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अब तक भारतीय मछुआरे अपने ही समुद्री इलाके (Exclusive Economic Zone) में सीमित थे। लेकिन केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब भारतीय कंपनियों और जहाजों को “Letter of Authorization” यानी अनुमति पत्र के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्र (International Waters) यानी हाई सी में मछली पकड़ने की इजाजत मिलेगी।
ये कदम भारत को उन ताकतवर देशों की कतार में खड़ा कर सकता है जो पहले से ही हाई सी फिशिंग में माहिर हैं, जैसे कि यूरोपीय देश और चीन।
भारतीय मछुआरे क्यों हैं ख़ास?
तमिलनाडु और केरल के मछुआरे अपनी मेहनत, तकनीकी समझ और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। ईरान और ओमान जैसे देश पिछले 8-10 सालों में भारी संख्या में भारतीय मछुआरों को काम पर रख रहे हैं।
हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव के बीच 657 भारतीय मछुआरों को ईरान से निकालकर आर्मेनिया और अजरबैजान भेजा गया था। ये बताता है कि भारतीय मछुआरे कितनी बड़ी संख्या में विदेशों में काम कर रहे हैं।
नई योजना से क्या फायदा?
सरकार चाहती है कि भारतीय मछुआरों को देश में ही बेहतर अवसर मिलें, ताकि विदेश जाने की मजबूरी खत्म हो।
इस नई नीति से:
- मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी
- भारत को वैश्विक समुद्री कारोबार में हिस्सेदारी मिलेगी
- विदेश जाने वाले कुशल मछुआरे अब देश में रहकर कमा सकेंगे
कड़े नियम भी लाए गए
नवंबर में सरकार ने नए नियम जारी किए-
- विदेशी जहाजों को भारतीय जल में मछली पकड़ने पर रोक
- अवैध मछली पकड़ने के खिलाफ राष्ट्रीय कार्य योजना
- बड़े मोटर चालित जहाजों के लिए एक्सेस पास अनिवार्य
अब तक 4,000 से ज्यादा पास जारी हो चुके हैं। देश में कुल 2.38 लाख जहाज रजिटर्ड हैं, जिनमें से 64,000 बड़े जहाजों को पास लेना अनिवार्य होगा।
निवेश और व्यापार को भी बढ़ावा
सरकार ने और भी अहम फैसले लिए हैं:
- हाई सी में पकड़ी गई मछली को भारत लाने पर आयात नहीं माना जाएगा
- सीधे दूसरे देश बेचने पर इसे निर्यात माना जाएगा
- विदेशी विशेषज्ञों के वीजा नियमों में ढील, ताकि आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण मिल सके
चुनौतियां भी हैं
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी ग्लोबल हिस्सेदारी 8 फीसदी है। यहां लगभग 40 लाख छोटे मछुआरे हैं, जो तट के पास 12 समुद्री मील के अंदर ही मछली पकड़ते हैं।
लेकिन इस क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है:
- तट के पास ज्यादा भीड़
- जलवायु परिवर्तन का असर
- बाजार में उतार-चढ़ाव
ऐसे में हाई सी फिशिंग इन छोटे मछुआरों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है।
क्या भारत बनेगा समुद्री ताकत?
अगर यह योजना सही से लागू हुई, तो भारत न सिर्फ सैकड़ों मछुआरों को रोजगार दे पाएगा, बल्कि अरबों डॉलर के वैश्विक मत्स्य कारोबार में भी अपनी मजबूत पैठ बना सकता है। समुद्र में बदलाव का यह मौका भारत को नहीं गंवाना चाहिए।
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