नैनो फर्टिलाइज़र क्यों है नई ज़माने की खेती की ज़रूरत, जानिए IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार से
खेती में यूरिया, डीएपी और नैनो यूरिया/डीएपी की बहुत अहम भूमिका होती है और भारतीय किसानों को इसकी आपूर्ति करता […]
खेती में यूरिया, डीएपी और नैनो यूरिया/डीएपी की बहुत अहम भूमिका होती है और भारतीय किसानों को इसकी आपूर्ति करता […]
NAWRC भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, Government of India) की एक अहम पहल है। इसे 2018-19 में शुरू किया गया था।
Kisan of India Samman 2025 के मंच पर एक बड़ा सवाल उठा- Climate change के इस दौर में पारंपरिक फसलें टिक नहीं पा रहीं, तो किसान क्या करे? इसका जवाब दिया Indian Agricultural Research Institute (IARI) के Principal Scientist Dr. Naved Sabir ने ।
भारत में कृषि योजनाएं शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के साथ खेती को बना रही हैं आत्मनिर्भर और टिकाऊ, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम।
कृषि को फायदे का सौदा बनाने में देश और विदेश के कृषि अनुसंधान संस्थानों (Agricultural Research Institutes In India And Abroad) की भूमिका अहम हो गई है। ये संस्थान अब सिर्फ अनाज पैदा करने की बात नहीं करते, बल्कि एक स्मार्ट, टिकाऊ और मुनाफे वाली कृषि का सपना संजोए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 (International Year of Cooperatives 2025) के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और IFFCO के मार्केटिंग निदेशक डॉ. योगेंद्र कुमार ने महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की।
शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना का दौरा किया (Shivraj Singh Chauhan visited the Eastern Research Complex of Patna) और पूर्वी भारत में कृषि के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान कार्यों की समीक्षा की।
दिल्ली के पूसा कैंपस (Pusa Campus) में 12 फ़रवरी 2025 को 14वें एशियन फिशरीज एंड एक्वाकल्चर फोरम (14th Asian Fisheries and Aquaculture Forum) यानि 14AFAF का आयोजन हुआ। क्या आप जानते हैं कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश (Fish Producing County) बन चुका है। और ये सब संभव हुआ है देश के प्रधानमंत्री की दूरदर्शी नीतियों और सरकार की मछली पालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता से।
क्या आप जानते हैं कि झींगा शेल यानि झींगा कचरा जिसे Shrimp Shell भी कहते हैं, जिसे अब तक बेकार समझा जाता था, करोड़ों की कमाई और पर्यावरण सुधार का ज़रिया बन सकता है? महाराष्ट्र में लॉन्गशोर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड ने ऐसा कर दिखाया है। यहां भारत का पहला झींगा शेल बायोरिफाइनरी प्लांट (Shrimp Shell Biorefinery Plant) स्थापित हुआ है, जो कचरे से अमूल्य उत्पाद बनाने की अनोखी मिसाल पेश करता है।
कम लागत और समय में मुनाफ़ा कमाने का एक अच्छा विकल्प है मधुमक्खी पालन जिसे मौन पालन भी कहा जाता है। ख़ासतौर पर पहाड़ी इलाकों में, उत्तराखंड के किसानों और युवाओं को मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित करने में सरकारी संस्थाएं मदद कर रही हैं।
किसान उद्यमियों के लिए उत्पाद तैयार करने के बाद उसे बेचना एक बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि सही बाज़ार न मिलने की वजह से उन्हें ज़्यादा मुनाफा नहीं हो पाता। इस समस्या को दूर करने के लिए कृषि विभाग द्वारा पूसा कृषि हाट की शुरुआत की गई है।
मिज़ोरम के आदिवासी इलाकों में खेती की पारंपरिक तकनीक यानी झूम खेती लोकप्रिय है, मगर इससे न सिर्फ़ मिट्टी की उर्वरता कम होती है, बल्कि वनस्पतियों को जलाने से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मिज़ोरम के किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है।
केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी क्षेत्रीय केंद्र संस्थान ने बाजरा डाइहलर मशीन (Millet Dehuller Machine) विकसित की है। मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों के लिए ये मशीन कैसे उपयोगी हो सकती है, इस पर सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग रीज़नल सेंटर कोयंबटूर के हेड डॉ. एस. बालासुब्रमण्यम से विशेष बातचीत।
लाहौल और स्पीति घाटी में सिर्फ़ 6 महीने ही खेती करने के लिए उपयुक्त होते हैं, मगर कृषि विज्ञान केन्द्र ने तोरिया की खेती के लिए उन्नत किस्म के चुनाव से लेकर फसल प्रबंधन की उन्नत जानकारी देकर यहां के किसानों की सहायता की है। अब किसान दूसरी फसल के रूप में तोरिया उगाकर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।
लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वर्चुअली उपस्थित रहे।