खेती में सुधार के लिए केवल सरकारी योजनाएं बनाना काफी नहीं है। उनका फ़ायदा किसानों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से काम करना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार की PM धन-धान्य कृषि योजना के तहत ज़िलों में कृषि विकास को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में अधिकारियों से कहा कि वे आपसी तालमेल के साथ काम करें, ताकि किसानों की आय बढ़े और कृषि उत्पादन में सुधार हो।
भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, पूसा परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में देश के 50 से अधिक ज़िलों के कलेक्टर, वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान बेहतर काम करने वाले ज़िलों को सम्मानित किया गया। अलग-अलग ज़िलों ने खेती में सुधार के लिए अपनाए गए अपने तरीकों और अनुभवों को भी साझा किया।
ज़िलों की ज़रूरत के हिसाब से बनेगी कृषि विकास की योजना
PM धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि विकास की योजना बनाने में ज़िलों की भूमिका अहम रखी गई है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना का ढांचा जिला कलेक्टरों ने अपने क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया है।
उन्होंने अधिकारियों से हर महीने कृषि कार्ययोजना की समीक्षा करने को कहा। अगर किसी ज़िले में काम की रफ्तार धीमी है, तो अलग-अलग विभागों को मिलकर उसे तेज करना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विभाग के साथ जल शक्ति, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और कौशल विकास से जुड़े विभागों को भी साथ काम करना होगा।
उन्होंने कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने पर भी ज़ोर दिया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के करीब 16,000 वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी और कृषि विश्वविद्यालयों के काम का फ़ायदा किसानों तक पहुंचना चाहिए।
कम उत्पादन वाले 100 ज़िलों पर ख़ास ध्यान
PM धन-धान्य कृषि योजना के तहत ऐसे 100 ज़िलों को प्राथमिकता दी गई है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फ़सल उगाने की तीव्रता कम है या किसानों को संस्थागत कर्ज आसानी से नहीं मिल पाता।
शिवराज सिंह चौहान ने धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने इसके लिए मिशन मोड में काम करने की बात कही। इससे खाली ज़मीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड योजना का दायरा बढ़ाने और किसानों तक बैंक कर्ज पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने की ज़रूरत भी बताई। ख़ासकर पूर्वी भारत और पिछड़े ज़िलों में इस पर अधिक ध्यान देने को कहा गया।
किसानों को उन्नत बीज, खाद और नई कृषि तकनीक अपनाने के लिए पूंजी की ज़रूरत होती है। ऐसे में समय पर कर्ज मिलना खेती में सुधार के लिए अहम है।
इन ज़िलों ने खेती में बदलाव के नए तरीके दिखाए
सम्मेलन में कई ज़िलों ने अपने स्तर पर किए गए कामों की जानकारी दी। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली ज़िले ने जल संरक्षण और सूखे से निपटने के प्रयासों से प्रभावित क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और कृषि उत्पादन में सुधार की जानकारी साझा की।
आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले में कम बारिश वाले क्षेत्र में कम पानी की ज़रूरत वाली और अधिक मूल्य देने वाली बागवानी फ़सलों को बढ़ावा दिया गया। बिहार के बांका ज़िले ने लिलावरन प्राकृतिक खेती और भूमि सुधार मॉडल पेश किया। इसका उद्देश्य रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करके प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, छत्तीसगढ़ के कोरबा और पंजाब के फाजिल्का में किए गए कृषि संबंधी प्रयासों की भी सराहना की गई। इन उदाहरणों से पता चलता है कि PM धन-धान्य कृषि योजना के तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग उपाय अपनाए जा सकते हैं। हर ज़िले की ज़रूरत अलग हो सकती है, इसलिए खेती में सुधार के लिए एक ही तरीका सभी जगह लागू करना जरूरी नहीं है।
अधिकारियों से मेहनत और नियमित समीक्षा की अपील
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कृषि विकास के लक्ष्य पूरे करने के लिए दृढ़ता के साथ काम करने को कहा। उन्होंने भरोसा जताया कि भाग लेने वाले ज़िले आगे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अगले समीक्षा सम्मेलन से पहले ज़िलों के बीच बेहतर काम करने की प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद जताई गई।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी सहित ग्रामीण विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कृष्ण पाल गुर्जर भी शामिल हुए। कृषि, जल शक्ति, ग्रामीण विकास, पशुपालन और दूसरे संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
PM धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कम उत्पादकता वाले ज़िलों में खेती की स्थिति सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। इसके लिए स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार योजना बनाना, विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना और काम की नियमित समीक्षा करना जरूरी होगा। शिवराज सिंह चौहान ने भी इसी बात पर ज़ोर दिया कि सरकारी योजनाओं का असर तभी दिखेगा, जब उनके तहत किए जाने वाले काम किसानों के खेतों तक पहुंचेंगे।
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