खेती को अब व्यवसाय की तरह करने की ज़रूरत है और लागत कम करके मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए किसानों को ज़्यादा से ज़्यादा आधुनिक तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए जैसा कि अंबाला की प्रगतिशील महिला किसान अमरजीत कौर कर रही हैं। एक दशक से भी ज़्यादा समय से खेती करने वाली 32 साल की अमरजीत के खेत में आधुनिक कृषि के सभी उपकरण मौजूद हैं। वह नयी-नयी तकनीकों के बारे में अपडेट रहने के साथ ही उसे अमल में भी लाती हैं, तभी तो वह अपने इलाके की सफल महिला किसानों में से एक हैं।
पिता के बाद संभाली ज़िम्मेदारी
पंजाब के अंबाला ज़िले के अधोई गाँव की रहने वाली प्रगतिशील महिला किसान अमरजीत 13 साल से भी अधिक समय से खेती कर रही हैं। यही उनके परिवार की आमदनी का मुख्य स्रोत है। अमरजीत पहले अपने पिता के खेत में पार्टटाइम काम किया करती थीं, लेकिन 2007 में पिता को लकवा होने की वजह से अमरजीत ने खेती की पूरी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया।
आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित
अमरजीत के पास 8.5 एकड़ सींचित भूमि हैं और एक छोटी डेयरी इकाई है, जिसमें 2 भैंसें हैं। उनके खेत में सबमर्सिबल ट्यूबवेल, ट्रैक्टर, एम.बी. हल, डिस्क हैरो, हैप्पी सीडर, डीएसआर जैसे कई आधुनिक कृषि उपकरण हैं ।

ट्रेनिंग ने बदला नज़रियां
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के संपर्क में आने से पहले तक वह पारंपरिक फसलों की ही खेती करती थीं, जिससे न तो खेती और न ही डेयरी उद्यम से पर्याप्त आमदनी हो पाती थी। फिर वह कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों व कृषि विभाग के संपर्क में आईं और खेती के प्रति उनका नज़रिया बदल गया।
अब वो खेती को एक व्यवसाय की तरह करने लगीं और सभी नई व उन्नत तकनीकों को अपनाया, जिससे फसल का उत्पादन बढ़े। कौशल और ज्ञान का विकास करने के लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र, अंबाला द्वरा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह भी लेती रहती हैं।

खेती में किए ये बदलाव
वह तीन फसल पैटर्न को अपना रही हैं। पहला चावल-गेहूं-मूंग, दूसरा गन्ना-प्याज़-रतून और तीसरा आलू-प्याज़-चारा। विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह की मदद से वह मिट्टी की टेस्टिंग, संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकी (Resource Conservation Technologies (RCTs) का इस्तेमाल कर रही हैं। गेहूं, चना, मूंग और सरसों जैसी फसलों के उन्नत बीज का इस्तेमाल कर रही हैं।
- बीज की उन्नत किस्मों का इस्तेमाल करने के साथ ही वह खेती की लागत कम और अधिक मुनाफ़ा कमाने के लिए बीजों को जैव उर्वरक और संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकी से उपचारित करती हैं।
- खेती के साथ ही डेयरी इकाई का संचालन करके वह एकीकृत कृषि का उदाहरण पेश करती हैं। वर्मीकम्पोस्ट, वर्मी वॉश का फसल उत्पादन में इस्तेमाल करती हैं। खीरे की फसल में बांस का इस्तेमाल और चारे की अधिक उपज देनी वाली किस्म की खेती करती हैं।
- पानी की समस्या को देखते हुए उन्होंने खरीफ़ के मौसम में कुछ इलाके में धान की बजाय मक्के की खेती की।
- जलवायु परिवर्तन को देखते हुए 2 साल पहले वह पूरी तरह से जैविक खेती करने लगीं। इसके लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञों से सलाह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

कितनी होती है कमाई?
खेती और डेयरी इकाई से उन्हें सालाना करीब 6.7 लाख रुपये की सालाना आमदनी हो रही है। कृषि में अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं। अमरप्रीत एक प्रगतिशील महिला किसान और प्रशिक्षक के रूप में अपने ज़िले में पहचान बना चुकी हैं और महिलाएं उनके ही नक्शे कदम पर चलने की कोशिश कर रही हैं।
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