ICC’s Krishi Vikram 2026 में चिराग पासवान ने Food Processing को बताया किसानों की आय बढ़ाने का सबसे बड़ा रास्ता

चिराग पासवान ने ICC's Krishi Vikram 2026 में Food Processing, Value addition और किसानों की आय बढ़ाने पर बड़ा रोडमैप पेश किया।

नई दिल्ली में आयोजित Krishi Vikram 2026 के दूसरे संस्करण में देश की कृषि और Food Processing से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। “विकसित कृषि फॉर विकसित भारत 2047” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय मंच पर नीति निर्माता, उद्योग जगत, किसान उत्पादक संगठन (FPO), वित्तीय संस्थान और देशभर के किसान एक साथ जुटे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान रहे। उन्होंने कहा कि भारत को अब केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि में Value addition बढ़ाकर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करनी होगी।

Krishi Vikram 2026 में Food Processing पर दिया गया विशेष ज़ोर

अपने संबोधन में चिराग पासवान ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के Food Processing सेक्टर ने अच्छी प्रगति की है, लेकिन अभी भी Value addition के क्षेत्र में काफ़ी काम किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि एक समय भारत खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था, इसलिए उत्पादन बढ़ाना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। आज देश न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि कई देशों को खाद्यान्न निर्यात भी कर रहा है।

चिराग पासवान ने कहा कि अब समय उत्पादन से आगे बढ़कर गुणवत्ता और Value addition पर ध्यान देने का है। उनका मानना है कि यही बदलाव किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगा।

प्रोसेसिंग की कमी से किसानों को होता है नुक़सान

Krishi Vikram 2026 के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि कई बार किसान आलू और टमाटर जैसी फ़सलों को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसका कारण मांग की कमी नहीं, बल्कि पर्याप्त प्रोसेसिंग और स्टोरेज व्यवस्था का अभाव है।

उन्होंने कहा कि यदि किसानों के पास प्रोसेसिंग की सुविधा होगी तो वे अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और बेहतर क़ीमत मिलने पर बाज़ार में बेच सकेंगे। इससे फ़सल खराब होने की समस्या भी कम होगी और किसानों की आमदनी में सुधार आएगा।

ICC's Krishi Vikram 2026 में चिराग पासवान ने Food Processing को बताया किसानों की आय बढ़ाने का सबसे बड़ा रास्ता

PMFME योजना से तैयार हुए नए उद्यमी

चिराग पासवान ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत दो लाख उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे सरकार पहले ही पूरा कर चुकी है।

उन्होंने लद्दाख की एक महिला उद्यमी का उदाहरण देते हुए बताया कि वह पहले किसी दूसरे की सीबकथॉर्न यूनिट में काम करके आठ हजार रुपये प्रतिमाह कमाती थीं। आज वह अपना खुद का उद्यम चला रही हैं, करोड़ों रुपये का कारोबार कर रही हैं और 25 लोगों को रोज़गार भी दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी कहानियां बताती हैं कि Food Processing केवल कारोबार नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार और आत्मनिर्भरता का मज़बूत माध्यम बन सकती है।

प्रोसेस्ड फूड को लेकर सोच बदलने की ज़रूरत

अपने संबोधन में चिराग पासवान ने कहा कि समाज में ये धारणा बदलनी होगी कि प्रोसेस्ड फूड हमेशा खराब होता है। उन्होंने कहा कि घर में बनने वाला पापड़, अचार, दही और अन्य खाद्य उत्पाद भी Food Processing का ही हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य गुणवत्ता और बड़े स्तर पर उत्पादन को साथ लेकर आगे बढ़ना होना चाहिए, ताकि दुनिया के हर बाज़ार में “Made in India” भरोसे का प्रतीक बन सके।

कृषि को आय आधारित मॉडल की ओर ले जाने पर ज़ोर

Krishi Vikram 2026 में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि भारत खाद्यान्न उत्पादन और कृषि निर्यात में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसके बावजूद फलों और सब्जियों की कटाई के बाद होने वाला नुक़सान अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कृषि को वैल्यू एडेड उत्पादों, मज़बूत किसान उत्पादक संगठनों और जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में आगे बढ़ाना होगा। साथ ही भारतीय आम जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में मज़बूत पहचान दिलानी होगी।

किसानों की आय बढ़ाने में FPO और एग्रो प्रोसेसिंग की बड़ी भूमिका

आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने कहा कि अब सरकार का फ़ोकस केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि देश के 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं। ऐसे में किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी संस्थाएं उन्हें बेहतर बाज़ार और उचित मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने ये भी कहा कि एग्रो प्रोसेसिंग ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग और रोज़गार बढ़ाने का मज़बूत माध्यम बन सकती है। इसके लिए छोटे पारंपरिक उत्पाद क्लस्टर और बड़े उत्पादन क्लस्टर दोनों को समान रूप से बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

ICC's Krishi Vikram 2026 में चिराग पासवान ने Food Processing को बताया किसानों की आय बढ़ाने का सबसे बड़ा रास्ता

तकनीक और व्यापार से बदलेगा कृषि क्षेत्र

कार्यक्रम में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि तकनीक और सही जानकारी कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है। उन्होंने बताया कि भारत के कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते होने से कृषि निर्यात के नए अवसर बन रहे हैं।

वहीं ICC एग्री बिजनेस एंड Food Processing समिति के अध्यक्ष श्रीकांत गोयनका ने कहा कि कृषि को अधिक उत्पादक, जलवायु अनुकूल, तकनीक आधारित और बाज़ार से जुड़ा बनाना समय की ज़रूरत है। उन्होंने आधुनिक सिंचाई, प्रिसिजन फार्मिंग, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, Value addition और डिजिटल तकनीकों को भविष्य की कृषि का आधार बताया।

विकसित भारत 2047 के लिए नई दिशा

Krishi Vikram 2026 में देशभर के किसान उत्पादक संगठन, एग्री स्टार्टअप, वित्तीय संस्थान और विभिन्न राज्यों से आए किसान प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया गया कि सरकार, उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साझा प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है।

अपने संबोधन के अंत में चिराग पासवान ने कहा कि भारत को अब कृषि में केवल अधिक उत्पादन करने वाला देश नहीं, बल्कि अधिक मूल्य जोड़ने वाला देश बनना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि Food Processing, Value addition, गुणवत्ता और आधुनिक तकनीकों पर लगातार काम किया गया तो किसानों की आय बढ़ेगी और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने में कृषि क्षेत्र सबसे मज़बूत आधार बनेगा।

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