Medicinal Farming Success: सागर के किसान ने अश्वगंधा से कमाए 1.5 लाख प्रति एकड़

राहुल ने 10 एकड़ जमीन पर अश्वगंधा की बुवाई की, जिसमें से 5 एकड़ की फसल की कटाई पूरी हो चुकी है और परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।

Medicinal Farming Success: परंपरागत खेती से आगे बढ़कर अब किसान नए-नए विकल्प तलाश रहे हैं, जो कम लागत में ज्यादा मुनाफ़ा दे सकें। मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी कलां के एक युवा किसान राहुल लोधी ने इसी सोच के साथ औषधीय खेती को अपनाया और आज सफ़लता की नई मिसाल बन गए हैं।

नौकरी छोड़ शुरू की अश्वगंधा की खेती

देवरी कलां निवासी राहुल लोधी ने ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करने के बजाय खेती को ही अपना करियर बनाया। उन्होंने पारंपरिक फसलों की जगह औषधीय पौधे अश्वगंधा की खेती शुरू की, जो आज उन्हें अच्छा मुनाफ़ा दे रही है। राहुल ने 10 एकड़ जमीन पर अश्वगंधा की बुवाई की, जिसमें से 5 एकड़ की फसल की कटाई पूरी हो चुकी है और परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।

Medicinal Farming Success: सागर के किसान ने अश्वगंधा से कमाए 1.5 लाख प्रति एकड़
Pic credit: SHABD

कम लागत में ज्यादा मुनाफ़ा

राहुल के अनुसार, अश्वगंधा की खेती में प्रति एकड़ करीब 30 हज़ार रुपये की लागत आती है। वहीं उत्पादन 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ तक होता है। बाज़ार में अच्छी कीमत मिलने के कारण प्रति एकड़ लगभग 1.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफ़ा संभव है। यह पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी साबित हो रही है।

देशभर से मिल रही मांग

राहुल की फसल की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि उनकी उपज की मांग नीमच, कोटा सहित कई शहरों की आयुर्वेदिक कंपनियों से आ रही है। इससे उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती और उचित मूल्य भी मिलता है।

औषधीय खेती: सरकार की योजनाओं से मिल रहा बढ़ावा

देश में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) और राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत कई योजनाएं चला रही है।

इन योजनाओं के जरिए किसानों को:

  • औषधीय पौधों की खेती के लिए सब्सिडी
  • प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन
  • बेहतर बीज और रोपण सामग्री
  • मार्केटिंग और खरीद की सुविधा

मिल रही है, जिससे किसान पारंपरिक खेती से हटकर वैकल्पिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कम पानी, कम देखरेख में बेहतर विकल्प

राहुल लोधी का मानना है कि अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलें कम पानी और कम देखरेख में तैयार हो जाती हैं। ऐसे में यह उन क्षेत्रों के लिए भी बेहतर विकल्प है, जहां पानी की कमी है या सिंचाई के सीमित साधन हैं।

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किसानों के लिए प्रेरणा बना मॉडल

राहुल की सफ़लता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। कई किसान अब औषधीय खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। देवरी कलां के युवा किसान राहुल लोधी की कहानी यह साबित करती है कि सही योजना और नए प्रयोगों के जरिए खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। औषधीय खेती न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र में नए अवसर भी खोल रही है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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