झारखंड के जामताड़ा जिले का छोटा सा गांव अमलाचातर इन दिनों खेती के एक ऐसे मॉडल की वजह से चर्चा में है, जो गांवों की तस्वीर बदलने की ताकत रखता है। यहां के किसान अब सिर्फ बारिश और एक फसल के भरोसे नहीं बैठे हैं, बल्कि खेती को कई हिस्सों में बांटकर कमाई के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं।
इसी बदलाव की मिसाल बने हैं अमलाचातर गांव के प्रगतिशील किसान सुभाष महतो। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए समेकित कृषि प्रणाली को अपनाया और आज उनकी खेती गांव के दूसरे किसानों के लिए सीखने का केंद्र बन चुकी है।
क्या है समेकित कृषि प्रणाली?
समेकित कृषि प्रणाली यानी एक ही जमीन और संसाधनों का इस्तेमाल करके कई तरह के कृषि कार्यों को साथ में करना। इसमें खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मछली पालन, डेयरी या अन्य गतिविधियों को जोड़ा जाता है, ताकि किसान की आय सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहे।
सुभाष महतो भी इसी सोच के साथ आगे बढ़े। उन्होंने खेत में अलग-अलग फसलें उगाने के साथ पशुपालन को जोड़ा। इसका फायदा यह हुआ कि अगर किसी मौसम में एक फसल कमजोर रही, तो दूसरी गतिविधियों से आमदनी बनी रही।

खेत बना सीखने की पाठशाला
आज सुभाष महतो का खेत सिर्फ खेती की जमीन नहीं, बल्कि पूरे इलाके के किसानों के लिए एक उदाहरण बन चुका है। गांव के किसान यहां आकर देखते हैं कि किस तरह सीमित संसाधनों में भी बेहतर कमाई की जा सकती है।
सुभाष महतो का कहना है कि पहले खेती से खर्च निकालना भी मुश्किल होता था, लेकिन अब खेती और पशुपालन को साथ जोड़ने से आमदनी बढ़ी है और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है।
पत्नी ने निभाई बराबरी की भूमिका
इस सफलता के पीछे सिर्फ सुभाष महतो की मेहनत नहीं, बल्कि उनकी पत्नी कजरी देवी का भी बड़ा योगदान है। खेतों से लेकर पशुओं की देखभाल तक, दोनों मिलकर काम करते हैं।
ग्रामीण इलाकों में अक्सर महिलाओं की मेहनत को नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन इस परिवार की कहानी दिखाती है कि खेती में महिलाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। कजरी देवी का साथ ही इस मॉडल की असली ताकत बना।
खेती के साथ डिजिटल इंडिया की झलक
इस परिवार की खास बात सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। सुभाष महतो के बेटे कृष्ण कुमार महतो ने गांव में ही प्रज्ञा केंद्र शुरू किया है।
एक तरफ माता-पिता खेती और पशुपालन संभाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ बेटा डिजिटल सेवाओं के जरिए गांव के लोगों की मदद कर रहा है। यह तस्वीर बताती है कि आज गांवों में खेती और तकनीक साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

कृषि विभाग भी कर रहा प्रोत्साहित
सुभाष महतो की सफलता से जामताड़ा का कृषि विभाग भी उत्साहित है। जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार के मुताबिक, सुभाष अब जिले के दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं।
कृषि विभाग अब अन्य गांवों के किसानों को भी अमलाचातर भेज रहा है, ताकि वे इस मॉडल को समझ सकें और अपने गांव में अपनाने की कोशिश करें।
खेती का बदलता चेहरा
कभी सिर्फ मौसम और बाजार के भरोसे चलने वाली खेती अब बदल रही है। किसान अब समझने लगे हैं कि सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
समेकित कृषि प्रणाली किसानों को सिर्फ अतिरिक्त आय ही नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाती है। इससे खेत का बेहतर इस्तेमाल होता है, परिवार को सालभर काम मिलता है और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
उम्मीद की नई कहानी
सुभाष महतो की कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में बदलती सोच की कहानी है। यह दिखाती है कि अगर किसान सही जानकारी, सरकारी योजनाओं और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो खेती को घाटे का नहीं बल्कि सम्मानजनक कमाई का जरिया बनाया जा सकता है।
जामताड़ा के अमलाचातर गांव से निकली यह कहानी आज उन हजारों किसानों के लिए उम्मीद बन रही है, जो खेती में नए रास्ते तलाश रहे हैं।
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