दलहन किसानों के हित में Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला, Pulses MSP-आयात पर सरकार को सौंपी ज़िम्मेदारी

Supreme Court के इस आदेश से एक पॉजिटिव संदेश गया है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका मिलकर किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत सरकार (Government of India) की ओर से किसानों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और नीतियों के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दलहन किसानों (Pulse Production) के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। किसान महापंचायत की जनहित याचिका (PIL of Kisan Mahapanchayat) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की पहल की है।

आत्मनिर्भरता और किसान कल्याण

केंद्र सरकार ने देश में दलहन उत्पादन (Pulse Production) बढ़ाने के लिए “Mission for Self-reliance in Pulses” जैसी महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसके तहत 11,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये स्कीम भारत को दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को एमएसपी का लाभ ज़रूरी रूप से करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

सरकार का ये प्रयास साफ रूप से दिखाता है कि केंद्र सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके फायदे के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य सरकार की प्रायोरिटी में शामिल है।

 उपभोक्ता और किसान दोनों के हित

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन (Additional Solicitor General N Venkataraman) ने तर्क दिया कि 2021 से 2024 के बीच दलहन उत्पादन (pulse production) में 30 लाख टन की गिरावट आई है। 2021 में जहां 273 लाख टन उत्पादन था, वह 2023-24 में घटकर 242 लाख टन रह गया। इस कमी के कारण कीमतों में उछाल आ रहा था, जिसे नियंत्रित करने के लिए आयात की अनुमति दी गई। ये एक balanced approach है, जिसमें आम जनता को महंगाई से राहत दिलाने के साथ-साथ किसानों के हितों की भी रक्षा की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट: नीति का ख़ाका तैयार हो

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ (Division bench of Chief Justice Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi) ने इस मामले में सरकार को creative suggestions दिए हैं। अदालत ने कहा कि किसानों को गेहूं और धान के साथ-साथ दलहन की खेती के लिए भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, जिससे फसल विविधीकरण (crop diversification) को बढ़ावा मिलेगा और भूजल स्तर में भी सुधार होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो सभी संबंधित पक्षों जिसमे किसान संगठनों, नीति आयोग, कृषि विशेषज्ञों और व्यापारी हैं, के साथ बैठक कर एक ऐसी नीति का ख़ाका तैयार करे, जिससे दलहन किसानों को एमएसपी का पूरा फायदा मिल सके। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 8 मई 2026 की तारीख तय की है, जिससे सरकार को इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श करने का पूरा वक्त मिलेगा।

कृषि मंत्रालय की भूमिका

यह उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्वयं इस विषय की गंभीरता को समझते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर पीली मटर पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया था। यह दर्शाता है कि सरकार के विभिन्न मंत्रालय किसानों के हितों की रक्षा के लिए समन्वय से कार्य कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर नीतिगत सुधारों के लिए तत्पर हैं।

सुप्रीम कोर्ट का सकारात्मक संदेश 

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से एक सकारात्मक संदेश गया है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका मिलकर किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार द्वारा गठित की जाने वाली समिति में सभी हितधारकों को शामिल करके एक ऐसी नीति बनाई जाएगी, जिससे दलहन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और देश दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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