दूध की गुणवत्ता (Milk Quality): पिछले कुछ समय में डेयरी उद्योग में क्रॉसबीडिंग, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल और प्रबंधन के कारण भारत में दूध का उत्पादन बढ़ा है, मगर इसकी गुणवत्ता सुनिश्ति करना भी ज़रूरी है। दरअसल, डेयरी की कुल लागत का 70 प्रतिशत सिर्फ़ आहार पर खर्च होता है। ऐसे में अगर पशुओं के आहार का ध्यान रखा जाए और उन्हें संतुलित आहार दिया जाए तो, दूध की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही लागत में भी कमी आएगी। दूध की खराब गुणवत्ता का क्या कारण है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है, आइए जानते हैं।
गुणवत्तापूर्ण दूध का अर्थ
इसका मतलब है कि दूध में पर्याप्त फैट (वसा), फैट रहित SNF, न्यूनतम माइक्रोबियल भार, दूषित पदार्थों और अंतः विकसित विषाक्त पादर्थों से रहित होना चाहिए। इन सभी मापदंडों पर खरा उतरने पर ही दूध को गुणवत्तापूर्ण माना जाता है। दूध में वसा कम होने का मतलब है कि इसकी गुणवत्ता खराब होना और कम वसा कई कारणों से हो सकती है, जैसे- पशुओं को कम फाइबर युक्त आहार देना, चारे को बहुत मोटा या महीन काटना, अधिक मात्रा में घुलनशील शुगर का सेवन, आहार में कम प्रोटीन और अधिक वसा शामिल होना, इसके अलावा दूध निकालने का गलत तरीका भी इसके लिए ज़िम्मेदार हो सकती है।

दूध में वसा कम होने के कारण
कुछ गाय अनुवांशिक कारणों से भी कम फैट वाला दूध देती हैं। जैसे-स्वदेशी और जर्सी पुशओं की तुलना में शुद्ध होल्स्टीन फ्रिजियन और इसकी संकर गाय कम फैट वाला दूध देती है। इसके साथ ही ज़्यादा दूध देने वाली गायों में भी दूध वसा कम होता है।
कंसंट्रेट या उच्च घुलनशील शुगर का सेवन
कम फाइबर और ज़्यादा कंसंट्रेट या अनाज (मक्का) के सेवन से अधिक लैक्टेट और कम वसा वाला दूध होगा। इसलिए फाइबर और कंसंट्रेट संतुलित मात्रा में खिलाना चाहिए। रूमेन में फाइबर का पाचन बेहतर हो इसके लिए पहले कटा हुआ चारा और फिर कंसंट्रेट खिलाना चाहिए।

सबक्लिनिकल रूमेन एसिडोसिस
पशुओं को जब ज़्यादा अनाज या फर्मेन्टेड उत्पाद खिलाया जाता है, तो इसकी वजह से रूमेन एसिडोसिस हो सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने से डेयरी पशुओं में लैमिनाइटिस हो सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक सिर्फ़ साइलेज को चारे के रूप में खिलाने से सबक्लिनिकल रूमेन एसिडोसिस, लैमिनाइटिस और दूध में वसा कम भी हो सकता है। इसलिए साइलेज को कंसंट्रेट मिश्रण और अन्य चारे के साथ मिलाकर कुल मिश्रित राशन के रूप में देना चाहिए।
प्रोटीन और सल्फर की कमी
कम प्रोटीन और सल्फर का सेवन रूमेन को कम फर्मेन्टेड करता है। इसके साथ ही दूध में वसा और एसएनएफ दोनों की मात्रा को भी कम करता है। इसे संतुलित करने के लिए कंसंट्रेट मिश्रण या फलियां चारे के ज़रिए पर्याप्त प्रोटीन खिलाएं।
चारा और कंसंट्रेट खिलाने का क्रम बेहतर रोमिनेशन, रूमेन माइक्रोबियल गतिविधि और पशु स्वास्थ्य के लिए पहले कटी हुई हरी घास खिलाकर बाद में चारा और कंसंट्रेट मिश्रण खिलाना चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण दूध के लिए प्रबंधन
कंसंट्रेट मिश्रण को पानी में मिलाकर नहीं खिलाना चाहिए। अगर ज़रूरी हो तो उसे अर्ध-ठोस रूप में दें, मगर तरल में नहीं। धूल से बचाने के लिए मिश्रण पर बस पानी का छिड़काव करें। पशुओं को कंसंट्रेट मिश्रण खिलाने के बाद 2 घंटे तक पानी नहीं देना चाहिए, जिससे कंसंट्रेट का रूमेन पाचन बेहतर होगा। दूध निकालते समय आखिरी बूंद तक निकालनी चाहिए क्योंकि उसमें वसा अधिक होता है। दूध की गुणवत्ता के लिए इसमें पानी की मिलावट न करें।

