नई दिल्ली में 13 जून को आयोजित BASAI (Bharat Agricultural Science and Innovation Association) के 7वें वार्षिक दिवस समारोह में देशभर से कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, महिला किसान और नीति निर्माता एक मंच पर जुटे। इस साल का आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित International Year of the Woman Farmer 2026 को समर्पित रहा, जिसका केंद्र बिंदु भारतीय कृषि में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और योगदान था।
महिला किसानों को पहचान और अवसर देने पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गान से हुई, जिसके बाद BASAI की अध्यक्ष संदीपा कानिटकर ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि की वास्तविक तस्वीर तब तक अधूरी है, जब तक महिला किसानों के योगदान को उचित पहचान और सम्मान नहीं मिलता।
मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भागीदारी को देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती से जोड़ते हुए उनके सशक्तिकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में कृषि आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार सिंह ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और तकनीक तक उनकी पहुंच को लेकर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर T. Stanes की पूर्णकालिक निदेशक लक्ष्मी नारायणन और कंपनी के निदेशक वी. रामचंद्र कौंडिन्य ने भी कृषि क्षेत्र में समावेशी विकास और टिकाऊ खेती की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
BASAI की विशेष पुस्तकें और नई पहलें लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान BASAI की कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इनमें BASAI मैगज़ीन का विशेष स्मारक संस्करण, International Year of the Woman Farmer पर आधारित विशेष पुस्तक और महिला किसानों को समर्पित एक फिलैंथ्रॉपिक स्टाम्प शामिल रहे। साथ ही संगठन ने विभिन्न कार्यबलों (Task Forces) की घोषणाएं भी कीं, जिनका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
महिलाएं कैसे खेती को दे रही नया स्वरूप
समारोह का सबसे चर्चित सत्र रहा पैनल डिस्कशन, जिसका विषय था- “Women Shaping Indian Agriculture: Past, Present and Future”। इस चर्चा में Corteva Agriscience की शबनम हुसैन, Syngenta India की संगीता डावर, Dayal Group की निदेशक अमृता कुमार और Bioprime की संस्थापक रेणुका दीवान ने भाग लिया। चर्चा का संचालन BASAI की अध्यक्ष संदीपा कानिटकर ने किया।
पैनल में महिलाओं की तकनीक तक पहुंच, कृषि नेतृत्व, उद्यमिता, कौशल विकास और भविष्य की कृषि में उनकी बढ़ती भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि महिला किसानों को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि कृषि परिवर्तन की साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
महिला कृषि नेतृत्व को मिला सम्मान
समारोह में विभिन्न श्रेणियों के तहत कई पुरस्कार प्रदान किए गए:
S.H.E. Krishi Shakti Award से उत्तर प्रदेश की अर्निमा त्यागी, हरियाणा की संतोष देवी, महाराष्ट्र की मनीषा सुनील पिंगले, ज्योति प्रमोद पाटिल, डॉ. वसंत धिकाले और राजस्थान की दीपिका कुमारी को सम्मानित किया गया।
S.H.E. Agri-Technical Excellence Award डॉ. विमला प्रकाश और डॉ. मेधा कुलकर्णी को प्रदान किया गया।
वहीं S.H.E. Agri Leadership Award से लक्ष्मी नारायणन, रेणुका दीवान, अमृता कुमार और सुप्रिया सिंगला को सम्मानित किया गया।
साथ ही हरियाणा के फरीदाबाद स्थित नचौली गांव के नागर परिवार की महिलाओं, श्यामवती, रामवती, तेजपाली, सुशीला और सोनू को जैविक खेती में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
महिला किसानों ने सुनाई बदलाव की कहानियां
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से आई महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। उनकी कहानियों ने दिखाया कि महिलाएं अब केवल खेती में सहयोगी भूमिका नहीं निभा रहीं, बल्कि निर्णय लेने, नए प्रयोग करने और कृषि आधारित उद्यम खड़े करने में भी आगे आ रही हैं।
समापन सत्र में प्रसिद्ध वक्ता डॉ. सीमा शर्मा ‘सरहद’ ने महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक बदलाव में उनकी भूमिका पर प्रेरक विचार साझा किए।
S.H.E. पहल: कृषि के लिए एक नया दृष्टिकोण
महिला किसान वर्ष 2026 को समर्पित करते हुए BASAI के CEO विपिन सैनी ने S.H.E. (सस्टेनेबिलिटी, हेल्थ और इकोनॉमी) पहल की शुरुआत की। ये पहल कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास से जोड़कर देखने का प्रयास करती है।
S.H.E. के तीन प्रमुख स्तंभ हैं-
S- Sustainability (सततता): मिट्टी की सेहत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
H- Health (स्वास्थ्य): स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित खाद्य उत्पादन और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य।
E- Economy (अर्थव्यवस्था): किसानों की आय बढ़ाना, लागत कम करना और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देना।
BASAI के अनुसार महिलाएं इन तीनों स्तंभों को मजबूत करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चाहे बीज संरक्षण हो, जैविक खेती, पोषण आधारित खेती या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता, महिलाएं कृषि परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं।
BASAI 2026 का ये आयोजन केवल एक वार्षिक समारोह नहीं था। ये भारतीय कृषि में महिलाओं की भूमिका को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की एक पहल के रूप में सामने आया। पूरे कार्यक्रम का संदेश साफ़ था कि अगर कृषि को टिकाऊ, लाभकारी और भविष्य के लिए तैयार बनाना है, तो महिला किसानों को बराबरी की पहचान, संसाधन और नेतृत्व के अवसर देने होंगे।
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