Analog dairy products banned in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में बैन हुए नकली पनीर, घी और खोया, जानें क्यों है यह कदम अहम

योगी सरकार ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच करवाई। इस जांच में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।

खाने-पीने की चीजों में मिलावट को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार (Government of Uttar Pradesh) ने एक सख्त और ऐतिहासिक फैसला लिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath government) ने प्रदेशभर में एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete ban on the manufacture, storage, and sale of analogue dairy products) लगा दिया है। इस फैसले का सीधा असर बाजार में बिकने वाले पनीर, घी, खोया, क्रीम और छेना जैसी रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा। लेकिन आखिर ये एनालॉग उत्पाद होते क्या हैं और योगी सरकार ने ये कदम क्यों उठाया है? आइए इस पर गहराई से नज़र डालते हैं।

क्या हैं एनालॉग डेयरी उत्पाद?  

अक्सर हम बाजार से पनीर या घी खरीदते हैं, लेकिन क्या हमें पता है कि वह असली है भी या नहीं? एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे उत्पाद होते हैं जो दिखने, स्वाद और बनावट में असली दूध से बने उत्पादों की तरह लगते हैं, लेकिन बनते हैं पूरी तरह से अलग चीजों से। असली पनीर दूध को फाड़कर (Coagulant) बनता है, वहीं एनालॉग पनीर में दूध की जगह सस्ते वनस्पति तेल (खासकर पाम ऑयल), स्टार्च, सोया प्रोटीन, इमल्सीफायर और केमिकल स्टेबलाइजर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन सबको मशीनों में ब्लेंड करके पनीर जैसा सफेद और स्पंजी बनावट दे दी जाती है। 

सेहत के लिए क्यों है ख़तरनाक?

ये सस्ता सेहत के लिए किसी ‘धीमे जहर’ से कम नहीं है। डॉक्टरों और एक्सपर्ट के अनुसार, इन उत्पादों में पाए जाने वाले ट्रांस फैट और संतृप्त वसा (Saturated Fat) शरीर में ख़राब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाते हैं, जिससे दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही, ये लीवर (Fatty Liver), डाइजेस्टिव सिस्टम और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। 

जांच में खुली पोल 

योगी सरकार ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच करवाई। इस जांच में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। कई नमूनों में रिफाइंड ऑयल और सोयाबीन से बने पदार्थ (Refined oil and products made from soybeans) तो मिले ही, साथ ही टैल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड और लिक्विड ग्लूकोज जैसी खतरनाक चीजों का इस्तेमाल भी पाया गया। ये सभी पदार्थ खाद्य सुरक्षा मानकों के खिलाफ हैं और इंसानी सेहत के लिए हानिकारक हैं। इसी वजह से सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) के तहत यह पूर्ण प्रतिबंध लगाया है ।

उल्लंघन करने वालों पर क्या होगी कार्रवाई?

सरकार का आदेश साफ है कि मिलावटखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी डेयरी या फैक्ट्री में हानिकारक केमिकल या नकली वसा पाया गया, तो उत्पादों को जब्त और नष्ट किया जाएगा। साथ ही, उस यूनिट का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। प्रदेश बाहर से आने वाले ब्रांड्स पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा सकता है अगर उनके उत्पादों में मिलावट पाई जाती है।  

क्या है कानूनी पहलू?

ये फैसला उत्तर प्रदेश से पहले महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात लागू कर चुके हैं । इन राज्यों ने FSSAI (खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के नियमों के तहत यह कदम उठाया है, जहां एनालॉग उत्पादों को ‘डेयरी’ उत्पादों के रूप में बेचना प्रतिबंधित है । FSSAI ने साफ किया है कि किसी भी चीज़ को ‘पनीर’ के नाम पर तभी बेचा जा सकता है जब वह असली दूध से बनी हो, अन्यथा उस पर ‘एनालॉग’ या ‘नॉन-डेयरी’ लिखना अनिवार्य है । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में FSSAI और सभी राज्यों से Explanation मांगा है ।

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