‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान से हिमाचल के किसानों को घर बैठे मिलेगी फसल बीमा की पॉलिसी, जानिए प्रोसेस

आंकड़ों पर नजर डालें तो ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। जिले में कृषि लोन लेने वाले कुल 13,241 किसानों ने अपनी मक्का और धान की फसलों का बीमा कराया है।

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ज़िले के किसानों के लिए एक बहुत काम की ख़बर है। अब उन्हें अपनी फसल बीमा पॉलिसी के दस्तावेज़ों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कृषि विभाग ने एक नई और अनोखी पहल शुरू की है, जिसका नाम है ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान (‘Meri Policy Mere Haath’ (My Policy in My Hands) campaign)। इसके तहत बीमा कंपनी के प्रतिनिधि खुद किसानों के घर जाकर उन्हें उनकी पॉलिसी सौंपेंगे।

 स्पेशल अभियान 15 अक्टूबर से शुरू

बिलासपुर के उप कृषि निदेशक कुलभूषण धीमान (Kulbhushan Dhiman, Deputy Director of Agriculture, Bilaspur) के मुताबिक, यह स्पेशल अभियान 15 अक्टूबर से शुरू हो चुका है और पूरे एक महीने तक चलेगा । इस दौरान एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया (Agriculture Insurance Company of India) के प्रतिनिधि उन किसानों के घर जाएंगे, जिन्होंने कृषि लोन लिया है और अपनी फसलों का बीमा कराया है। प्रतिनिधि इन किसानों को उनकी बीमा पॉलिसी के दस्तावेज सीधे उनके हाथों में देंगे। इस पहल का मकसद सिर्फ कागज़ात देना नहीं है, बल्कि किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करना और फसल ख़राब होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है।

कितने किसानों को मिलेगा फायदा?

आंकड़ों पर नजर डालें तो ये अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। जिले में कृषि लोन लेने वाले कुल 13,241 किसानों ने अपनी मक्का और धान की फसलों का बीमा कराया है। इन किसानों ने कुल 2,830 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बीमा कराया है। अब अभियान के जरिए इन सभी किसानों तक उनकी बीमा पॉलिसी पहुंचाई जाएगी। 

लहसुन किसानों के लिए भी खुशख़बरी

अगर आप लहसुन की खेती करते हैं, तो ये ख़बर आपके लिए और भी ख़ास है। कृषि विभाग के मुताबिक, मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत बिलासपुर जिले में लहसुन की फसल का बीमा कराने का प्रोसेस 1 नवंबर से 30 नवंबर तक खुला रहेगा। इस दौरान किसान अपनी लहसुन की फसल का बीमा करा सकते हैं। ये उन किसानों के लिए बड़ा मौका है जो नकदी फसलों की खेती करते हैं और मौसम की मार से अपनी फसल को बचाना चाहते हैं।

फसल बीमा क्यों है ज़रूरी?

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में मौसम का मिजाज़ अचानक बदलता है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा या कीटों का हमला किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है। ऐसे में फसल बीमा ढाल का काम करता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बहुत कम प्रीमियम पर सुरक्षा मिलती है। उदाहरण के लिए, खरीफ फसलों के लिए सिर्फ 2 फीसदी और रबी फसलों के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम देना होता है। बाकी प्रीमियम का भार केंद्र और राज्य सरकार उठाती है।  

‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान सरकार की उस सोच को दिखाता है, जहां किसान को उसका हक बिना परेशानी के मिले। ये कदम न सिर्फ पारदर्शिता लाएगा, बल्कि किसानों का बीमा कंपनियों पर भरोसा भी बढ़ाएगा। 

 

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