पूसा कृषि हाट (Pusa Agri Krishi Haat): आप चाहे कितना भी अच्छा या ऑर्गेनिक उत्पाद क्यों न बना लें, जब तक इसे सही बाज़ार नहीं मिलेगा, लोगों को इसका फ़ायदा नहीं मिल पाएगा और न ही आपको उसका सही मुनाफ़ा मिलेगा। इसलिए जितना ज़रूरी है अच्छा उत्पाद तैयार करना, उतना ही ज़रूरी है अच्छा मार्केट यानी बाज़ार तलाशना।
किसानों के लिए ये काम थोड़ा मुश्किल हो जाता है, इसलिए उनकी मदद के लिए कृषि विभाग की ओर से पूसा कृषि हाट की शुरुआत की गई है, जहां किसान अपने उत्पाद बेच सकते हैं और इसके लिए उन्हें किराया भी ज़्यादा नहीं देना होता।

पूसा कृषि हाट में किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली की मुलाकात हुई एक कृषि उद्यमी बनवारी लाल महोलिया से, जो यहां अपने उत्पादों को बेच रहे हैं। लोगों से मिल रही प्रतिक्रिया से वो बहुत खुश हैं। यही नहीं, उन्हें पूरी उम्मीद है कि इससे उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी।

जैविक खेती को बढ़ावा
बनवारी लाल महोलिया, सुभद्रा और पुष्करवाले ब्रांड के तहत कई ऑर्गेनिक उत्पाद बना रहे हैं और ये किसानों को भी यूरिया डीएपी की बजाय जैविक खाद का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। वो कहते हैं कि वो खुद गौवंश से इकट्ठा हुए गोबर का इस्तेमाल खेती में करते हैं। इससे फसल बहुत अच्छी होती है। उनका कहना है कि किसानों को खेती के पुराने यानी जैविक तकनीकों को ही अपनाना चाहिए।
पुष्करवाला ब्रांड
बनवारी लाल बताते हैं कि 2016 में उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत की। उनके पुष्करवाला ब्रांड का सबसे खास उत्पाद है गुलाब के फूल से बना गुलकंद, जो पूरी तरह से ऑर्गेनिक तरीके से बनाया गया है। उनकी कंपनी पिंक रोज के कई उत्पादों के साथ ही आंवला के उत्पाद और तरह-तरह के शरबत बनाती है। अपने उत्पादों के बारे उनका कहना है कि सबकुछ नेचुरल तरीके से बनाया जाता है, किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता।
मिठास के लिए मिश्री, शहद और खांड का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा पुष्करवाला आंवला से कैंडी, मसाला कैंडी, शरबत आदि भी बनाती है। आंवले के अलावा पान, गुलाब, केसर और पुदीना का शरबत भी कंपनी बना रही है।

फ्लेवर वाली ऑर्गेनिक टी
पुष्करवाला के साथ ही वो सुभद्रा ऑर्गेनिक ब्रांड के तहत भी कई चीज़ें बनाते हैं। इसमें बिलोना गाय का घी, गुलाब की धूपबत्ती, हवन सामग्री से बनी धूपबत्ती, ग्रीन टी शामिल हैं। ग्रीन टी में कई फ्लेवर हैं जैसे- केमोमाइल, लेमन ग्रास टी, लेवेंडर, रोज़ आदि।
बनवारी लाल बताते हैं कि ऑर्गेनिक उत्पाद बनाने के पीछे उनका मकसद है कि लोगों की सेहत में सुधार हो, क्योंकि आजकल जिस तरह के केमिकल वाले उत्पाद लोग इस्तेमाल कर रहे हैं इससे पेट की समस्या बढ़ने लगी है। उनका मकसद मकसद ऑर्गेनिक चीज़ों को और खेती को बढ़ावा देना। जिससे लोगों और किसानों दोनों का फायदा हो।
सैकड़ों किसान हैं जुड़ें
बनवारी लाल बताते हैं कि उनकी कंपनी से करीब 850 किसान जुड़े हुए हैं। जिससे उन्हें उत्पादों के लिए कच्चा माल मिलता है। इस तरह के उत्पादों की बिक्री अगर ज़्यादा होती है तो किसानों की उपज भी मांग भी बढ़ेगी जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा।

बिज़नेस में फ़ायदा
बनवारी लाल का कहना है कि कृषि अनुसंधान पूसा की ये बहुत बड़ी पहल है डायरेक्ट सेलिंग के लिए। यहां रेंट बहुत कम है और उनके पास अभी तक काफी ग्राहक आए हैं। यही नहीं उत्पाद भी बिके हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में पूसा कृषि हाट और अच्छा होगा।
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