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देश में चीनी की कीमतों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले 15 दिनों में ही चीनी 17 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। त्योहारी सीजन से पहले कीमतों का उछाल आम आदमी के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गया है। महाराष्ट्र में बेंचमार्क एक्स-मिल कीमत 5,400 से 5,560 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। मार्च में ये कीमत सिर्फ 3,650 रुपये थी। यानी सिर्फ 5 महीनों में चीनी 50 फीसदी से ज्यादा महंगी हो चुकी है। अप्रैल में 3,750, मई में 3,800, जून में 4,300 और जुलाई में 4,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचकर अगस्त में इसने नया रिकॉर्ड बनाया है।
हर रसोई पर पड़ेगा असर
चीनी की बढ़ती कीमत का असर सिर्फ एक चीज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की हर चीज को प्रभावित करेगा। चाय से लेकर चॉकलेट, दूध, खीर, जूस और मिठाई। हर चीज में चीनी का इस्तेमाल होता है। त्योहारी सीजन में जहां मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, वहीं चीनी के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा। देश में अगस्त के अंत से जनवरी तक चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है, ऐसे में यह महंगाई और भी चिंताजनक हो जाती है।
कीमतों के बढ़ने की क्या है वजह?
विशेषज्ञों के अनुसार 2025-26 सीज़न उम्मीद से कहीं ज्यादा टाइट रहा है। उत्पादन उम्मीद से कम रहा, जबकि घरेलू खपत अच्छी रही। इसके अलावा, चीनी का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट किया गया, जिससे चीनी की इन्वेंट्री में कमी आई। मांग और आपूर्ति का यह असंतुलन ही कीमतों में तेजी का मुख्य कारण है। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि 1.5 से 2 मिलियन टन चीनी निर्यात करने का फैसला भी देश में चीनी की कमी का बड़ा कारण बना। सरकार ने नवंबर 2025 में 1.5 मिलियन टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 2 मिलियन टन कर दिया गया। निर्यात पर बैन लगाने से पहले ही 8 लाख टन चीनी एक्सपोर्ट हो चुकी थी।
सरकार का बड़ा फैसला: आयात की तैयारी
बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। चीनी पर लगने वाली 100 प्रतिशत आयात ड्यूटी को कम करने या पूरी तरह खत्म करने पर विचार किया जा रहा है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा चीनी उत्पादक होने के बावजूद 10 साल बाद चीनी का आयात करने जा रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार जीरो ड्यूटी पर 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दे सकती है। भारत ने इससे पहले 2016-17 में कच्ची चीनी का आयात किया था। इस कदम से बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
क्या मिलेगी राहत?
यह तो वक्त ही बताएगा कि चीनी के आयात से कीमतों में कितनी गिरावट आती है। लेकिन इतना तय है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है। त्योहारों के मौसम में आम आदमी को महंगाई से राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि, इस आयात का असर क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।
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