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भारत की सभ्यता और संस्कृति में रेशम का अपना एक अलग ही स्थान रहा है। कभी ‘सिल्क रूट’ से लेकर आज के ग्लोबल मार्केट तक, भारतीय रेशम अपनी बारीकी और चमक के लिए जाना जाता है। लेकिन अब सरकार इस सुनहरे धागे को सिर्फ विरासत नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि का ज़रिया बनाने में जुट गई है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने एक बड़ा ऐलान किया है कि रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों की सालाना आमदनी को 12 लाख रुपये तक पहुंचाने का टारगेट सेट किया गया है। ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को बदलने का ख़ाका है।
इनोवेशन और पुरस्कार से बढ़ेगा उत्साह
बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस के मौके पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘ सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणा की। इसका मकसद किसानों में कंपटीशन की भावना पैदा करना है। पुरस्कार में नकद राशि, प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ दूसरे लाभ भी देने पर विचार चल रहा है। ये कदम उन किसानों को सम्मानित करेगा जो सबसे ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं और दूसरों के लिए मिसाल बन रहे हैं।
26,000 से 60,000 मीट्रिक टन तक का सफर
मंत्री ने आंकड़ों के ज़रिए सरकार की मंशा साफ की। 2014 में देश का रेशम उत्पादन 26,000 मीट्रिक टन था, जो आज बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हो गया है। अब लक्ष्य है-2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन। साथ ही, 2028-29 तक भारत को रेशम उत्पादन में दुनिया में पहले नंबर पर लाने का संकल्प लिया गया है। और ये तभी संभव है जब चीन का प्रोडक्शन घट रहा है और इंटरनेशनल मार्केट में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है।
किसानों की आमदनी बढ़ाने का गणित
सरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है। इसके लिए ज़रूरी है कि वैज्ञानिकों के नए डेवलपमेंट, संकर किस्में और मॉडर्न मशीनरी सीधे किसानों तक पहुंचे। हाई यील्ड देने वाले रेशमकीटों की हाइब्रिड प्रजातियों को शामिल किया जा रहा है, ताकि किसान कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा सकें।
कर्नाटक की अग्रणी भूमिका और MSME का सहयोग
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक की तारीफ की, जो देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी है। सरकार बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर ख़ास ध्यान दे रही है। बड़ी संख्या में बिजनेसमैन MSME के तहत रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं, और सरकार अनुदान व गुणवत्ता सुधार योजनाओं के जरिए उन्हें सशक्त बना रही है। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
रेशम प्रोडक्शन सिर्फ कृषि नहीं, बल्कि रोजगार, एक्सपोर्ट और ग्रामीण विकास का इंजन है। सरकार का पूरा फोकस वैल्यू चेन को मजबूत करने, कपड़ा बाजार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाने और बुनकरों व श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा पर फोकस करना है।
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