझने के लिए मुर्गियों को ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है। इसकी भरपाई प्रोटीन, अमीनो अम्ल और खनिज लवणयुक्त ऐसे आहार से ही हो सकती है जो सस्ता भी हो। अजोला इन सभी शर्तों पर कड़कनाथ मुर्गीपालन के आहार के रूप में ख़रा उतरता है।
ग्रामीण इलाकों में रोज़गार और आमदनी बढ़ाने का एक बेहतरीन ज़रिया है घर के पिछवाड़े यानी बैकयार्ड में मुर्गी पालन करना। बैकयार्ड मुर्गी पालन से मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए, वैज्ञानिक मुर्गियों की उन्नत नस्ल विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसी ही एक नस्ल है कैरी निर्भीक।
मुर्गीपालन की अन्य नस्लों के मुक़ाबले कड़कनाथ को पालना आसान और कम खर्चीला है, क्योंकि इन्हें बीमारियाँ कम होती हैं। इसका रखरखाव बॉयलर और देसी मुर्गी के मुक़ाबले आसान होता है। कड़कनाथ का माँस काफ़ी स्वादिष्ट होता है। इसमें आयरन और प्रोटीन की प्रचुरता तथा कोलेस्ट्रॉल यानी फैट बेहद कम होता है। कड़कनाथ का माँस, अंडा और चूजा, सभी की ख़ूब माँग है इसीलिए बढ़िया दाम मिलते हैं।
किसी भी काम में सफलता के लिए उससे संबंधित कौशल का होना ज़रूरी है। इसलिए समय-समय पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा ग्रामीण इलाकों में युवाओं को विभिन्न व्यवसाय से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। असम के एक युवा तपश रॉय की ज़िंदगी ऐसे ही एक प्रशिक्षण ने बदल दी। वो मुर्गी पालन व्यवसाय में अच्छा लाभ कमा रहे हैं।
बैकयार्ड मुर्गी पालन के लिए सही नस्ल की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। क्या वो मुर्गी उस क्षेत्र के हिसाब से ठीक है या नहीं, इसके बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। जानिए कैसे तेलंगाना की रहने वाली पुष्पा ने मुर्गी की उन्नत नस्ल से अपने आप को आत्मनिर्भर बनाया।
एकीकृत पोल्ट्री और बकरी पालन से सीमित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। बकरी के साथ मुर्गी पालन करने के कई फ़ायदे हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले के रहने वाले राजेश कुमार इस एकीकृत प्रणाली का लाभ उठा रहे हैं।
किसानों की अतिरिक्त आमदनी के लिए मुर्गी पालन व्यवसाय एक अच्छा विकल्प है, मगर इससे मुनाफ़ा कमाने के लिए मुर्गी की सही नस्ल और उसके उचित प्रबंधन व देखभाल की ज़रूरत होती है। साथ ही मुर्गीपालन में नई तकनीक अपनाकर भी किसान इससे अधिक मुनाफ़ा कमा सकते हैं, जैसा कि मेघालय के युवा यौंद्रफुली सुतंगा ने किया।
पिछले दो साल के अंदर ही करीबन हज़ार किसानों ने मिनी इनक्यूबेटर का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की मदद से मुर्गी पालन व्यवसाय में चूज़ों का उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने में बड़ी सफलता हाथ लगी।
कई ऐसे किसान हैं, जिनके पास खेती के लिए ज़मीन नहीं है या बहुत कम ज़मीन हैं, तो उनके लिए मुर्गी पालन आमदनी का बेहतरीन ज़रिया है। लेकिन इसके लिए सही नस्ल और वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी ज़रूरी है।