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मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले ने (Vidisha district of Madhya Pradesh) ग्रासे ख़त्म करने के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने ‘Samriddh Vidisha Model’ की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य जिले के हर गांव को गरीबी मुक्त बनाना है। यह मॉडल सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि परिवारों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें रोज़गार से जोड़ने की व्यवहारिक रणनीति है।
आमदनी के कई साधन
मॉडल की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे। महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर ‘लखपति दीदी’ बनाने पर जोर है।
सिर्फ उगाना नहीं, बेचना भी सीखें
किसानों को एफपीओ से जोड़कर सामूहिक बिक्री, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। यानी किसान सिर्फ उपज बेचने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाजार तक पहुंचेगा। बैंक लोन दिलाने में भी मदद मिलेगी।
15 हजार युवाओं को रोज़गार
जिले के 15 हजार युवाओं को आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य है। आरसेटी के जरिए ब्यूटीशियन, सिलाई जैसे कोर्स कराए जा रहे हैं। 30 दिन के प्रशिक्षण के बाद इच्छुक युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंक लोन दिलाया जाएगा।
‘Vidisha Development Index’ से निगरानी
कृषि, पशुपालन, कौशल विकास और जल संसाधन जैसी योजनाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा। रियल टाइम डैशबोर्ड और ‘विदिशा डेवलपमेंट इंडेक्स’ बनाया जाएगा, जिसमें पानी, रोजगार, आय और मार्केटिंग की प्रगति दिखेगी। हर छह महीने में पंचायत से जिले तक समीक्षा होगी।
जनभागीदारी ही असली ताकत
ग्राम सभा, स्वयं सहायता समूह, एफपीओ, पंचायत प्रतिनिधि, सीएसआर और वित्तीय संस्थाएं इस मॉडल से जुड़ेंगी। अगर विदिशा सफल रहा, तो यह मॉडल देश के दूसरे इलाकों के लिए भी नक्शा बनेगा। संक्षेप में, ‘समृद्ध विदिशा मॉडल’ गरीबी से लड़ाई का वह फॉर्मूला है, जहां हर हाथ को काम और हर परिवार को सम्मान मिलेगा।
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