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हैदराबाद में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 के समापन सत्र में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कृषि से जुड़े लक्ष्यों और वादों को तय समय में पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन पर अब तेजी से काम होना चाहिए। केवल बैठक और चर्चा से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि फैसलों को ज़मीन पर लागू करना जरूरी है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर एक कृषि टीम की तरह काम कर रहे हैं। इसमें वैज्ञानिक, किसान, केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी सभी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर खेती में बदलाव लाने के लिए काम करना होगा।
बैठक के बाद ज़मीन पर दिखे परिणाम
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में लिए गए फैसलों को तय समय में पूरा करने पर ख़ास ज़ोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर किसी राज्य ने दिसंबर तक Farmer ID बनाने का लक्ष्य तय किया है, तो उसे उस समय सीमा में पूरा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर बार-बार बैठक करने की ज़रूरत नहीं है। जरूरी यह है कि जिन फैसलों पर सहमति बनी है, उन पर काम हो और उसका नतीजा दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि कृषि की स्थिति में बदलाव लाना है। उन्होंने राज्यों से कृषि अभियानों के दौरान किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने की भी बात कही।
Farmer ID और AgriStack का काम तेज करने के निर्देश
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में Farmer ID और AgriStack से जुड़े काम की भी समीक्षा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि तेलंगाना और कर्नाटक में Farmer ID बनाने का काम 75 प्रतिशत से ज्यादा पूरा हो चुका है।
तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में ज़मीन की पहचान से जुड़े georeferencing के काम में भी प्रगति हुई है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में Digital Crop Survey पूरा हो चुका है।
हालांकि, केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में Farmer ID का काम अभी और तेज करने की ज़रूरत है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आने वाले समय में कई कृषि योजनाएं और व्यवस्थाएं Farmer ID पर निर्भर होंगी। इसलिए कोई भी राज्य पीछे नहीं रहना चाहिए।
ज़मीन के रिकॉर्ड को Farmer Registry से जोड़ने पर ज़ोर
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में land records और Farmer Registry को आपस में जोड़ने पर भी चर्चा हुई। जिन राज्यों में ज़मीन के parcels को अभी तक link नहीं किया गया है, वहां काम तेज करने को कहा गया।
तमिलनाडु और केरल में इस काम पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत बताई गई। केरल में land records और Farmer Registry के बीच बेहतर coordination सुनिश्चित करने की बात कही गई।
दक्षिणी राज्यों में tenant farmers, sharecroppers और agricultural tenants के लिए Standard Operating Procedures यानी SOP तैयार कर उन्हें लागू करने को भी कहा गया। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करना है। पुडुचेरी और लक्षद्वीप को गांवों के नक्शों का georeferencing करने के निर्देश दिए गए।
किसानों को अपनी भाषा में मिलेगी सलाह
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों तक कृषि सलाह पहुंचाने के लिए Bharat Vistar की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को हर छोटी समस्या के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।
Bharat Vistar के जरिए किसान मोबाइल फोन से अपनी समस्या पूछ सकेंगे। फिलहाल यह हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है। इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत 13 क्षेत्रीय भाषाओं तक बढ़ाया जाएगा।
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से इस व्यवस्था को जल्द पूरा करने और अपनी-अपनी सरकारी कृषि योजनाओं को Bharat Vistar से जोड़ने को भी कहा गया।
Lab से खेत तक पहुंचे कृषि शोध
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में कृषि शोध को किसानों तक पहुंचाने पर भी ज़ोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में करीब 16,000 वैज्ञानिक हैं और ICAR संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और KVKs की जिम्मेदारी केवल शोध करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक साथ बैठकर काम नहीं करेंगे और शोध खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा। राज्यों को 15 या 20 दिन के कृषि अभियानों की योजना बनाने और उनमें केंद्र के वैज्ञानिकों को शामिल करने की बात कही गई।
भारत को कृषि में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने का लक्ष्य
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को दुनिया का food basket बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह संभव है, लेकिन इसके लिए केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसानों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कृषि में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए आगे भी सुधार जारी रखने की बात कही।
28 और 29 सितंबर को होगी रबी कॉन्फ्रेंस
बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली के पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी टीम के साथ शामिल होंगे।
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 के बाद होने वाली इस बैठक में रबी सीजन में बोई जाने वाली फ़सलों और उनके क्षेत्रफल से जुड़े प्लान पर चर्चा होगी। इसके आधार पर बीज, खाद और दूसरी जरूरी चीजों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा।
सम्मेलन में तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्री, कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्र और DARE के सचिव एवं ICAR महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट सहित कई अधिकारी शामिल हुए।
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