एवोकाडो की खेती: भारत में पोषण, बाजार और किसानों की आय बढ़ाने वाली एक उभरती फसल
एवोकाडो (Persea americana) वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से लोकप्रिय होती फल फसलों में शामिल है। इसे विशेषज्ञ “सुपरफूड” […]
एवोकाडो (Persea americana) वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से लोकप्रिय होती फल फसलों में शामिल है। इसे विशेषज्ञ “सुपरफूड” […]
बिहार सरकार (Bihar government) किसानों को इस ‘हरे सोने’ (National Bamboo Mission) की खेती के लिए आगे ला रही है और उनकी जेब पर 50 फीसदी तक का खर्चा भी खुद उठा रही है।
डीप रिसर्च बताती है कि Global Health and Wellness Industry का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। साल 2024 में मोरिंगा (Moringa) सप्लाई चेन का बाजार करीब 9.5 ट्रिलियन डॉलर का था, जो 2029 तक 13 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की राह पर है।
किसानों को फल, सब्जियों, फूलों और मसालों की खेती (Cultivation of horticultural ) करने पर मोटी आर्थिक सहायता (subsidy) दी जाएगी। ये जानकारी Horticulture Department के प्रवक्ता ने दी।
चरवाहा समुदाय (shepherd community) की भूमिका सिर्फ पशुपालन (animal husbandry) तक सीमित नहीं है। वे एक पुल की तरह काम करते हैं। जो हमारी परंपरा को आज के वक्त के साथ जोड़ते हैं, प्रकृति के साथ coexistence बढ़ाते हैं। देश की खाद्य सुरक्षा की नींव मजबूत करते हैं।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture and Farmers Welfare Minister Shivraj Singh Chouhan) 3 और 4 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं, जहां आज उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं Agricultural Revolution In Jammu And Kashmir) की समीक्षा की।
आज केले (Banana) की खेती 150 से अधिक देशों में होती है, जहां हर साल लगभग 105 मिलियन टन उत्पादन होता है। स्थानीय उपभोग के लिए उगाए जाने वाले केले आमतौर पर पारंपरिक तरीकों से उगाए जाते हैं। वहीं, कैवेंडिश जैसी मीठी किस्में वैश्विक दक्षिण के कई देशों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जिनका वार्षिक उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में 9 अप्रैल 2025 को भारत और इज़राइल के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग (India-Israel Agricultural Cooperation)को मज़बूत करने के लिए एक ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत के केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और इज़रायल के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मंत्री अवि दिख्तर ने हिस्सा लिया।
कसावा मीलीबग के प्रसार को रोकने के लिए, NBAIR ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। 7 मार्च, 2022 को तमिलनाडु के येथापुर, सलेम में पहला फील्ड रिलीज़ किया गया, जिसमें 300 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। इसके बाद पूरे दक्षिण भारत में 500 से अधिक स्थानों पर इस परजीवी (Parasites) को छोड़ा गया।
सबसे पहले आम के फूलों और डंठलों पर छोटे भूरे या काले धब्बे के रूप में दिखाई देते हैं। अगर सही समय पर किसान इस रोग का उपचार नहीं करते हैं तो ये फूल धीरे-धीरे मुरझानें लगते हैं और सूख कर गिर जाते हैं। इस कारण फसल का उत्पादन कम हो जाता है। ये रोग ज्यादा पानी भरने, नमी और आद्र मौसम में सबसे तेजी से फैलता है, खासकर जब तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच हो।
कटुआ कीट आमतौर पर रात में फ़सलों को क्षति पहुंचाते हैं। इसकी सुंडियां दिन में मिट्टी की ऊपरी सतह में छिपकर रहती हैं। रात में बाहर आकर छोटे पौधों के कोमल तनों, टहनियों और पत्तों को कुतरकर खा जाते हैं। काटे गये पौधों के अवशेष को ज़मीन के अन्दर ले जाते हैं, जहाँ दिन में उसे खाते हैं। इसीलिए कटे हुए पौधों के अलावा और मिट्टी में दबे हुए पौधों के अवशेष भी कटुआ कीट की खेतों में मौजूदगी का साफ़ संकेत देते हैं। अपने ऐसे स्वभाव की वजह से ही ये ‘कटुआ कीट’ कहलाते हैं।
सहारनपुर में बनने वाले शहद को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहा जाता है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। सहारनपुर शहर की जलवायु और प्राकृतिक संसाधन मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। वहीं, शहद हब सहारनपुर में स्थानीय मधुमक्खी पालक पीढ़ियों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।
जरबेरा एक बहुवर्षीय, शाकीय पौधा है जो 12 से 18 इंच लंबा और 12 से 15 इंच चौड़ा हो सकता है। इसके आकर्षक फूल विभिन्न रंगों में आते हैं, जैसे – पीला, नारंगी, लाल, गुलाबी, सफेद और लैवेंडर। इसकी मूल उत्पत्ति अफ्रीका मानी जाती है, लेकिन अब यह दुनिया के कई देशों में उगाया जाता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण किसान भी अब इसकी व्यावसायिक खेती करने लगे हैं।
हर्षित गोधा ने भोपाल में एवोकाडो की खेती अपनाकर इज़राइली तकनीक से किफायती कीमत पर पौष्टिक फल उगाना शुरू किया, जिससे भारत में इसकी उपलब्धता बढ़ी।
हाजीपुर के मालीपुर गांव में केले की खेती से किसान बमबम राय ने चीनिया केले की मिठास को प्रसिद्ध किया है और खेती से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की है।