National Gender Platform: अब और मज़बूत होंगी महिला किसान, 900 संस्थानों को कनेक्ट करने वाला मंच बदलेगा खेती की तस्वीर

केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Union Agriculture Ministry) ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए 'National Gender Platform' लॉन्च करने का ऐलान किया है। ये कोई आम योजना नहीं, बल्कि एक क्रांति का बिगुल है, जो देश की 900 से अधिक कृषि संस्थाओं (agricultural institutions) को एक मंच पर जोड़कर महिला किसानों की ताकत को राष्ट्रीय पहचान देगी।

भारत की खेती की रीढ़ कही जाने वाली महिलाएं अब सिर्फ खेतों में हाथ बंटाने वाली नहीं, बल्कि फैसले लेने वाली किसान बनेंगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Union Agriculture Ministry) ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘National Gender Platform’ लॉन्च करने का ऐलान किया है। ये कोई आम योजना नहीं, बल्कि एक क्रांति का बिगुल है, जो देश की 900 से अधिक कृषि संस्थाओं (agricultural institutions) को एक मंच पर जोड़कर महिला किसानों की ताकत को राष्ट्रीय पहचान देगी।

क्यों ज़रूरी है ये प्लेटफॉर्म?

आंकड़े बताते हैं कि भारत में खेती से जुड़ी 80 फीसदी महिलाएं खेतों में काम करती हैं, लेकिन ज़मीन की मालिकाना हक़ हो या फिर नई तकनीक की जानकारी, हर जगह उन्हें पीछे रखा गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आयोजित ‘Global Conference on Women in Agri-Food Systems’ (GCWAS-2026) में ये साफ हुआ कि महिलाओं को सशक्त बनाए बिना दोगुना किसान आमदनी का सपना पूरा नहीं हो सकता।

कैसे काम करेगा ये प्लेटफॉर्म?

ICAR के महानिदेशक एम.एल. जाट ने बताया कि ये प्लेटफॉर्म केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि एक जीवंत तंत्र है, जो ICAR संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को आपस में जोड़ेगा। इसका मकसद है-

1.तकनीक का ख़ज़ाना: महिला किसानों को खेती की नई तकनीकों से रूबरू कराना। ड्रोन से खेतों की निगरानी हो या मिट्टी की जांच की आधुनिक मशीनें, हर चीज की ट्रेनिंग अब उनके गांव तक पहुंचेगी।

2.वित्त और ज़मीन का अधिकार: महिलाओं के लिए जमीन, ऋण और डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाई जाएगी। बिना जमीन के कागजात के भी महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें, इस दिशा में काम होगा।

3.व्यावसायिक खेती को बढ़ावा: अब महिलाएं सिर्फ परिवार के लिए अनाज नहीं उगाएंगी, बल्कि उन्हें व्यावसायिक खेती से जोड़ा जाएगा। मशरूम, शहद, फूल या जैविक सब्जियां, जिसमें ज्यादा मुनाफा हो, उसकी जानकारी दी जाएगी।

महिला किसान ही क्यों हैं ख़ास?

ICAR के उप महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह का कहना है कि ये केवल समानता का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक ज़रूरत है। महिलाएं खेत से लेकर रसोई तक, यानी पूरी खाद्य श्रृंखला (Food System) की धुरी हैं। जब एक महिला किसान सशक्त होगी, तो पूरा परिवार और समृद्ध होगा। स्टडी बताती है कि महिलाओं को खेती का ज्ञान और फैसले लेने का अधिकार मिले, तो खेत की पैदावार 20 से 30 फीसदी तक बढ़ सकती है।

कैसे मिलेगी पहचान?

इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि ये महिला किसानों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देगा। अब तक जो महिलाएं सिर्फ ‘खेतिहर मजदूर’ कहलाती थीं, वे अब डेटा और रिकॉर्ड में ‘किसान’ के रूप में दर्ज होंगी। समय-समय पर जेंडर ऑडिट किया जाएगा, यानी ये जांचा जाएगा कि योजनाओं का लाभ सच में महिलाओं तक पहुंच रहा है या नहीं।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: Cow Protection In Uttar Pradesh: अब महिलाएं और एफपीओ संभालेंगे गोशालाओं की कमान, मिलेगा रोज़गार

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top