Pig Farming का व्यवसाय खड़ा करने का हुनर सीखिए रिटायर्ड फ़ौजी सोनाम लामा से
सोनाम ने फ़ौज से रिटायर्ड होने के बाद साल 2023 से Pig Farming का काम शुरू किया। वो ड्यूरोक प्रजाति के सुअरों का पालन करते हैं।
सोनाम ने फ़ौज से रिटायर्ड होने के बाद साल 2023 से Pig Farming का काम शुरू किया। वो ड्यूरोक प्रजाति के सुअरों का पालन करते हैं।
प्रशांत सोमन्ना भसागी सूअर पालन के जरिए पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और कम लागत में टिकाऊ खेती का उदाहरण पेश कर रहे हैं।
स्व. सोमन्ना भसागी की सूअर पालन जर्नी जानिए, जिन्होंने खेती से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनाई और आज उनका परिवार इस विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
Rani Pig और वैज्ञानिक तकनीक से नागालैंड के सुअर पालन को मिल रही है नई दिशा, जानिए कैसे किसानों की आय में हो रही है वृद्धि।
सूअर की खाल से मैट, पैराशूट, मोम, उर्वरक, क्रीम, मलहम और रसायन बनाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। बटन, जूते के फीते, दवाइयां, सॉसेज, थाइमस, अग्न्याशय, अग्न्याशय, थायरॉयड, अग्न्याशय से संबंधित दवाईयां इससे बनती हैं। पशु चारा, उर्वरक, और कपड़ों की रंगाई और छपाई के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। सूअर पालन के लिए सरकार लोन देती है।
झारखंड की महिला किसान पूनम देवी को सूअर पालन में अक्सर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इसे उनके उत्पादन पर असर पड़ रहा था। इसके उपाय के लिए उन्होंने एक सस्ता और असरदार रास्ता ढूंढ निकाला।
कर्नाटक के अलमेल गाँव के रहने वाले सोमन्ना सिद्दप्पा भसागी पहले सिर्फ़ गन्ने की ही किया करते थे। सूअर पालन (Pig Farming) का रूख उन्होंने 2014 में किया। कैसे हुआ इससे लाभ, जानिए इस लेख में।
असम के गोलपारा ज़िले की रहने वाली दीपिका राभा 12 बीघा ज़मीन पर सुगंधित जोहा चावल की खेती करती हैं। असम के जोहा चावल को GI टैग मिला हुआ है। इसको तैयार होने में 120 से 160 दिन का समय लगता है।
वर्तमान में सूअर पालन युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय व्यवसाय बना हुआ है। वैज्ञानिक तकनीक से सूअर पालन करने को अधिक फ़ायदेमंद माना जाता है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय भारत सरकार की ओर से जारी वार्षिक रिपोर्ट 2021- 2022 के अनुसार भारत में कुल सूअरों की संख्या 9.06 मिलियन है।
पशुपालन में पहले लोग सूअर पालन को ज़्यादा महत्व नहीं देते थे, लेकिन इसकी कम लागत और अच्छे मुनाफ़े के कारण अब ये लोकप्रिय होता जा रहा है। अगर आप भी सूअर पालन का व्यवसाय करना चाहते हैं तो ऑनलाइन कोर्स से आपको बहुत मदद मिलेगी।
बेहद गरीबी में जीवन बसर करने वाले इस गांव के लोग सूअर पालन की बदौलत अब अपने परिवार के साथ बेहतर ज़िंदगी जी रहे हैं।
अतिरिक्त आमदनी के लिए सूअर पालन एक अच्छा ज़रिया है, लेकिन इस व्यवसाय से मुनाफ़ा कमाने के लिए सूअरों का वैज्ञानिक प्रबंधन ज़रूरी है। जैसा कि मेघालय के युवा किसान एम्ब्रोसियस लापांग ने किया।
कम लागत में अधिक मुनाफ़ा कमाने का अच्छा ज़रिया है सूअर पालन, मगर पारंपरिक तरीका अपनाने पर इस व्यवसाय से अधिक लाभ नहीं होता। यदि आप बढ़िया मुनाफ़ा चाहते हैं तो झारखंड के इस युवा की तरह वैज्ञानिक तरीके से सूअर पालन का व्यवसाय करें।
सूअर पालन का बिज़नेस करना चाहते हैं तो इस ऐप के ज़रिए आपको हर छोटी-बड़ी जानकारी मिल जाएगी।
किसान ऑफ़ इंडिया से बातचीत में नितिन बारकर ने बताया कि सूअर पालन करना जितना आसान दिखता है उतना है नहीं। इनके रखरखाव , चारे को लेकर बहुत ध्यान देना होता है। उन्होंने सूअर पालन में ध्यान रखीं जाने वालीं ऐसी कई बातें हमें बताईं।