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भारत में Food Processing यानी खाद्य प्रसंस्करण का क्षेत्र युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने, रोज़गार पैदा करने और खाने-पीने की चीजों की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने युवाओं से इस क्षेत्र में नौकरी तलाशने के बजाय अपना काम शुरू करने, नई तकनीक अपनाने और समस्याओं का समाधान खोजने की अपील की।
वे हरियाणा के कुंडली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM-K) के 7वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में 260 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं, जबकि 8 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
Food Processing से रोज़गार और किसानों की कमाई बढ़ाने का मौक़ा
चिराग पासवान ने कहा कि भारत में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अभी भी काफ़ी संभावनाएं हैं। देश में कृषि उपज की विविधता और बड़ा उपभोक्ता बाज़ार इस क्षेत्र को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।
Food Processing के जरिए फल, सब्जियों और दूसरी कृषि उपज को उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे उपज का बेहतर इस्तेमाल करने, उसकी कीमत बढ़ाने और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के अवसर बन सकते हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक खाद्य बाज़ार में अपनी मज़बूत पहचान बना सकता है। इसके लिए ज़रूरी है कि खाद्य प्रसंस्करण की सुविधाएं, तकनीक और पूरी मूल्य शृंखला को खेतों और ग्रामीण इलाकों के करीब लाया जाए। इससे किसानों को भी इस क्षेत्र से जुड़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
युवाओं से नौकरी देने वाले बनने की अपील
चिराग पासवान ने 7वें दीक्षांत समारोह में शामिल विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल नौकरी पाने तक अपनी सोच सीमित न रखें। उन्हें उद्यमी, नए विचारों पर काम करने वाले और समस्याओं का समाधान देने वाले व्यक्ति के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
उनके मुताबिक, Food Processing में तकनीक और नए प्रयोगों के जरिए कई चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है। उन्होंने युवा नवाचार करने वालों को भरोसा दिलाया कि सरकार इस क्षेत्र को मज़बूत करने वाले नए विचारों और पहलों को समर्थन देगी।
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने भी इस क्षेत्र में कुशल लोगों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने, पोषण बेहतर बनाने, उत्पादों की कीमत बढ़ाने और आजीविका के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता से जुड़ी है देश की पहचान
चिराग पासवान ने खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता बनाए रखने को भी ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय उत्पाद की गुणवत्ता का असर केवल उसे बनाने वाली कंपनी की छवि पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे वैश्विक बाज़ार में भारत की पहचान भी जुड़ी होती है।
Food Processing क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान देने से भारतीय खाद्य उत्पादों की पहचान मज़बूत करने में मदद मिल सकती है।
NIFTEM-K के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने भी कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और कौशल का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत करियर के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज की प्रगति के लिए भी करना चाहिए। उन्होंने संस्थान में शोध, नवाचार और कुशल मानव संसाधन को मज़बूत करने की ज़रूरत बताई।
260 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 8 को गोल्ड मेडल
NIFTEM-K के 7वें दीक्षांत समारोह में कुल 260 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। इनमें 140 बीटेक, 78 एमटेक, 18 एमबीए और 24 पीएचडी के विद्यार्थी शामिल थे। शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 8 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी दिए गए।
संस्थान के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने बताया कि संस्थान शिक्षा, शोध, बुनियादी सुविधाओं और उद्योगों के साथ साझेदारी के क्षेत्र में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें शोध, नवाचार, उद्यमिता और उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार तैयार करना भी है।
रिलायंस रिटेल के फूड एंड एग्रीकल्चर विभाग के अध्यक्ष डॉ. आर. एस. सोढ़ी ने खाद्य क्षेत्र में काम करने के अवसरों पर बात की। उन्होंने भारत की बड़ी आबादी और बदलती उपभोग संबंधी ज़रूरतों को खाद्य उत्पादों में मूल्य जोड़ने के क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। वहीं, बिकाजी फूड्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल ने विद्यार्थियों को उद्योग में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
शोध और कारोबार को जोड़ने पर ज़ोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि Food Processing को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, शोध, उद्योग और कारोबार के बीच बेहतर तालमेल ज़रूरी है। चिराग पासवान की अपील भी इसी दिशा में थी कि युवा अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल नए उद्यम शुरू करने और उपयोगी समाधान विकसित करने में करें।
भारत में कृषि उपज की विविधता और बड़े बाज़ार को देखते हुए यह क्षेत्र किसानों, युवाओं और खाद्य उद्योग से जुड़े लोगों के लिए अवसर पैदा कर सकता है। इसके लिए तकनीक, गुणवत्ता और नए विचारों पर लगातार काम करना ज़रूरी होगा।
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