ICAR का फ़ीड पूरक
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)- NIANP बेंगलुरू ने डेयरी मालिकों की पशुओं के पोषण संबंधि समस्या दूर करने के लिए एक खास फीड पूरक बनाया है। इस पूरक में रूमेन फर्मेन्टेशन के लिए सबसे अहम पोषक तत्व होते हैं और इसे चारा खिलाने के बाद खिलाया जाना चाहिए। इस पूरक आहार से दूध की गुणवत्ता और पशुओं की प्रजनन क्षमता में सुधार होता है। मध्य दूध देने वाले पशुओं को एक दिन में 250 ग्राम और अधिक दूध देने वाले पशुओं को प्रति दिन 500 ग्राम पूरक आहार देना चाहिए।
इसके साथ ही दूध में कम वसा की समस्या से निपटने के लिए पशुओं को कंसंट्रेट मिश्रण और फलियों के साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाला हरा चारा भी संतुलित मात्रा में खिलाना चाहिए।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- ICAR-CMFRI ने Tuna मछली को लेकर उपभोक्ताओं को दी ज़रूरी सलाहICAR-CMFRI ने Tuna मछली को लेकर कहा कि एक क्षेत्र में मिले परजीवी के आधार पर भारतीय मछलियों से दूरी बनाने की ज़रूरत नहीं है।
- आंध्र प्रदेश के रायलसीमा का विकास: 1 लाख करोड़ रुपये के हॉर्टिकल्चर हब की रखी जाएगी आधारशिलारायलसीमा हब को रायलसीमा के चार अविभाजित जिलों के साथ-साथ प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में डेवलप किये जाएंगे। इसका मेन टार्गेट सूखे से प्रभावित इलाकों में बागवानी को बढ़ावा देना है।
- Resilient Dairy Alliance की National Consultation में जलवायु अनुकूल डेयरी पर ज़ोरResilient Dairy Alliance की National Consultation में जलवायु अनुकूल डेयरी और टिकाऊ विकास पर चर्चा हुई।
- बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: पशुपालकों को ब्याज पर 100 फीसदी सब्सिडी,किसानों-डेयरी सेक्टर को तोहफाइस योजना पर अगले तीन साल में 160 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च होंगे। इसका मकसद पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और राज्य में दूध के प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है।
- National Zoological Park में World Rhino Day पर जागरूकता कार्यक्रमNational Zoological Park में World Rhino Day पर गैंडा संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
- मध्य प्रदेश कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: 13 हज़ार करोड़ से कृषि और सिंचाई को मिलेगी नई उड़ानमुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ किया है कि राज्य सरकार कृषि विकास के तहत उत्पादन बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है।
- PM Surya Ghar Yojana Delhi 2026: छत पर सोलर पैनल लगाएं, शुरू हुआ Registration PortalKisan of India को Google पर जोड़ें दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 21 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Yojana Delhi 2026) के लिए दिल्ली का रजिस्ट्रेशन पोर्टल शुरू कर दिया है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी के 2.25 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का टारगेट… Read more: PM Surya Ghar Yojana Delhi 2026: छत पर सोलर पैनल लगाएं, शुरू हुआ Registration Portal
- WWF Global Conservation Conference में जंगलों के साथ Grasslands और Wetlands बचाने पर ज़ोरWWF Global Conservation Conference में भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर ज़ोर दिया।
- बिना टच किये मछली का Measurement! ICAR-CMFRI का ‘MatsyaMetri’App बदल देगा Fisheries Research की तस्वीर‘MatsyaMetri’ को ARCore-supported Android devices के लिए डिजाइन किया गया है। ‘MatsyaMetri ‘ एक इमेज बेस्ड टूल है। यूज़र मछली की तस्वीर लेता है और ऐप अपने आप उसके आयामों का अनुमान लगाकर माप दर्ज कर लेता है।
- लखनऊ का मलिहाबादी दशहरी आम अब ग्लोबल पहचान की ओर, ODOP में होगा शामिलमलिहाबादी दशहरी आम की मांग अब 25 से अधिक देशों में है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह आम पहुंच रहा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को लेकर सहयोग पर दिया ज़ोरद्रौपदी मुर्मू ने NGT कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़ोर दिया।
- केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय का बड़ा ऐलान: रेशम उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आमदनी,’सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणासरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है।
- पराली जलाने पर केंद्र सख़्त: ज़मीन के रिकॉर्ड में 15 महीने तक दर्ज रहेगा नाम, दोबारा जलाने पर और कड़ी कार्रवाई!ये नियम दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगा जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है।
- Samriddh Vidisha Model: तैयार हुआ ग्रामीण गरीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए नया रोडमैपSamriddh Vidisha Model की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे।
- दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देशदक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से Farmer ID, AgriStack और कृषि लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने को कहा गया।
- Mahila Shetkari Portal: महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम,अब खेत में काम करने वाली हर महिला बनेगी ‘किसान’अधिनियम के अनुसार, महिला को किसान मानने का आधार सिर्फ ज़मीन का मालिकाना हक नहीं, बल्कि खेती में उसकी ‘वास्तविक भागीदारी’ होगी।
- Soil Carbon Payments से किसानों को अतिरिक्त आय की नई पहलSoil Carbon Payments के ज़रिए पंजाब और हरियाणा के 2500 से ज़्यादा किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिलेगा।
- Reimagining Indian Agriculture रिपोर्ट में ख़ुलासा : देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन बंजर!देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन ख़राब हो रही है। रिपोर्ट में ICAR-Indian Institute of Soil Science के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
- त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद: सरकार घटा सकती है खाद्य तेल पर आयात शुल्कभारत अपनी खाद्य तेल की ज़रूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ये आयात मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होता है।
- बिहार में बाढ़ से फ़सल नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया और किसानों को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।





















