Mango Crop Alert: आम की फ़सल पर ‘रेड बैंडेड कैटरपिलर’ का ख़तरा, जरा सी लापरवाही पड़ेगी भारी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अनियमित बारिश, तापमान में बदलाव और बढ़ती नमी इस कीट के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर रहे हैं।

Mango Crop Alert: भारत में आम की बढ़ती खेती के बीच एक नया कीट किसानों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। “रेड बैंडेड कैटरपिलर” नाम का यह कीट खासतौर पर Bihar, Uttar Pradesh और West Bengal जैसे राज्यों में तेजी से फैल रहा है। बदलते मौसम और बढ़ती नमी के कारण इसका प्रकोप बढ़ा है, जिससे कई क्षेत्रों में फसल को भारी नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह कीट आम की पैदावार पर बड़ा असर डाल सकता है।

बढ़ती पैदावार के बीच नई चुनौती

भारत में फलों के कुल रकबे में आम की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है और इसका उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इसके साथ ही कीटों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। रेड बैंडेड कैटरपिलर हाल के वर्षों में एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है, जिसने कई क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ जगहों पर इसका प्रकोप इतना अधिक देखा गया है कि फसल को भारी नुकसान हुआ है, हालांकि अत्यधिक नुकसान आमतौर पर सीमित और गंभीर प्रभावित क्षेत्रों में ही होता है।

मौसम बना बड़ा कारण

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अनियमित बारिश, तापमान में बदलाव और बढ़ती नमी इस कीट के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर रहे हैं। उमस भरा मौसम इसके जीवन चक्र को तेज करता है, जिससे यह कम समय में कई पीढ़ियां विकसित कर लेता है और तेजी से फसल को नुकसान पहुंचाता है।

क्या है रेड बैंडेड कैटरपिलर?

बैंडेड कैटरपिलर कीट आम के फलों को सीधे नुकसान पहुंचाता है। मादा पतंगा फलों या डंठल के पास अंडे देती है, जो बाद में इल्ली (लार्वा) में बदल जाते हैं। इन इल्ली के शरीर पर लाल और सफेद धारियां होती हैं, जिससे इसकी पहचान आसान हो जाती है। यह इल्ली फल के अंदर घुसकर गूदे और गुठली को खाती है, जिससे फल अंदर से खराब हो जाता है।

ऐसे करें पहचान

इस कीट के हमले की पहचान कुछ प्रमुख संकेतों से की जा सकती है। कच्चे फलों का समय से पहले गिरना, फलों पर छोटे छेद दिखाई देना, और अंदर से सड़न या बदबू आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई बार कटे हुए फल के अंदर इल्ली भी मिलती है। यह कीट एक सीजन में 3 से 4 पीढ़ियां तैयार कर सकता है, जिससे इसका प्रकोप तेजी से बढ़ता है।

बचाव के उपाय क्या हैं?

फसल को बचाने के लिए बाग की साफ़-सफ़ाई सबसे जरूरी है। गिरे हुए संक्रमित फलों को तुरंत हटाकर नष्ट करना चाहिए, ताकि कीट का जीवन चक्र टूट सके। बाग में हवा का अच्छा संचार बनाए रखने के लिए सूखी टहनियों और झाड़ियों को हटाना भी जरूरी है। छोटे फलों को पेपर या पॉली बैग से कवर करना एक प्रभावी उपाय माना जाता है, जो फलों को काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है।

जैविक और रासायनिक नियंत्रण

जैविक उपायों के तहत नीम आधारित उत्पाद जैसे एजाडिरैक्टिन का उपयोग किया जा सकता है। वहीं, जब प्रकोप अधिक हो जाए तो रासायनिक नियंत्रण जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फल के मटर के आकार पर पहला छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल और इमामेक्टिन बेंजोएट जैसी दवाएं प्रभावी मानी जाती हैं। छिड़काव शाम के समय करना बेहतर होता है और जरूरत पड़ने पर 12–15 दिन बाद दोहराया जा सकता है।

एकीकृत प्रबंधन ही समाधान

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस कीट से बचाव के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) सबसे प्रभावी तरीका है। इसमें साफ़-सफ़ाई, जैविक उपाय और रासायनिक नियंत्रण का संतुलित उपयोग शामिल होता है। साथ ही मौसम के बदलावों पर नजर रखना भी जरूरी है, क्योंकि अधिक नमी और बादल इस कीट के प्रकोप को बढ़ा सकते हैं।

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