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सुबह की चाय हो या बच्चों की बोतल, हर भारतीय घर की रसोई में दूध की अहमियत सबसे ऊपर होती है। लेकिन क्या आपको भरोसा है कि आपके घर आने वाला दूध सौ फीसदी शुद्ध है? अक्सर ख़बरों में दूध में पानी, यूरिया या डिटर्जेंट मिलाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इन सबके बीच, लाखों छोटे किसानों और दूध विक्रेताओं का कारोबार बिना किसी Formal Registration के ही चलता रहा है। इसी उलझन को सुलझाने और आपकी सेहत को सेफ रखने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब देश के हर स्वतंत्र दूध उत्पादक (independent milk producer) और दूध विक्रेता (milk seller) के लिए FSSAI में रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना Mandatory कर दिया गया है।
आख़िर क्यों उठाया ये सख्त कदम?
दरअसल, FSSAI ने पाया कि देश के कई हिस्सों में बिना रजिस्ट्रेशन के दूध का कारोबार हो रहा है, जिससे मिलावट पर लगाम लगाना मुश्किल हो रहा था। बता दें कि पिछले महीने संसद में भी मिलावट का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। राज्यसभा में दूध में यूरिया, पनीर में स्टार्च और यहां तक कि आइसक्रीम में डिटर्जेंट मिलाए जाने के गंभीर आरोप लगे थे।इसी को देखते हुए FSSAI ने 11 मार्च 2026 को यह ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिया।
किन-किन पर लागू होगा नियम?
ये नियम सभी स्वतंत्र दूध उत्पादकों (जो किसी डेयरी सहकारी समिति के सदस्य नहीं हैं), दूध इकट्ठा करने वाले छोटे व्यापारियों, लोकल दूध वेंडर्स और घर-घर दूध पहुंचाने वाले एजेंटों पर लागू होगा। हालांकि, जो किसान किसी डेयरी सहकारी समिति के सदस्य हैं और पूरा दूध उसी समिति को बेचते हैं, उन्हें इससे छूट दी गई है।
क्या है प्रोसेस और कितना खर्च?
अगर आप एक छोटे दूध विक्रेता हैं, तो आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। FSSAI ने प्रोसेस को बेहद आसान बना दिया है।
1.रजिस्ट्रेशन: छोटे कारोबारियों को सिर्फ 100 रुपये सालाना शुल्क देकर आसानी से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
2.लाइसेंस: अगर आपका कारोबार थोड़ा बड़ा है या आप रोजाना 500 लीटर से ज्यादा दूध की प्रोसेसिंग करते हैं, तो आपको राज्य या केंद्रीय लाइसेंस लेना होगा, जिसकी फीस 2,000 से 7,500 रुपये सालाना तक हो सकती है।
3.रजिस्ट्रेशन के लिए FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट (FoSCoS पोर्टल) पर ऑनलाइन अप्लाई करना होगा। इसके लिए आधार कार्ड, बिजनेस एड्रेस प्रूफ और दूध से जुड़ी बुनियादी जानकारी की जरूरत होगी।
सरकार की निगरानी और विशेष अभियान
इस फैसले को सख़्ती से लागू करने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी (food safety officer) अब नियमित रूप से दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लाइसेंस की जांच करेंगे। साथ ही, दूध को ख़राब होने से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले चिलरों का inspection भी समय-समय पर किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दूध सही तापमान पर स्टोर किया जा रहा है।
सरकार का ये भी प्लान है कि Special Registration Drive चलाकर हर उस विक्रेता को कवर किया जाए जो अब तक इस दायरे से बाहर था।
कारोबारियों और उपभोक्ताओं को होगा बंपर फायदा
हो सकता है कि शुरू में छोटे दूध विक्रेताओं को ये प्रोसेस थोड़ी मुश्किल लगे, लेकिन लंबे समय में ये उनके लिए वरदान साबित होगी।
- विक्रेताओं को फायदा: रजिस्ट्रेशन होने से उनके कारोबार को आधिकारिक पहचान मिलेगी. वे बड़ी डेयरी कंपनियों से जुड़ सकेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
- उपभोक्ताओं को राहत: आपको मिलावटी दूध से मुक्ति मिलेगी। जब दूध की पूरी सप्लाई चेन रजिस्टर्ड होगी, तो गुणवत्ता पर पारदर्शिता और निगरानी बढ़ेगी।
अब मिलावट पर पूरी तरह लगाम
FSSAI का ये फैसला भारत के डेयरी सेक्टर को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। ये न सिर्फ मिलावटखोरी पर रोक लगाएगा, बल्कि देश के लाखों छोटे दूध कारोबारियों को मुख्यधारा से जोड़ेगा। अब अगर आपके मोहल्ले वाला दूध वाला भी रजिस्टर्ड होगा, तो उसकी विश्वसनीयता अपने आप बढ़ जाएगी। तो अगली बार जब आप दूध खरीदें, तो एक बार जरूर पूछें – ‘भइया, आपके पास FSSAI का लाइसेंस है ना?’ क्योंकि आपकी सेहत ही आपकी असली दौलत है।
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