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झारखंड की राजधानी रांची में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला सह संगोष्ठी का आयोजन मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार में किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यभर से आई महिलाओं ने भाग लिया और मत्स्य पालन से जुड़ी नई संभावनाओं के बारे में जानकारी हासिल की।
246 महिला लाभुकों को मिली परिसंपत्तियां
इस महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत 246 महिला लाभुकों के बीच लाखों रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। इन परिसंपत्तियों में चार पहिया पिकअप वाहन, तीन पहिया वाहन, गिल नेट और लाइफ जैकेट जैसी ज़रूरी चीजें शामिल थीं।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को मत्स्य पालन के क्षेत्र में मज़बूत बनाना और उन्हें रोज़गार के बेहतर अवसर प्रदान करना है। महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला के ज़रिए महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाया गया, जिससे वे अपने काम को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।
कार्यक्रम में शामिल हुए कई अधिकारी
इस महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला में मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार, उप मत्स्य निदेशक मनोज कुमार ठाकुर, संजय कुमार गुप्ता और रवि रंजन कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा सभी ज़िलों से महिला लाभुक और मत्स्य पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है।
मत्स्य पालन से बदली महिलाओं की ज़िंदगी
कार्यक्रम में शामिल महिला लाभुकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मत्स्य पालन से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां आय सीमित थी, वहीं अब उनकी कमाई बढ़ी है और जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।
महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला में महिलाओं ने ये भी बताया कि मत्स्य पालन उनके लिए एक स्थायी आय का जरिया बन गया है। इससे वे अपने परिवार की ज़रूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मान
इस महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला के दौरान उन महिलाओं को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने मत्स्य पालन के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने इन महिलाओं को सम्मान देकर उनका हौसला बढ़ाया।
ये सम्मान अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का काम कर रहा है, जिससे वे भी मत्स्य पालन को अपनाकर आगे बढ़ सकें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा मज़बूती का आधार
इस तरह की महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला न केवल महिलाओं को सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती दे रही है। जब महिलाएं मत्स्य पालन के ज़रिए आय अर्जित करती हैं, तो इसका सीधा असर उनके परिवार और गांव के विकास पर पड़ता है।
सरकार और विभाग की ये पहल दिखाती है कि सही सहयोग और संसाधन मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
आगे बढ़ने की नई दिशा
रांची में आयोजित ये महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला महिलाओं के लिए एक नई दिशा लेकर आई है। इससे उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब महिलाएं मत्स्य पालन को एक मज़बूत व्यवसाय के रूप में अपनाकर अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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Pic Credit: PB-SHABD

